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जनवरी में ही HC ने खारिज की कुमार नीरज की बेल पिटीशन, अबतक नहीं हुए गिरफ्तार

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  • 10 करोड़ 64 लाख के घोटाले के बाद भी पद पर बने हैं कुमार नीरज
  • साल 2015-16 और 2016-17 में किया गया शौचालय निर्माण में घोटाला
  • वर्तमान में पेयजल एवं स्वच्छता नागरिक अंचल के हैं तकनीकी सलाहकार

Chhaya

Ranchi: स्वच्छ भारत मिशन के तहत गिरिडीह जिला में साल 2015-16 और 2016-17 में आवंटित राशि के घोटाले के आरोपी कुमार नीरज को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है. जबकि 29 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट की ओर से कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है. इससे पहले तत्कालीन गिरिडीह डीसी ने आवंटित राशि में हुए घोटाला पर एफआइआर की गई थी. जिसके बाद मामला गिरिडीह व्यवहार न्यायालस पहुंचा. यहां भी कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था. और 20 दिसंबर 2016 को विभाग ने कुमार नीरज को निंलबित कर दिया.

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एक ओर जहां मामले को लेकर कुमार नीरज की बेल पिटीशन को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. वहीं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 23 जुलाई 2018 को कुमार नीरज का निलंबन समाप्त कर उसे पेयजल एवं स्वच्छता नागरिक अंचल का तकनीकी सलाहकार बना दिया.

अधिकारियों की है मिली भगत

सूत्रों से जानकारी मिली है कि कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी रहने पर अब विभाग कुमार नीरज को बचाने का प्रयास कर रही है. सूत्रों की मानें तो स्वचछ भारत मिशन के पूर्व निदेशक अमित कुमार ने इस संबध में कार्यपालक अभियंता अनुप कुमार महतो को पत्र लिखा था. जिसमें यह बात कहीं गई थी कि पुलिस कोर्ट को जानकारी दे कि विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में गिरफ्तारी वारंट वापस ले लिया जाएं. लेकिन कार्यपालक अभियंता अनुप कुमार ने संबंधित फाइल गिरिडीह डीसी को सौंप दी. मामले की जानकारी मिलते तत्कालीन गिरिडीह डीसी ने भी इस कुमार नीरज से राशि समायोजन से संबधित सारी जानकारी मांगी है. इसके बावजूद कुमार नीरज पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.

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क्या कहा अनुप कुमार ने

इस संबध में जब अनुप कुमार महतो से बात की गई तो उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक की ओर से पत्र आया था. जिसमें कहा गया कि एफआइआर पर जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएं. साथ ही कोर्ट को बताया जाएं मामला विभाग में है. और मामले का जल्द से जल्द निष्पादन किया जाएं.

क्या है मामला

कुमार नीरज साल 2015-16 और 2016-17 में गिरिडीह के कार्यपालक अभियंता थे. इस दौरान उन्हें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालयों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में कराना था. लेकिन सिर्फ साल 2016-17 में उन्होंने 10 करेाड़ 64 लाख 49 हजार 875 राशि में हेरफेर की. इस राशि से 8500 शौचालयों का निर्माण कराना था. लेकिन तत्कालीन डीसी ने जब अभियंता से इस संबध में राशि समायोजन का ब्यौरा मांगा तो कुमार नीरज नहीं दिखा सकें. साल 2015-16 में भी कुमार नीरज ने एक ही शौचालय के तीन-तीन फोटो अपलोड कर राशि का गबन किया.

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इस साल यहां करिहारी और धर्मपुर पंचायत में गड़बड़ी की गई. वहीं डीसी की गठित कमेटी में न ही कहीं शौचालय पाया गया और कई ग्रामीणों के नाम ऐसे पाएं गए जो उस गांव के थे ही नहीं या तो लाभुकों का शौचालय बना नहीं.

हाईकोर्ट और डीसी की रिपोर्ट ने माना आरोपी

इस संबंध में जब कुमार नीरज ने हाईकोर्ट में अपील की, तब कोर्ट ने भी यह कहते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण में गड़बड़ी हुई है. यहां भी कुमार नीरज राशि का समायोजन नहीं दिखा सकें. वहीं साल 2017-18 में डीसी की गठित जांच दल ने भी कुमार नीरज को आरोपी पाया था. जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही कुमार नीरज पर एफआइआर की गयी थी.

अधिकारियों ने नहीं दिया जवाब

इस संबंध में जब स्वच्छ भारत मिशन के पूर्व निदेशक अमित कुमार से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कौन है कुमार नीरज. विभाग से जानकारी ले लें. अब मैं इस पद पर नहीं हूं. वहीं वर्तमान गिरिडीह डीसी राजेश कुमार पाठक ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है. अभी-अभी पदभार लिया है. फाइल देखकर बताना होगा. वहीं गिरिडीह एसपी सुरेंद्र झा ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है. मामला पुराना लगता है.

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