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बन्ना गुप्ता ने भ्रष्टाचार किया, साक्ष्य से छेड़छाड़ और महापुरुष का अपमान किया, सीएम जांच करायें, रिपोर्ट आने तक मंत्री को बर्खास्त करें : सरयू

सरयू ने दागे दर्जन भर सवाल  : क्या मंत्री अपने कोषांग के कर्मी हैं, क्या स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं कोविड राशि लेने का ऑर्डर दिया, यानी बायें हाथ ने दाहिने हाथ को बन्नाबांट करने का आदेश दे दिया

Jamshedpur :  मंत्री बन्ना गुप्ता पर अवैध तरीके से कोरोना प्रोत्साहन राशि उठाने का आरोप लगानेवाले विधायक सरयू राय ने शुक्रवार को एक बार फिर मंत्री के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी. जमशेदपुर के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को मंत्री बन्ना और सरयू राय आमने-सामने हुए. बन्ना ने सरयू के पैर छुए. दोनों अगल-बगल बैठे भी, लेकिन होंठ सिलकर. कार्यक्रम से निकल कर सरयू राय ने 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के मौके पर स्वास्थ्य विभाग का दफ्तर खुलवाने और विभाग की ओर से आधिकारिक वक्तव्य जारी किये जाने को महापुरुष का अपमान बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप मढ़ डाला. सरयू ने कोविड प्रोत्साहन राशि बांटे जाने को “बन्नाबांट” की उपमा देते हुए इसे बंदरबांट की तरह का संगीन मामला करार दिया है. सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्ट आचरण करने तथा लगातार चार दिन के सरकारी अवकाश में ऑफिस खोलकर संबंधित संचिका में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे घपले-घोटाले वाली स्वास्थ्य विभाग की फाइल को मंगा कर जांच करें और जांच पूरी होने तक स्वास्थ्य मंत्री को पदमुक्त करें. आइये जानते हैं सरयू राय ने क्या आरोप लगाये हैं –

छुट्टी के दिन सरकारी दफ्तर खोलवाना

“कल 14 अप्रैल को बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती, बैशाखी, महावीर जयंती की सार्वजनिक छुट्टी थी. छोटे-बड़े सभी सरकारी ऑफिस बंद थे. पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री का कार्यालय खुला था. शाम को विभाग की ओर से एक आधिकारिक वक्तव्य प्रसारित हुआ कि “स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता एवं अन्य ने जो कोविड प्रोत्साहन राशि लिया है वह सक्षम प्राधिकार के आदेश से लिया है और 1.5.2021 के संकल्प के आधार पर लिया है. मैं स्वास्थ्य विभाग के इस वक्तव्य को चुनौती देता हूं और छुट्टी के दिन स्वास्थ्य विभाग का ऑफिस खोलकर कोविड प्रोत्साहन राशि के भुगतान से संबंधित संचिका को उलटने-पलटने की निंदा करता हूं. स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस बारे में की गयी वित्तीय अनियमितता उजागर होने से स्वास्थ्य मंत्री विचलित हो गये हैं. उन्हें यह ख़्याल नहीं है कि आपात् स्थिति के अलावा ऐसे छुट्टी के दिन सरकारी ऑफिस खोलना महापुरुषों का अपमान है और नाजायज है.”

मंत्री भयभीत, संचिका में हेराफेरी करने का प्रयास किया

“अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती, बैशाखी की छुट्टी के दिन ऑफिस खोलकर ये कौन आवश्यक कार्य कर रहे थे. मुझे आशंका है कि कल छुट्टी के दिन अपना ऑफिस खोलकर स्वास्थ्य मंत्री ने संचिका में हेराफेरी करने और सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया है. वे भयभीत हैं कि छुट्टी समाप्त होते ही मुख्यमंत्री या वित्त मंत्री जांच करने का आदेश देकर संबंधित संचिका जब्त कर सकते हैं और जांच के लिये संचिका अपने पास मंगा सकते हैं.”

सरयू ने दागे दर्जन भर सवाल  : क्या मंत्री अपने कोषांग के कर्मी हैं

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  1. स्वास्थ्य विभाग ने कल आधिकारिक वक्तव्य में कहा है कि मंत्री ने सक्षम प्राधिकार के आदेश से कोविड प्रोत्साहन राशि की “बन्नाबांट” की है जो बंदरबांट की तरह का ही संगीन अपराध है.
  2. राज्य की जनता को यह जानने का हक है कि स्वास्थ्य विभाग में सर्वोच्च सक्षम प्राधिकार कौन है.
  3. क्या विभाग में मंत्री के ऊपर भी कोई सक्षम प्राधिकार होता है जो उनके बारे में निर्णय लेता है.
  4.  क्या विभाग ने संबंधित विषय में इस बारे में मुख्यमंत्री या राज्यपाल का आदेश प्राप्त किया, जो सरकार में मंत्री के ऊपर सक्षम प्राधिकार हैं.
  5. क्या स्वास्थ्य विभाग के मंत्री ने स्वयं कोविड राशि लेने का आदेश दिया है, यानी बायें हाथ ने दाहिने हाथ को बन्नाबांट करने का आदेश दे दिया है और खुद अपने और अपने मातहतों के लिए रेवड़ियां बांटने का आदेश खुद ही दे दिया है.
  6.  क्या विभाग द्वारा इस मामले में जो 3 सदस्यीय समिति बनी है, उसने मंत्री और मंत्री कोषांग के कर्मियों का चयन प्रोत्साहन राशि लेने के लिए किया है.
  7.  विभागीय संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने किस सक्षम प्राधिकार के आदेश से मंत्री के कोषांग में कार्यरत कर्मियों की सूची प्रोत्साहन राशि हेतु मांगी है.
  8.  विभागीय संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने जिस पत्र के माध्यम से मंत्री कोषांग के कर्मियों का नाम प्रोत्साहन राशि के लिए मांगी है, उसमें उन्होंने मंत्री का नाम उन्होंने नहीं मांगा है. पर मंत्री ने अपना नाम भी सूची में जोड़कर भेज दिया है. प्रश्न उठता है कि क्या मंत्री अपने कोषांग के कर्मी हैं.
  9. क्या अपना और अपने कोषांग के कर्मियों का नाम कोविड प्रोत्साहन राशि लेने वाली सूची में डालते समय मंत्री जी को पता नहीं था कि 1.5.2021 के संकल्प में ऐसे लोगों को प्रोत्साहन राशि नहीं दी जानी है.
  10.  क्या मंत्री जी ने यह जानने की कोशिश की कि जो कर्मी उनके कोषांग में कार्यरत हैं, उसमें से कौन कितने समय से कार्यरत है और कौन ऐसा है जो कोविड के समय वहां पदस्थापित नहीं थे.
  11. क्या नियमानुकूल नहीं होने के बावजूद थोक के भाव से सभी कर्मियों के नाम पर प्रोत्साहन राशि दे देना वित्तीय अनियमितता नहीं है.
  12. क्या यह 1 मई 2021 के एतद्संबंधी संकल्प के भावना की अवहेलना नहीं है.
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मुख्यमंत्री से की मांग

उपर्युक्त आरोप लगाते हुए सरयू राय ने कहा है कि स्पष्ट है कि स्वास्थ्य मंत्री ने वित्तीय अनियमितता की है, भ्रष्ट आचरण किया है. लगातार चार दिन के सरकारी अवकाश में ऑफिस खोलकर संबंधित संचिका में छेड़छाड़ किया है. उन्होंने  मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे घपले-घोटाले वाली स्वास्थ्य विभाग की यह संचिका शीघ्र अपने पास मंगायें, तथ्य देखें, जांच करें और कार्रवाई करें. उन्होंने यह भी मांग की है कि मुख्यमंत्री यह सुनिश्चित करायें कि सोमवार के पहले (अवकाश की अवधि में) स्वास्थ्य विभाग का ऑफिस किसी के भी द्वारा नहीं खोला जायेगा. सरयू राय ने मुख्यमंत्री से जांच पूरी होने तक स्वास्थ्य मंत्री को पद मुक्त करें.

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