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हरियाणा HC के फैसले को बनाया आधार तो होगी जेवीएम के बागी विधायकों की सदस्यता रद्द

Akshay Kumar Jha

Ranchi: साल 2014 में हरियाणा में ऐसी ही राजनीतिक उठापटक चल रही थी, जो आज झारखंड में है. हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजंका) के चार बागी विधायक सरकार के गठन के वक्त कांग्रेस में जा कर मिल गए थे. ठीक जैसे झारखंड में 2014 विधानसभा चुनाव के बाद जेवीएम के छह बागी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. जेवीएम के विधायकों की दलील है कि पार्टी की अनुमति से पूरे जेवीएम का बीजेपी में विलय हुआ है. वहीं जेवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि ऐसा नहीं है. विधायक अपने फायदे की वजह से दल-बदल कर गलत तरीके से बीजेपी में शामिल हुए हैं. मामले की सुनवाई विधानसभा की खुली इजलास में हो रही है. 97 सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के वकीलों की बहस पूरी हो गयी है. सुनवाई कर रहे विधानसभा के अध्यक्ष दिनेश उरांव ने 22 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब 20 फरवरी को फैसला आना है.

हरियाणा में छिन गयी थी विधायकी

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हरियाणा में विधानसभा स्पीकर की अदालत में फैसला विधायकों के पक्ष में आया. लेकिन हाइकोर्ट ने यह फैसला बदल दिया. हाइकोर्ट में हजंका के प्रमुख कुलदीप बिश्नोई का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील सत्यपाल जैन ने हाइकोर्ट में कहा था कि किसी पार्टी के सदस्यों का दूसरी पार्टी में विलय को पार्टी के विलय का नाम नहीं दिया जा सकता. इसके लिए पार्टी प्रमुख का दूसरी पार्टी में शामिल होना जरूरी है. साथ ही पार्टी के अहम पदों पर पदस्थापित अधिकारियों का विलय भी होना जरूरी है. इसी दलील के आधार पर हरियाणा कोर्ट ने हजंका के पक्ष में फैसला सुनाया था और चारों विधायकों की सदस्यता रद्द हो गयी थी.

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तमिलनाडु में भी अयोग्य हो गये थे विधायक

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के 18 विधायकों को अयोग्य घोषित किये जाने के मामले में मद्रास हाइकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर के फैसले को बरकरार रखा. 18 सितंबर 2017 को तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर पी. धनपाल ने एआइएडीएमके के 18 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी. अन्नाद्रमुक के विधायकों ने राज्यपाल से मिल कर पलानिसामी सरकार पर अविश्वास जाहिर किया था. इस पर पार्टी के चीफ विप एस. राजेंद्रन ने स्पीकर से शिकायत की थी. सदस्यता रद्द होने के बाद विधायक हाइकोर्ट चले गए थे. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पीकर का फैसला बरकरार रखा था.

झारखंड सरकार को कोई खतरा नहीं

जेवीएम के बागी विधायकों की विधायकी खतरे में पड़ने के बावजूद बीजेपी की रघुवर सरकार सुरक्षित रहेगी. 81 विधानसभावाली सीटों में फिलवक्त 37 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने की सूरत में झारखंड में सीटों की संख्या घट कर 75 हो जाएगी. 75 सीट होने की स्थिति में बहुमत के लिए सरकार के पास 39 सीट होनी जरूरी है. बीजेपी सरकार को आजसू का समर्थन मिला हुआ है. आजसू के चार विधायक हैं. यानी आजसू और बीजेपी मिला कर 41 हो जाएंगे. जो कि बहुमत के दो सीट ज्यादा है. ऐसे में बागी विधायकों के जाने से भी सरकार की सेहत पर की असर नहीं पड़ेगा. हां यह जरूर होगा कि झारखंड के मंत्रिपरिषद में कुछ नए चेहरे देखने के मौके मिल सकते हैं.

अगर बागियों के पक्ष में आया फैसला तो क्या ?

विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव का फैसला 20 फरवरी को आना है. कयास तो यही लगाया जा रहा है कि बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होगी. लेकिन अगर फैसला उनके पक्ष में आया तो जेवीएम का रुख क्या होगा. मामले पर जेवीएम की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सहाय ने बताया कि अगर फैसला उनके पक्ष में नहीं आया तो पार्टी की तरफ से हाइकोर्ट में रिट पिटीशन दायर की जा सकती है. रिट पिटीशन का फैसला आने के बाद फैसला बदला या बरकरार रखा जा सकता है.

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