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राज्य के उद्योगों को बिजली कटौती से भारी नुकसान, हजारों उद्योग प्रभावित

Ranchi: राज्य में बिजली संकट थमने का नाम नहीं ले रही है. राज्य के उद्योगों और आमजन को भारी पऱेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उद्योगों की स्थिति भी बदतर हो चली है. जहां डीवीसी कमांड एरिया में साल भर उद्यमी बिजली समस्या से परेशान रहते है. वहीं, अब अन्य जिलों में भी बिजली संकट गहराता जा रहा है. रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे औद्योगिक शहरों में छह से दस घंटे तक की बिजली कटौती हो रही है. औद्योगिक संगठनों की मानें तो हजारों उद्योग इस संकट से परेशान है. उद्योगों में प्रोडक्शन में कमी के कारण नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा है. कुछ उद्योगों में जेनरेटर का इस्तेमाल बढ़ने से उत्पादन लागत दो से तीन गुणी बढ़ गयी है.

 

तुपूदाना, नामकुम, इरबा इलाके के उद्योगों की बात करें तो उत्पादन लागत जेनरेटर के इस्तेमाल से बढ़ा है. इसके साथ ही उद्योगों को मिलने वाले डिमांड या ऑर्डर में काफी अंतर आ गया है. बिजली की कमी के कारण लोग ऑर्डर पूरा नहीं कर पा रहे. नतीजा ये है कि लोग अब झारखंड के बजाय दूसरे राज्यों से उत्पाद खरीद रहे हैं. सिर्फ रांची में ही कोकर, नामकुम, तुपुदाना, नगड़ी, ओरमांझी सहित अन्य जगहों के 2,000 से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों में काम जारी रखना अब मुश्किल हो रहा है.

 

राज्य के उद्योगों की निर्भरता बिजली पर अधिक है. यहां आयरन स्पंज, आयरन ऑर, स्टील फर्नेंस, टेक्सटाइल समेत अन्य उद्योग स्थापित है. जो पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है. लेकिन पिछले दो महीने से जारी बिजली संकट के दौरान अब उद्योगों को चलना मुश्किल हो गया है. वहीं कामगारों के सामने भी रोजगार की समस्या आने लगी है.

 

कुछ उद्योग संचालकों से बात करने से जानकारी हुई कि बार बार की बिजली कटौती से तकनीकी समस्या अधिक है. एक उद्योग में अचानक बिजली कट जाने से, दुबारा मशीन शुरू करने में पैंतालीस मिनट से एक घंटे का समय लगता है. ऐसे में कंपिनयों को नुकसान हो रहा है. वहीं प्लास्टिक जैसे उद्योग में बार बार ऐसा होने से कच्चा माल भी खराब हो जाता है.

 

500 मेगावाट बिजली की कमी: राज्य में फिलहाल पांच सौ मेगावाट तक बिजली की कमी है. ये कमी सेंट्रल पुल से की जा रही है. केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जब तक राज्य सरकार बकाया भुगतान नहीं करती है, तब तक सामान्य बिजली नहीं मिलेगी. वहीं, जेबीवीएनएल को पिछले कुछ समय से राजस्व वसूली में नुकसान हो रहा है. जिसके कारण ये स्थिति हुई है. डीवीसी की ओर से भी दस फीसदी बिजली कटौती की जा रही है.

 

राजधानी में समस्या बनी हुई है: रांची के अलग अलग इलाकों में छह घंटे तक की बिजली कटौती की जा रही है. जबकि कुछ इलाकों में आधे घंटे से लेकर दो घंटे तक की कटौती की जा रही है. राजधानी रांची में प्रतिदिन लगभग 300 मेगावाट तक बिजली की जरूरत होती है. पिछले कुछ समय से राजधानी में 260 मेगावाट तक बिजली मिल रही है. जिससे राजधानी में ये समस्या हेा रही है. बिजली में कटौती सेंट्रल पुल से किया जा रहा है. पीक ऑवर में सुबह 6 बजे से 10 बजे और शाम को 6 बजे से रात 11 बजे तक लोड शेडिंग की जा रही है.

 

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