Ranchi

NTPC के DGM के साथ मारपीट के मामले में IAS सुनील कुमार को HC का नोटिस, सरकार से भी मांगा जवाब

Ranchi: NTPC के डीजीएम राकेश नंदन सहाय ने हजारीबाग के पूर्व डीसी और मौजूदा भवन निर्माण सचिव सुनील कुमार पर अपने आवासीय कार्यालय में मारपीट करने का आरोप लगाते हुए 10 फरवरी को 2015 को एक प्राथमिकी दर्ज करायी थी. उसकी सुनवाई अब झारखंड हाईकोर्ट में चल रही है.

मंगलवार को जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद राकेश नंदन सहाय के वकील महेश कुमार सहाय ने न्यूज विंग से बात करते हुए बताया कि कोर्ट में हमारी तरफ से कहा गया कि मामले को लेकर तत्कालीन गृह सचिव एनएन पांडे की तरफ से एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी गयी थी.

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वहीं एनएचआरसी की भी तरफ से एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी गयी है. लेकिन सरकार की तरफ से इसे लेकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. साथ ही वादी की तरफ से मांग की गयी कि मामले की फिर से जांच एक रिटायर्ड या मौजूदा जज की तरफ से करायी जाए.

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मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने आइएएस सुनील को नोटिस कर उनसे उनका पक्ष मांगा है. साथ ही सरकार से भी जवाब मांगा गया है कि आखिर दोनों रिपोर्ट के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई सरकार की तरफ से की गयी है. अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होगी.

तत्कालीन डीसी सुनील कुमार पर दुर्व्यवहार करने का है आरोप

2015 में हजारीबाग डीसी सुनील कुमार पर एनटीपीसी के डीजीएम रैंक के अधिकारी राकेश नंदन सहाय ने गंभीर आरोप लगाये थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि डीसी सुनील कुमार ने उन्हें कमरे में बंद कर रॉड से पीटा है. मामला कोर्ट में है.

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राकेश नंदन सहाय ने मानवाधिकार में भी शिकायत की थी. इसमें यह कहा गया था कि पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट (190 /2015) में कहा गया था कि हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त पर दुर्व्यहार करने की जो शिकायतें आयी थीं, वह प्रमाणिक नहीं थीं. इसलिए उपायुक्त का नाम मामले से हटा दिया गया था.

हजारीबाग के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां दर्ज याचिका में भी उपायुक्त के खिलाफ लगे आरोप के बाबत प्राइमा फेसी के दौरान पुख्ता प्रमाण नहीं मिले थे. एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि राज्य के अपर मुख्य सचिव एनएन पांडेय ने भी गृह सचिव की हैसियत से मामले की जांच की थी.

उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट के पारा-9 में लिखा था कि उपायुक्त स्तर के अधिकारी को व्यावहारिक होना चाहिए. उन्हें जनता की शिकायतों को तवज्जो देते हुए उनका निराकरण करना चाहिए. इससे लोगों के मन में उपायुक्त और स्थानीय प्रशासन के प्रति भरोसा होगा.

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