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श्रम कानूनों का हनन मतलब मजदूरों का हनन : भुवन सिंह

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Ranchi : मजदूर विरोधी नीतियों का लागू कर सरकार मजदूर वर्ग का अधिकार छीनना चाहती है. पूरे देश में भाजपा सरकार पूंजीपतियों को बढ़ावा दे रही है. राज्य का भी यही हाल है, पूंजीपतियों को सर पर बैठाने के चक्कर में श्रम कानूनों को तोड़ा जा रहा है. उक्त बातें झारखंड जेनरल कामगार यूनियन की ओर से आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में बतौर मुख्य वक्ता श्रमिक नेता भुवन सिंह ने कहा. उन्होंने कहा कि राज्य को पूंजीपतियों को सौंपने के चक्कर में राज्य सरकार ने 49 श्रम कानूनों को तोड़ा है. श्रम कानूनों का हनन का साफ अर्थ है कि सरकार मजदूर विरोधी है. समय समय पर अलग नियम लागू कर सरकार किसी न किसी तरह मजदूरों को परेशान करने का काम कर रही है. रोजगार देने के नाम पर सुदूर गांवों में ग्रामीणों से जमीन तो ले ली गयी, लेकिन आजतक मजदूर को रोजगार नहीं मिला.

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राज्य गठन के बाद समस्या काफी जटिल हुई

भुवन सिंह ने कहा कि राज्य गठन के बाद से बिहार राज्य की अपेक्षा राज्य में शोषण अधिक बढ़ गया है. बिहार के समय राज्य फार लेन, थर्ड रेल लाईन, उग्रवाद, पलायन आदि समस्याएं लोगों के बीच नहीं थी, लेकिन अब स्थिति सबके सामने है. मूलवासियों की जमीन उनसे छीनी जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए है. जबकि जमीन के नाम पर रोजगार देने के आश्वासन को अब तक पूरा नहीं किया गया.

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अलग अलग सरकार ने लूटने का काम किया

इस दौरान झारखंड जेनरल कामगार यूनियन के अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि राज्य गठन के 18 साल हो गये, इस दौरान कई सरकार बनीं, लेकिन किसी ने भी राज्य के समग्र विकास के लिये कार्य नहीं किया. अलग अलग सरकारों ने सिर्फ राज्य को लूटने का काम किया है. इन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यदि सरकार अपना रवैया मजदूरों के प्रति नहीं सुधारती तो, निकट भविष्य में सरकार इसका खामियाजा भुगतेगी.

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खनन में लगे मजदूरों का होता है शोषण

जॉन मिरन मुंडा ने बताया कि लौह अयस्क, बाक्साइट आदि कंपनियों में खनन में लगे मजदूरों का काफी शोषण किया जाता है. इन्हें पगार तो कम मिलती है, वहीं इनके लिये अवकाश आदि की भी सुविधा नहीं होती. इन्होंने बताया कि कई मामलों में न्यूनतम मजदूरी से भी कम इन्हें दिया जाता है.

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पदयात्रा कर आये मजदूर

विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिये आठ जिलों से मजदूर पदयात्रा कर राजभवन पहुंचे थे. जिनमें पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, लातेहार, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिहंभूम से लगभग सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे. मौके पर प्रदीप गंझू, महेश मरांडी, निखिल सोरेन, रनिया उरांव, सुरेश यादव, राजेंद्र कांत महतो समेत अन्य लोग मौजूद थे.

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