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#Hazaribag: लॉकडाउन का फायदा उठा जिप सदस्य के पति-देवर कर रहे नदी का अतिक्रमण, सीओ ने रिपोर्ट भेजी, नहीं हुई कार्रवाई

Hazaribag: सरकारी मशीनरी कोरोना संक्रमण रोकने में व्यस्त है तो दूसरी ओर जनता की सेवा का वादा कर  चुनाव जीतने वाले कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे हैं जो जमीन कब्जाने में व्यस्त हैं.

मामला हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड का है. गांव लोचर और हरला कृषि का हब माना जाता है. दोनों गांवों की सैंकड़ों एकड़ भूमि में लोचर नदी (दो मुहाने) से खेतों की सिंचाई की जाती है.

इन दोनों गांवों के सैकड़ों किसान अपनी आजीविका के लिए कृषि कार्य पर निर्भर हैं जहां लोचर नदी सिंचाई कार्य में महत्पूर्ण भूमिका निभाती है.

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लेकिन अब इसी नदी के अस्तित्व को मिटाने में जनप्रतिनिधि लगे हैं तो संकट से झूझ रहे किसानों की बात कौन करेगा.

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क्या है मामला


लॉकडाउन का फायदा उठा जिला परिषद उतरी भाग केरेडारी सदस्य अमिता देवी के पति नंदकिशोर दुबे और देवर परमानंद दुबे लोचर नदी में मिट्टी भरकर खेत बनाने में लगे हुए हैं.

स्थानीय ग्रामीणों ने केरेडारी अंचलाधिकारी को आवेदन देकर कहा है कि ग्राम हरला और लोचर के बीच दो मुहान नदी जिसका प्लॉट नम्बर 529 है और जिससे सैंकड़ों एकड़ भूमि की सिंचाई होती है उसे केरेडारी जिप सदस्य (उत्तरी) अमिता देवी के पति नंदकिशोर दुबे, देवर परमानंद दुबे द्वारा हेवई निवासी महेश महतो के सहयोग से अपनी जमीन में जेसीबी से मिट्टी कटवाकर ट्रैक्टर के माध्यम से लोचर नदी (दो मुहाने) नदी में अतिक्रमण कर लिया गया है.

इसके पूर्व भी केरेडारी (दक्षिणी) जिप सदस्य के रिश्तेदारों द्वारा वन विभाग की जमीन अपने नाम करा कंपनी को बेचने का मामला भी चर्चित हुआ था.

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ग्रामीणों ने की शिकायत

नदी के अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों ने हजारीबाग उपायुक्त और केरेडारी अंचल अधिकारी केरेडारी से लिखित शिकायत भी की है किन अब तक इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने के कारण ग्रामीण अक्रोशित हैं.

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में अनुरोध किया गया था कि मामले की जांच के उपरांत दोषियों पर कार्रवाई कर नदी को अतिक्रमण मुक्त किया जाये. आवेदन में दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं.

क्या कहते हैं अंचल अधिकारी

केरेडारी के अंचलाधिकारी अरुण तिर्की का कहना है कि मामले की जांच कर जांच रिपोर्ट वरीय अधिकारीयों को भेज दिया गया है. जिस जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की गयी है वह रैयती जमीन भू-अभिलेख में है.

साथ ही वहां सड़क भी बनी हुई थी जिसे जिप सदस्य के परिवार के लोगों ने उखाड़ दिया. अभी भी उसी सड़क का प्रयोग ग्रामीण कर रहे है.

जहां तक जल स्रोतों के अतिक्रमण का मामला है, उस पर कोरोना महामरी की वजह से व्यस्तता के कारण का कार्रवाई नहीं हो सकी.

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