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#MedicalWaste पर स्वास्थ्य सचिव ने बैठायी जांच, बोकारो के निजी अस्पताल, बीजीएच और डायग्नोस्टिक सेंटर जद में

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Kumar Gaurav

Ranchi/Bokaro: राज्य के स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने बोकारो जिला प्रशासन से बोकारो स्टील टाउनशिप में बायो-मेडिकल वेस्ट को समान्य रूप से कूड़े में फेंकने वाले संस्थानों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है.

आम कचरे के डिब्बे या रोड किनारे बायो-मेडिकल वेस्ट का फेका जाना वाकई में चिन्ताजनक है. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को इस मामले में सख्ती से निपटने के लिए कहा है.

पिछले एक महीने से बोकारो स्टील टाउनशिप में कचरा संग्रहण नहीं होने के कारण यह मामला सामने आया है. हजारों टन घरेलू कचरा सड़क के किनारे बिखरा हुआ है, जिसमें कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट भी फेंका हुआ पाया गया है.

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यह मामला काफी गंभीर है. रेसिडेंशियल इलाके में इस तरह का मेडिकल वेस्ट पाया जाना लोगों के स्वास्थ्य लिए बेहद खतरनाक है.

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निरीक्षण में सामने आये चौंकाने वाले तथ्य

जिला स्वास्थ्य विभाग और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की अलग-अलग टीमों द्वारा रविवार को बोकारो स्टील टाउनशिप में निरीक्षण के दौरान बायो-मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल से संबंधित चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं.

प्रदूषण विभाग के अधिकारियों द्वारा शहर में कचरे के डंपों में यूज्ड सिरिंज, सैलाइन और खाली दवा की बोतलें फेंकी पायी गयी हैं.

नया मोड़ से सटे कचरा पट्टी में प्रदूषण विभाग की टीम ने फेकी हुई सिरिंज और अन्य मेडिकल वेस्ट को देखकर अधिकारी चिंतित हो गये. प्रदूषण विभाग के रीजनल डायरेक्टर डीपी सिंह ने कहा वे लोग इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे.

दोनों विभागों के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान सेक्टर -4 में एक कबाड़ीवाले के गोदाम में बायो-मेडिकल वेस्ट का विशाल भंडार पाया.  गोदाम बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) के पास स्थित है.

15 रुपये किलो खरीदता है गोदाम मालिक

#MedicalWaste पर स्वास्थ्य सचिव ने बैठायी जांच, बोकारो के निजी अस्पताल, बीजीएच और डायग्नोस्टिक सेंटर जद में
शख्स के हाथ में यूज्ड सिरिंज.

गोदाम के मालिक ने टीम के सदस्यों को बताया कि वह यह मेडिकल वेस्ट कूड़ा चुनने वालों से और बोकारो जनरल हॉस्पिटल के कुछ  कर्मचारियों से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदता है.  कूड़ा चुनने वाले इन मेडिकल वेस्ट को जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेर से उठाते हैं.

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुछ डॉक्यूमेंट भी बरामद किये हैं, जिससे पता चलता है कि शनिवार को बीजीएच से गोदाम मालिक द्वारा मेडिकल कचरे का एक बड़ा स्टॉक खरीदा गया है.

वह इन खरीदी गयी मेडिकल वेस्ट, जैसे इस्तेमाल की गयी सिरिंज और खाली सैलाइन और दवा की बोतलों को आगे एक व्यक्ति को 20 रुपये किलो में बेचता है.

जिला स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, “इस तरह से बायो मेडिकल वेस्ट का व्यापार क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानदंडों का सरासर उल्लंघन है. इसमे बीजीएच और टाउनशिप में संचालित अन्य निजी अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि अंडर स्कैनर है. हम लोग हर एंगल से इस मामले की जांच कर रहे हैं और रिपोर्ट सौंपेंगे.”

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कहीं रीपैकेजिंग कर दोबारा बेचा तो नहीं जा रहा?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि इन बायो मेडिकल वेस्ट की खरीद-फरोख्त के पीछे इसका रीपैकेजिंग कर वापस बाजार में बेचा जाना भी हो सकता है.

इसमें विस्तृत जांच की जरूरत है नहीं तो क्यों कोई भी खरीदार मेडिकल वेस्ट को खरीदेगा, जबकि इसके डिस्पोज करने के लिए रामगढ़ की एजेंसी को प्रदूषण विभाग  ने प्रमाणित किया है.

बोकारो के जितने भी नर्सिंग होम, प्राइवेट हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक सेंटर्स हैं उनको अपने यहां से निकले हुए मेडिकल वेस्ट को इसी एजेंसी को देना है, जो ले जाकर उसको डिस्पोज करती है.

इसके बदले वह स्वास्थ संस्थानों को सर्टिफिकेट देती है जिसको दिखाकर ही इन संस्थानों को संचालन के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट का एनओसी स्वास्थ विभाग देता है।

बोकारो डीसी मुकेश कुमार ने भी इस सिलसिले में जांच शुरू की है. उन्होंने कहा- “मुझे लगता है कि यह एक गंभीर मुद्दा है. बायो मेडिकल वेस्ट का इस तरह से फेंकने को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.”

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