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हजारीबाग DTO : शुल्क लिया वीआईपी नंबर का और दे दिया जेनरल नंबर

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Hazaribagh : नयी गाड़ी लेने के बाद हर किसी की इच्छा होती है कि उसकी गाड़ी का नंबर वीआईपी हो. लेकिन, परिवहन विभाग ने वीआईपी नंबरों के लिए नियम बदल दिये हैं. अब हर वीआईपी नंबर के लिए शुल्क तय है. साधारण सी प्रक्रिया है. शुल्क दीजिये और वीआईपी नंबर ले लीजिये. लेकिन, जब विभाग शुल्क लेने के बाद भी वीआईपी नंबर न दे, तो कोई क्या करे. ऐसा ही एक मामला हजारीबाग डीटीओ का सामने आया है. लोक जन शक्ति पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश कुमार ने हजारीबाग डीटीओ पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उनका कहना है कि उनसे शुल्क लेने के बाद भी उन्हें वीआईपी नंबर की बजाय जेनरल नंबर थमा दिया गया.

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परिवहन आयुक्त की रजामंदी के बाद भी नहीं दिया नंबर

मुकेश कुमार ने न्यूज विंग को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने वीआईपी नंबर के लिए हजारीबाग डीटीओ कार्यालय में आवेदन दिया. डीटीओ कार्यालय से उन्हें संयुक्त परिवहन आयुक्त को आवेदन देने को कहा गया. उन्होंने विभाग के बताये अनुसार संयुक्त परिवहन आयुक्त को आवेदन दिया, जहां उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया गया और डीटीओ हजारीबाग को पूरी फीस लेकर वीआईपी नंबर जारी करने को कहा. सारी विभागीय औपचारिकता पूरी हो गयी. लेकिन, उन्हें फिलवक्त वीआईपी नंबर नहीं मिला है. उन्हें वीआईपी नंबर की बजाय जेनरल नंबर थमा दिया गया है. उन्होंने JH02V 0009 नंबर के लिए पूरे 50,590 रुपये वीआईपी नंबर के शुल्क के रूप में परिवहन कार्यालय में जमा किये, लेकिन इसके बावजूद उन्हें JH02V 7047 नंबर मिला. मुकेश कुमार का कहना है कि इस बात की शिकायत उन्होंने परिवहन आयुक्त से भी की, लेकिन उनकी तरफ से भी सही जवाब उन्हें नहीं मिला. मुकेश कुमार का कहना है कि उन्हें कहा गया कि यही नियम है.

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तकनीकी वजहों से हुआ ऐसा : डीटीओ

डीटीओ जगदीप तिग्गा का कहना है कि इस बात की शिकायत उनसे और किसी ने भी की है. लेकिन, मुकेश कुमार खुद उनके पास नहीं आये हैं. मामले की जानकारी मैंने विभाग के लोगों से ली है. दरअसल, कुछ तकनीकी वजहों से ऐसा हो गया है. विभाग उन्हें वीआईपी नंबर ही आवंटित करेगा. वह कार्यालय आकर मुझसे मिलें. निश्चित तौर पर उन्हें वीआईपी नंबर दिया जायेगा.

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