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बंधु तिर्की की जमानत पर फैसले को HC ने रखा सुरक्षित, पत्‍थलगड़ी के समर्थन में दिया था बयान

Ranchi: राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के द्वारा पत्‍थलगड़ी के समर्थन में दिये गये बयान के मामले में बंधु तिर्की की जमानत पर फैसले को हाइकोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है.

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अदालत ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया. गौरतलब है कि बंधु तिर्की पर पत्थलगड़ी के समर्थन में बयान देने का आरोप है. इस मामले में पूर्व मंत्री बंधु ने हाइकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है.

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राष्‍ट्रीय खेल घोटाला मामले में भी फैसला सुरक्षित

राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में आरोपित पूर्व मंत्री बंधु तिर्की की जमानत पर बुधवार को जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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सुनवाई के दौरान वादी ने जमानत देने की गुहार लगायी थी. लेकिन सरकार ने इसका विरोध किया. उल्लेखनीय है कि कोर्ट की तरफ से बंधु तिर्की को नामांकन करने की अनुमति मिल गयी है. 16 नवंबर को बंधु तिर्की नामांकन दाखिल करेंगे.

पत्थलगड़ी के समर्थन में बयान देने वाले मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई. दरअसल, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर दो मामले चल रहे हैं. इन दोनों मामले में निचली अदालत ने उनकी जमानत को खारिज कर दिया है. इसके बाद उन्होंने जमानत के लिए हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

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चार सितंबर से जेल में बंद हैं बंधु तिर्की

झाविमो नेता और मांडर के पूर्व विधायक बंधु तिर्की को एसीबी ने चार सितंबर 2019 को गिरफ्तार कर लिया था. बंधु तिर्की की गिरफ्तारी 34 वें राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में हुई थी.

एसीबी ने बंधु तिर्की को रांची सिविल कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया था. गौरतलब है कि 24 अगस्त 2019 को 34 वें राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में, तत्कालीन खेल मंत्री बंधु तिर्की और राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद समेत पांच आरोपियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति एसीबी को मिली थी.

क्या है मामला

झारखंड में वर्ष 2007 में राष्ट्रीय खेल का आयोजन किया जाना था. मगर तैयारी पूरी नहीं होने की वजह से 34वें राष्ट्रीय खेल का आयोजन साल 2011 में किया गया.

इसके बाद खेल सामग्री की खरीद, ठेका देने में अनियमितता और निर्माण में गड़बड़ी के कई मामले सामने आये थे. जिसमें आकलन के मुताबिक, 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान सरकार को हुआ था.

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