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JSSC संशोधित नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर HC में सुनवाई टली

Ranchi : जेएसएससी संशोधित नियामवली के खिलाफ दायर याचिका में सुनवाई टाल दी गयी है. मामले में गुरुवार को सुनवाई होनी थी. झारखंड हाईकोर्ट में सिर्फ महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई हो रही है. ऐसे में जेएसएससी संशोधित नियमावली में सुनवाई टाली गयी. अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने बताया कि मामले की अगली तारीख फिलहाल तय नहीं है. कोर्ट सामान्य होने पर मामले की अगली तारीख तय की जायेगी.

कोर्ट ने जतायी थी नाराजगी

इसके पहले मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की ओर से किये गये नियमावली संशोधन को असंवैधानिक बताया था. कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा था कि किन मामलों में संशोधन किया गया है. ऐसा निर्णय लिया गया है तो इससे संबधित संचिका कोर्ट में पेश की जायें. महाधिवक्ता से पूछा गया कि संबधित नियमों के तहत सरकार आरक्षण की धारणा के साथ कार्य कर रही है. हिंदी और अंग्रेजी को पेपर टू से हटा कर बंगाली, उर्दू को शामिल करने का क्या औचित्य है.

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क्या है दायर याचिका में

दायर याचिका में संशोधित नियमावली को चुनौति दी गयी है. याचिका में कहा गया है कि नयी नियमावली में राज्य के संस्थानों से ही दसवीं और प्लस टू की परीक्षा पास करने को अनिवार्य किया गया है. जो संविधान की मूल भावना और समानता के अधिकार का उल्लंघन है. वैसे उम्मीदवार जो राज्य के निवासी होते हुए भी राज्य के बाहर से पढ़ाई किए हों, उन्हें नियुक्ति परीक्षा से नहीं रोका जा सकता. नयी नियमावली में संशोधन कर क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं की श्रेणी से हिंदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया है.

जबकि उर्दू, बांग्ला और उड़िया को रखा गया है. उर्दू को जनजातीय भाषा की श्रेणी में रखा जाना राजनीतिक फायदे के लिए है. राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का माध्यम भी हिंदी हैं. उर्दू की पढ़ाई एक खास वर्ग के लोग करते हैं. ऐसे में किसी खास वर्ग को सरकारी नौकरी में अधिक अवसर देना और हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के अवसर में कटौती करना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है. इसलिए नई नियमावली में निहित दोनों प्रावधानों को निरस्त किए जाने की मांग की गई है.

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