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आत्मनिर्भर हॉकी ट्रेनिंग सेंटर से तैयार होगी ह़ॉकी की नयी पौध

8 सेंटर तैयार करने की तैयारी, चार लगभग तैयार

Amit Jha

Ranchi : हॉकी की नयी पौध तैयार करने की एक और मुहिम शुरू की गयी है. सिमडेगा में इसके लिये पहल हुई है. जीरो लेवल आत्मनिर्भर हॉकी ट्रेनिंग सेंटर का कंसेप्ट तैयार हुआ है. हॉकी सिमडेगा ने इस कंसेप्ट को धरातल पर उतारने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है. 6-12 साल की उम्र के बच्चों को ऐसे सेंटरों से जोड़कर हॉकी की फ्री ट्रेनिंग दी जाने लगी है. फिलहाल 4 सेंटर लगभग तैयार कर लिये गये हैं. 8 सेंटर खड़ा करने की तैयारी है. हॉकी सिमडेगा को उम्मीद है कि ऐसे सेंटरों के जरिये सिमडेगा में हॉकी की विरासत औऱ समृद्ध होगी. नयी पौध तैयार होगी और ओलंपियन तैयार होंगे.

क्या है आत्मनिर्भर हॉकी ट्रेनिंग सेंटर का कंसेप्ट

हॉकी सिमडेगा के महासचिव मनोज कोनबेगी बताते हैं कि सिमडेगा अरसे से राज्य में “खेल की नर्सरी” के तौर पर जाना जाता रहा है. इस जिले ने हॉकी में एक मील का पत्थर स्थापित किया है. ओलंपियन औऱ कई नेशनल इंटरनेशनल प्लेयर्स यहां से तैयार होते रहे हैं.

इनमें माइकल किंडो, सिल्वानुस डुंगडुंग तो ओलंपियन रहे. इसके अलावा कांति बा, मासिरा सुरिन, सुमराय टेटे, जस्टिन केरकेट्टा, विमल लकड़ा, वीरेंद्र लकड़ा, एडीन केरकेट्टा, असुंता लकड़ा जैसे शानदार प्लेयर भी हैं. इसी विरासत को औऱ भी समृद्ध करने की पहल पिछले कुछ महीनों से शुरू की गयी है. जीरो लेवल आत्मनिर्भर हॉकी ट्रेनिंग सेंटर इसी का एक हिस्सा है.

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ह़ॉकी सिमडेगा की ओऱ से ऐसी पंचायतों व क्षेत्रों की तलाश की जा रही है जहां 50 की संख्या के करीब ऐसे बच्चे मिलें जो हॉकी में रुचि रखते हों. इसमें हाथ आजमाना चाहते हों. इसी आधार पर वहां हॉकी ट्रेनिंग सेंटर तैयार किया जा रहा है. एक स्थानीय व्यक्ति से इसके संचालन में मदद ली जानी है. साथ ही हॉकी के जानकार या रिटायर्ड प्लेयरों की मदद से सेंटर आने वाले बच्चों को निःशुल्क हॉकी की ट्रेनिंग दी जा रही है. अब तक ऐसे दो सेंटर तैयार किये जा चुके हैं. इनमें 25-25 बच्चों को ट्रेनिंग का लाभ मिल रहा है. जल्दी ही कुल 8 सेंटर तैयार किये जायेंगे.

सालों भर मिलेगी ट्रेनिंग

सिमडेगा में जीरो लेवल आत्मनिर्भर हॉकी ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत हो चुकी है. इसका असल उद्देश्य शून्य स्तर से हॉकी को बढ़ावा देना है. इसके लिए 6 से 12 साल की उम्र के ख़िलाड़ियों को ट्रेनिंग दी जायेगी. सेंटर के लिए ठेठईटांगर ब्लॉक के कोरोमिया, बिजाडीह, लठ्खमं जोराम, जामबहार, कुरडेग प्रखंड के आसनबेड़ा, सर्प मुंडा, पाकरटांड़ प्रखंड के भेलवाडीह, केरसई प्रखंड में कोनजोबा,

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बोलबा प्रखंड में पीडियापोस में तैयारी जारी है. यहां 365 दिन सेलेक्टेड बच्चों को हॉकी की ट्रेनिंग दी जायेगी. इन्हें 2 माह के अंतराल में 2-2 दिन का एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड में भी प्रशिक्षण दिया जायेगा. साथ ही छह महीने के अंतराल पर इन केंद्रों के खिलाड़यों का आपस में मैच कराया जाएगा.

जिले के विभिन्न इलाकों में छिपी हुई प्रतिभा को तराशने के लिए गर्मी छुट्टियों के दिनों में विशेष पहल होगी. 9 से 14 साल की उम्र के खिलाड़यों के लिए जिला मुख्यालय के एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में 7 दिनों का विशेष प्रशिक्षण शिविर चलाया जाएगा. वैसे गांव जहाँ खिलाड़ियों की संख्या अधिक हो और मैदान नहीं हो, वहां स्थानीय लोगों से बातचीत कर निजी ज़मीनों को श्रमदान से समतल कर खेलने लायक बनाकर खेल की शुरुआत की जायेगी.

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