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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- समय से लॉकडाउन हुआ, नहीं तो आज 20 लाख लोग होते कोरोना से संक्रमित, जा सकती थी 37000-78000 लोगों की जान

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New Delhi: भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में सही समय पर लॉकडाउन किया गया, नहीं तो आज देश में 20 लाख कोरोना पॉजिटिव होते.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पिछले चार दिन से हर रोज एक लाख से अधिक सैंपल की जांच की जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार दोपहर एक बजे तक कोविड-19 की 27,55,714 जांच की जा चुकी है. एक दिन में 1,03,829 नमूनों की जांच हुई.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना वायरस से मरनेवालों का प्रतिशत 3.13 से घट कर 3.02 प्रतिशत हो गया है. मंत्रालय के अनुसार 24 घंटे में कोविड-19 के 3,234 मरीज ठीक हुए और अब तक 48,534 मरीज अभी तक ठीक हो चुके हैं. यह कुल मामलों का 41 प्रतिशत है.

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कुछ राज्यों में केंद्रित हो चुका है

कोरोना वायरस के फैलने को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 21 मई तक कोरोना वायरस का संक्रमण कुछ राज्यों और शहरों / जिलों में केंद्रित हो चुका है. डॉ वीके पॉल ने बताया कि पांच राज्यों में लगभग 80% केस और पांच शहरों में 60% से अधिक, 10 राज्यों में 90% से अधिक और 10 शहरों में 70% से अधिक मामले कोविड-19 के आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण COVID-19 मौतों की संख्या की वृद्धि दर में भी काफी गिरावट आयी है.

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देखी जा रही गिरावट

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कोरोना संक्रमण के मामलों की वृद्धि दर में 3 अप्रैल, 2020 से लगातार गिरावट देखी गयी है. उन्होंने कहा कि समय से अगर लॉकडाउन न लगाया गया होता तो आज 14 से 29 लाख के बीच कोरोना मरीज होते. डॉ पॉल के मुताबिक लॉकडाउन के कारण आज हजारों जिंदगियों को बचा जा सका है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार की योजना आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 1 करोड़ लोग इलाज करा चुके हैं. ये बहुत बड़ी उपलब्धि है.

डॉ वीके पॉल ने कहा, कई अनुमान मॉडलों से ये बात भी सामने आ रही है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से भारत में अब तक 37,000-78,000 मौतें हो सकती थीं. इसके संक्रमण के 14-29 लाख मामले हो सकते थे. उन्होंने कहा कि लाखों मामले नहीं फैले क्योंकि हमने फैसला किया कि हम घर की लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करेंगे.

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