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Saraikela : भारी बारिश से सरायकेला का जनजीवन अस्त-व्यस्त, टापू में तब्दील हुआ कोर्ट, न्यायिक कार्य पर असर

saraikela : सरायकेला सहित आस-पास के क्षेत्रों में पिछले चौबीस घंटों से रुक-रुककर भारी बारिश हो रही है. इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. इस बीच सरायकेला कोर्ट परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल भी खुल गई है. आलम यह है कि आस-पास जलजमाव से कोर्ट टापू में तब्दील हो गया है. कोर्ट के गेट के अलावा अन्य जगहों पर तालाब जैसी स्थिति बन गई है. इसके वकील और मुवक्किल के अलावा अन्य कर्मचारियों का कोर्ट पहुंचना मुश्किल हो गया है. इसका सीधा असर न्यायिक कार्य पर पड़ रहा है. शनिवार को शनिवार को सरायकेला जिला बार एसोसियेशन के अध्यक्ष और सचिव ओमप्रकाश ने पूरी स्थिति का मुआयना किया. साथ ही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र भेजकर अवगत कराया कि भारी जलजमाव एवं किसी भी कोर्ट रुम में जाने का रास्ता नहीं रहने के कारण कोर्ट में जाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में अधिवक्ता कोर्ट से अलग रहेंगे.

कई गाड़ियां पानी में फंसकर हुई बंद

इधर कोर्ट जाने के क्रम में कई गाड़ियां भी पानी में फंसकर बंद हो गई. इन सारी बातों से उच्च न्यायालय, इंस्पेक्टिंग जज, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास विभाग एवं जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है.

भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

इधर सरायकेला जिला बार एसोसिएशन और नगर पंचायत के उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने इस स्थिति के लिए भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने जिला उपायुक्त से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. श्री चौधरी ने विभाग पर गलत डीपीआर बनाकर काम करने और धीमी गति से काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि कोर्ट परिसर में जलजमाव की समस्या को देखते हुए परिसर को ऊंचा किया जाना है, लेकिन भवन निर्माण विभाग द्वारा प्राक्कलन में परिसर को ऊंचा करने से संबंधित किसी प्रकार की योजना नहीं है. इस अनुपयोगी प्राक्कलन (DPR) व भवन विभाग के अभियंताओं की लापरवाही से सरायकेला सिविल कोर्ट जैसा महत्वपूर्ण संस्थान का तालाब में तब्दील होना बेहद शर्मनाक है. उन्होंने उपायुक्त से भवन विभाग के संबंधित लापरवाह अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की है. बता दें कि लगातार हो रही बारिश की वजह से नदियों का भी जलस्तर बढ़ रहा है. इससे रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है. दूसरी ओर कोर्ट का टापू में तब्दील होना वास्तव में चिंता का विषय बन गया है.

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