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क्या मुख्य सचिव डीके तिवारी ने लोकतंत्र के नैतिक मूल्यों का हनन नहीं किया ?

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Faisal Anurag

07 दिसंबरः विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान है. पूर्वी जमशेदपुर क्षेत्र से राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास उम्मीदवार हैं.

Mayfair 2-1-2020

05 दिसंबरः विधानसभा चुनाव के दो दिनों पहले झारखंड के मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि दलमा, चांडिल व डिमना लेक त्रिकोण टूरिज्म सेंटर बनाया जाये. यह खबर आज रांची व जमशेदपुर से प्रकाशित सभी हिन्दी अखबारों में है.

सवाल उठता है कि क्या मुख्य सचिव डीके तिवारी ने इस तरह का निर्देश देकर आचार संहिता का उल्लंघन किया है. क्या अखबारों में छपी खबरें आचार संहिता के दायरे में आती है. हो सकता है, नहीं आती हो. यह भी हो सकता है कि मुख्य सचिव के द्वारा बैठक करना और इस तरह का निर्देश देना आचार संहिता का उल्लंघन ना हो.

हो सकता है यह किसी वैधानिक कानून का उल्लंघन नहीं करता हो. लेकिन मुख्य सचिव के पद पर बैठे हुए किसी भी व्यक्ति के लिए यह घोषणा नैतिक रूप से भी सही हो, यह सवाल उठता है.

Vision House 17/01/2020

लोकतंत्र नैतिक मानदंडों के आधार पर ही जीवंत होता है. राज्य के सर्वोच्च ब्यूरोक्रेट का आचरण तटस्थ नहीं ही दिख रहा है. क्योंकि इस निर्णय से आसपास के लोग निश्चित रुप से प्रभावित होंगे और इसका असर मतदान पर भी पड़ सकता है.

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पांच सालों तक इस तरह की योजनाओं के बारे में चुप्पी और मतदान के ठीक दो दिन पहले इस तरह का निर्देश देना यह संदेह पैदा करता है कि ब्यूरोक्रेसी अपनी तटस्थता और गरिमा स्वंय ही खो रही है.

चीफ सेक्रेटरी का पद महत्वपूर्ण होता है और उससे अपेक्षा की जाती है कि वो ना सिर्फ कानून के शासन और आचरण का प्रदर्शन करेंगे. बल्कि उनका कर्तव्य नैतिकता के मापदंड पर भी लोगों को जायज दिखे.

दलमा,चांडिल और डिमना को त्रिकोण टूरिज्म सेंटर बनाने की बात चुनाव के बाद भी की जा सकती थी. यदि ऐसी कोई योजना जो अमल में नहीं है उसे चुनाव के एक दिन पहले शुरू करने का निर्दश देना और पीआरडी के द्वारा विज्ञापन जारी कर मीडिया को बताना, फिर अखबारों में प्रमुखता से खबर के रुप में छपने की घटना ने झारखंड की ब्यूरोक्रेसी ने अपनी गरिमा पर प्रश्नचिन्ह लगा लिया है.

पांच सालों में भी अनेक ब्यूरोक्रेट्स ने भाजपा के लिए काम किया है. राजबाला वर्मा और डीके पांडेय के अनेक बयान बताते रहे हैं कि वे शासन में दखल देते रहे हैं. कुछ अन्य ब्यूरोक्रेट्स ने भी इस तरह का आचरण समय-समय पर किया है.

वह दौर तो कब का जा चुका है जब ब्यूरोक्रेट्स केवल और केवल संविधान और कानून के आधार पर सही-गलत का फैसला करते थे. भारतीय ब्यूरोक्रेसी के अनेक लोगों ने अतीत में बड़े-से- बड़े राजनेताओं के संविधान विरोधी और कानून के विपरीत आचरण करने से इनकार किया है.

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लेकिन पिछले कुछेक सालों से देखा जा रहा है कि ब्यूरोक्रेसी ने संविधान के आलोक में सच बोलने का साहस खो दिया है. जिन अधिकारियों ने इस तरह का साहस दिखाया है, उन्हें पद से हाथ धोना पडा है. यहां तक कि इमरजेंसी के जमाने में भी कुछेक ऐसे अफसर थे जिन्होंने इंदिरा गांधी के आदेशों को मानने से इनकार किया था.

हालांकि उनकी संख्या कम थी, लेकिन उनके नैतिक विरोध की अहमियत थी. इंदिरा गांधी के साथ काम कर चुके आइएएस विशन टेडन की पुस्तक इस तरह की घटनाओं के बारे में संकेत देती है.

झारखंड के मुख्य सचिव डीके तिवारी वरिष्ठतम अधिकारी हैं और रिटायरमेंट के करीब भी हैं. बावजूद इसके उनका इस तरह का ऐलान बताता है कि उन्होंने अनजाने में यह बात नहीं की है. 7 दिंसबर को जमशेदपुर के दोनों विधान सभा क्षेत्रों और जुगसलाई में चुनाव होने जा रहा है.

यह मानने का पर्याप्त आधार है कि यह निर्देश वोट प्रभावित कर सकता है. यह दीगर बात है कि आदिवासियों के कुछ संगठन इस तरह के इको टूरिज्म के पक्ष में नहीं है.

मुख्य सचिव ने वन अधिकारियों के बीच यह ऐलान किया है. मुख्य सचिव चाहते तो चुनाव तक यह कहने से रूक भी सकते थे, लेकिन वे तो वन अधिकारियों को यह भी निर्देश दे रहे हैं कि राज्य के दूसरे हिस्सों में भी इस तरह के विकास को फोकस किया जाए.

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Ranchi Police 11/1/2020

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