न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

हजारीबागः छह विधानसभा सीट में आधे पर था विपक्ष का कब्जा, लेकिन अब दिख रहा पूरी तरह से सफाया! 

2,714

Akshay Kumar Jha

Ranchi:  जैसे सागर में छोटी नदियां आकर मिलती हों. ठीक उसी तरह विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी में नेताओं का जुड़ने का दौर फिलवक्त जारी है. जाहिर तौर पर जुड़ने का सिलसिला टिकट को लेकर जारी है.

हजारीबाग जिले की बात करें तो इस जिले में भी यही हो रहा है. यहां फिलहाल बीजेपी और विपक्ष का आंकड़ों में पलड़ा बराबर है. लेकिन आने वाले दिनों में बीजेपी भारी होती दिखायी दे रही है.

हजारीबाग में बरही, रामगढ़, हजारीबाग, बरकागांव, मांडू और बरकट्ठा विधानसभा शामिल हैं. इनमें से बरही, बड़कागांव और मांडू तीनों विपक्ष के पास थे और बाकी तीन बीजेपी के पास. लेकिन आने वाले दिनों में सभी सीटों से विपक्ष का सूपड़ा-साफ होते दिखायी दे रहा है.

इसे भी पढ़ेंःरिलायंस इंडस्ट्रीज की मीडिया में नहीं आती खबर, घाटे में चल रही कंपनी, जियो से बढ़ा कर्ज

बीजेपी में शामिल होने वाली खबर का नहीं करते मनोज यादव खंडन

हाल ही में हजारीबाग के कुछ अखबारों में मनोज यादव जो कांग्रेस से बरही विधायक हैं, उनके बीजेपी में शामिल होने को लेकर खबर छपी थी. करीब एक हफ्ता होने को है, लेकिन इस बात का खंडन मनोज यादव की तरफ से अभी तक नहीं किया गया है.

इसके पीछे कारण और कुछ नहीं बल्कि यशवंत सिन्हा के घराने से उनकी नजदीकी बतायी जाती है. इससे पहले उनके अजीज हरीश श्रीवास्तव जो आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता और सीनियर लीडर थे, वो भी बीजेपी का हाथ थाम चुके हैं.

ऐसी बातें भी होने लगी है कि खुद विधायक बीजेपी का विरोध किसी मोर्चे पर करते नहीं और सीनियर होने के नाते उनके नीचे के लोग विरोध कर पाते नहीं. कहा जा रहा है कि अगर मनोज यादव बीजेपी में शामिल हो जाएं, तो बात कोई चौंकाने वाली नहीं होगी, बस अटकलों पर मुहर होगी.

हजारीबाग में पहले से है गड़ा है बीजेपी का झंडा

हजारीबाग से बीजेपी के विधायक मनीष जायसवाल अब काफी मजबूत दिख रहे हैं. दरअसल उन्हें जिस निर्दलीय उम्मीदवार प्रदीप प्रसाद ने पिछले चुनाव में चुनौती दी थी. वो खुद बीजेपी में शामिल हो गए हैं. इसके पीछे भी मनीष जायसवाल ही बताए जा रहे हैं.

कहा जा रहा है कि प्रदीप प्रसाद बगोदर से टिकट लेना चाह रहे हैं. प्रदीप प्रसाद का हजारीबाग से हटते ही मनीष जायसवाल का डर भी बगोदर शिफ्ट कर जायेगा.

रही कांग्रेस की बात तो सौरव नारायण सिंह उस पोजिशन में नहीं दिख रहे कि वो बीजेपी को वहां पटखनी दे सके. सिंह परिवार की विरासत की राजनीति काफी हद तक दम तोड़ चुकी है. फिर से उठ खड़े होने में काफी वक्त लगेगा.

इसे भी पढ़ेंःराहुल ने स्वीकारा कश्मीर आने का गवर्नर का न्योता, कहा- प्लेन की जरुरत नहीं, बस लोगों से मिलने की दें छूट

बड़कागांव में कांग्रेस या बीजेपी नहीं, एक परिवार मैटर करता है

हजारीबाग के तीसरे विधानसभा बड़कागांव की बात करें तो, फिलहाल यहां विधायक कांग्रेस की निर्मला देवी हैं. लेकिन अगली बार यहां कांग्रेस का विधायक होगा या बीजेपी का यह देखने वाली बात होगी.

ऐसी खबरें आ रही हैं कि योगेंद्र साव भी बीजेपी का हाथ थाम सकते हैं और उनकी बेटी अंबा प्रसाद इस विधानसभा से उम्मीदवार हो सकती हैं. अगर ऐसा हुआ तो साव परिवार से विधायक तो हो जाएगा सिर्फ पार्टी बदल जाएगी.

मांडू से विधायक जी दिखा चुके हैं बगावती तेवर

जिस तरह से मांडू विधायक जयप्रकाश पटेल ने बगावती तेवर लोकसभा चुनाव में दिखाये है, वो काफी चौंकाने वाला रहा है. खुले तौर पर वो बीजेपी के प्रचार अभियान में शामिल हुए. मौका मिला तो जेएमएम के दो बात कहने से भी नहीं चूके.

हालांकि अभी तक औपचारिक रूप से उन्होंने बीजेपी का हाथ नहीं थामा है. लेकिन यह तय है कि वो बीजेपी से ही अगला चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में हजाराबीग की चौथी विधानसभा सीट मांडू भी विपक्ष के हाथों से सरकती नजर आ रही है.

रामगढ़ से सुदेश या सांसद सीपी चौधरी का कोई रिश्तेदार तय नहीं

रामगढ़ विधानसभा सीट आने वाले चुनाव में काफी चौंकाने वाली है. रामगढ़ के विधायक सीपी चौधरी अब लोसकभा सदस्य हो चुके हैं. क्षेत्र में उनका काफी दबदबा है. उन्हें हमेशा रामगढ़ विधानसभा सीट पर विनिंग कैंडिडेट माना जाता रहा है.

लेकिन इस चुनाव में क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी. कहा जा रहा है कि इस सीट से आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो खुद अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं.

वही दूसरी तरफ खबर यह भी है कि सीपी चौधरी अपने किसी परिवार के सदस्य को रामगढ़ से उतारना चाह रहे हैं. किसी भी सूरत में सीट गठबंधन के तहत बीजेपी के ही खाते में जाती दिख रही है.

बरकट्ठा सीट से विधायक ने जीतने के बाद ओढ़ लिया भगवा

2014 के विधानसभा चुनाव में बरकट्ठा सीट से जानकी यादव ने जेवीएम से बाजी मारी थी. लेकिन जीतने के बाद उन्होंने पार्टी ही बदल ली. शुद्ध रूप से अब वो भाजपायी हो चुके हैं. ऐसे में जिस पार्टी से वो जीते थे, वो भले ही अब भी विपक्षी पार्टी कहलाती है. लेकिन वो खुद सत्ताधारी हो चुके हैं.

कुल मिलाकर हजारीबाग जिला में विपक्ष का सफाया पूरी तरह से देखा जा रहा है. लेकिन राजनीति में ऊंट कब करवट बदल ले वो राजनीतिक हालातों पर निर्भर करता है.

इसे भी पढ़ेंःरांची, हटिया, धनबाद और सिंदरी के लिए BJP में अभी से लॉबिंग शुरू, कट सकता है सिटिंग MLA का टिकट!

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
झारखंड की बदहाली के जिम्मेदार कौन ? भाजपा, झामुमो या कांग्रेस ? अपने विचार लिखें —
झारखंड पांच साल से भाजपा की सरकार है. रघुवर दास मुख्यमंत्री हैं. वह हर रोज चुनावी सभा में लोगों से कह रहें हैं: झामुमो-कांग्रेस बताये, राज्य का विकास क्यों नहीं हुआ ?
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन कह रहें हैं: 19 साल में 16 साल भाजपा सत्ता में रही. फिर भी राज्य का विकास क्यों नहीं हुआ ?
लिखने के लिये क्लिक करें.

you're currently offline

%d bloggers like this: