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झारखंड SSC की परीक्षा देनी है? पहले पढ़ लीजिए यह जरूरी खबर

तीन उदाहरणों से समझिए कि आप परीक्षा दे पायेंगे या नहीं

Rahul Guru

Ranchi :  यह जो खबर है, उसे तीन उदाहरणों के जरिए समझिए.
उदाहरण नं-1: आकाश नामक एक छात्र है. वह जेनरल कैटेगरी से आता है और जाति के आधार पर आरक्षण का पात्र नहीं है. उसके माता-पिता और पूर्व 100 साल से झारखंड में रह रहे हैं. इसके प्रमाण के लिए उसके पास जमीन का 1932 का खतियान भी है. किसी वजह से आकाश ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई झारखंड के बजाय पटना, रायपुर, लखनऊ या भोपाल के स्कूल-कॉलेज से की है. अब झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग राज्य सरकार के अधीन रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित कर रहा है, लेकिन आकाश को इस नियुक्ति परीक्षा में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी. झारखंड सरकार की जो नयी नियुक्ति-परीक्षा नियमावली है, उसके अनुसार आकाश इस परीक्षा में भाग लेने का पात्र नहीं होगा.

उदाहरण नं.-2: सूरज नामक एक छात्र है. वह आरक्षित-अनारक्षित किसी भी कैटेगरी का हो सकता है. वह और उसके माता-पिता मूल रूप से केरल, महाराष्ट्र या तमिलनाडु के रहनेवाले हैं. सूरज का परिवार झारखंड आ गया. सूरज की स्कूली शिक्षा यहीं हुई. उसने 9वीं-10वीं और इसके बाद 11वीं-12वीं की पढ़ाई रांची के एक स्कूल से की. झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग राज्य सरकार के अधीन रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा का जो फॉर्म निकला है, सूरज उसे भर सकता है और परीक्षा पास कर नौकरी भी पा सकता है.

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उदाहरण नं.-3: नरेश नामक एक छात्र है. वह एससी-एसटी या ओबीसी किसी भी कैटेगरी का हो सकता है. उसका परिवार झारखंड में 1932 का खतियानी है. उसके पिता रेलवे की नौकरी में थे, इसलिए उसने पहली से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई पिता के साथ विशाखापट्टनम के किसी स्कूल से की. नरेश   झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग राज्य सरकार के अधीन रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा का फॉर्म भर सकता है और परीक्षा पास कर नौकरी भी पा सकता है.

उपर्युक्त तीनों उदाहरण झारखंड सरकार की नयी नियुक्ति-परीक्षा संचालन नियमावली के अनुरूप हैं.

विधि विभाग ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अनुरूप नहीं माना

झारखंड सरकार के कैबिनेट ने नयी नियुक्ति-परीक्षा संचालन नियमावली बीते 29 जुलाई को पारित की थी. इसके पहले सरकार ने इस नियमावली के प्रस्ताव और इसके नोटिफिकेशन के ड्राफ्ट पर विधि विभाग से राय मांगी थी. विधि विभाग ने यह मंतव्य दिया था कि नियमावली का यह प्रस्ताव और इससे संबंधित अधिसूचना का प्रारूप भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अनुरूप नहीं है. विधि विभाग ने अपना मंतव्य देते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कतिपय मामलों में पारित न्यायादेशों को उद्धृत भी किया था.

झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में दिया गया जवाब

सरकार ने सदन में बताया, महाधिवक्ता के परामर्श के बाद तय हुई नियमावली

विधि विभाग ने भले नियमावली के इस प्रस्ताव और इससे संबंधित अधिसूचना के प्रारूप को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अनुरूप नहीं माना, लेकिन इसके बाद राज्य सरकार ने इसपर अपने महाधिवक्ता से विधिक परामर्श लिया. महाधिवक्ता के परामर्श पर विचार-विमर्श के बाद सरकार ने तय किया कि नियुक्ति परीक्षा नियमावली में संशोधन किया जाये. यह जानकारी झारखंड सरकार ने विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान गोड्डा के विधायक अमित मंडल के सवाल के जवाब में दी है. विधायक अमित मंडल ने यह भी जानना चाहा था कि क्या सरकार कोई ऐसा प्रावधान लाना चाहती है, जिसके तहत 1932 के खतियानधारी ही झारखंड में नियुक्ति के पात्र हों? इसपर सरकार ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

 

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