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हजारीबाग: बांटने वाली पशु पौष्टिक दवाएं हो गयीं एक्सपायर, तो कूड़े में फेंक छुड़ायी जान

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Hazaribagh : जिले के बड़कागांव प्रखंड कार्यालय के नजदीक नदी के किनारे कूड़े के ढेर में पशुओं की पौष्टिक दवाइयां फेंकी हुई पायी गईं. जिसको देखते ही आसपास के इलाके में लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है. दरअसल झारखंड सरकार के द्वारा बड़कागांव प्रखण्ड के सभी पशु पालक लाभुक किसानों के बीच ये दवाइयां बांटनी थीं. लेकिन सभी दवाइयां अधिकारियों के लापवाही की भेंट चढ़ गईं.
जानकारी के मुताबिक, बड़कागांव प्रखंड कार्यालय परिसर के पीछे स्थित जिला बाला तालाब के किनारे लाखों रुपए की जनेवा टेबलेट जो कि गाय को गरम करने का काम आता है. रुचा मैक्स पाउडर जो गायों की पाचन का काम करता है और दुधारू गाय की दूध उत्पादन में वृद्धि करता है. वहीं कैल्शियम भी कूड़े के ढेर में फेके मिले हैं. इन दवाओं की एक्सपायरी डेट जनवरी 2019 में थी. अधिकारियों की लापरवाही की वजह से सभी दवायें एक्पायर हो गय़ी. क्योंकि जब इन दवाओं को किसानों के बीच बांटना था, तब बांटा नहीं गया. जिसका नतीजा है कि दवाएं एक्पायर हो गयीं और खुद को बचाने के लिए विभाग के लोग इसे कूड़े के ढेर में फेंक गये.

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दवा के अभाव में मर गयी गायें

सरकार द्वारा किसानों के लिए तरह-तरह की कल्याणकारी योजनायें बनायी गयी हैं. लेकिन अफसरों की मनमानी और लापरवाही की वजह से कल्याणकारी योजनाएं किसानों तक पहुंच नहीं पा रही हैं. कल्याणकारी योजना के तहत लाभुकों के बीच बांटी जाने वाली सामग्री को नदी के किनारे फेंक दिया गया.
विकास मंत्रालय झारखंड सरकार की ओर से 90% अनुदान पर सभी बीपीएलधारी पशुपालक किसानों को गायों को खिलाने के लिए पौष्टिक आहार व दवाइयां भी दी गई थीं. ताकि गायों का सेहत अच्छी रहे और दूध उत्पादन में भी वृद्धि हो सके. सभी दवाइयों और आहार को गव्य विकास हजारीबाग के पदाधिकारी द्वारा किसानों के बीच में वितरित ना करके कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया. जिसका नतीजा यह हुआ कि कई किसानों को समय पर दवाइयां नहीं मिलने या तो उनकी गाय मर गई या बीमार हो गई. जबकि कई किसानों ने तो अपनी गाय को औने-पौने दाम में बिचौलियों के पास बेचने पर मजबूर हो गए.
बड़कागांव प्रखंड के पशु पालक किसानों के बीच लगभग हजारों गायों का वितरण अब तक किया जा चुका है. गौरतलब है कि एक ओर झारखंड सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करना चाहती है. तो दूसरी ओर उनके ही सरकार के अफसरों की अनदेखी से किसान दोगुनी आय की बात तो दूर कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर हैं.

किसान बाजार से खरीद रहे दवाइयां

जानकार बताते हैं कि जेनेवा टैबलेट 40 -50 रूपये में एक पत्ता मिलता है. वहीं रुचा मैक्स 250 से 300 के बीच आता है. जबकि दुधारू गायों के लिए दवा 180 में मिलता है. इस बारे में किसानों का कहना है कि हमें बाजार से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं और इधर विभाग की लापरवाही की वजह से सभी दवाइयां एक्सपायर हो गयीं.
इधर मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने जांच के आदेश दे दिए है. हालांकि बड़कागांव में हल्ला होने पर खुद को बचाने के लिए उन सभी दवाइयों और पौष्टिक आहार को किसी दूसरे स्थान पर छिपाने की बात भी कही जा रही है.

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