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अधिकारों के हनन से नाराज हैं पार्षद,नगर निगम बना कुरुक्षेत्र

मेयर आशा लकड़ा के खिलाफ पार्षदों ने दिया धरना

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Ranchi: रांची नगर निगम मेयर और पार्षदों के बीच जंग का मैदान बन गया है. पार्षदों का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जो अधिकार उन्हे मिलना चाहिए था, वो अब तक नहीं मिला. निगम के पार्षदों का ये बयान राज्यसभा सांसद के उस ट्विट के जवाब में आया है जिसमें महेश पोद्दार ने कहा था कि राज्य के नगर निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों को जो अधिकार मिलना था उसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.

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महेश पोद्दार के ट्विट के बाद बढ़ा घमासान

राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने एक ट्विट किया. ट्विट में महेश पोद्दार ने लिखा था कि

राज्यसभा में मुझे बताया गया कि झारखंड ने नगर निकायों को सारे अधिकार सौंप दिए हैं. अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेवारी है कि वे इन अधिकारों का उपयोग कर आम नागरिकों के जीवन को सहज बनाएं. तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर जीवन स्तर उठाएं.

-महेश पोद्दार, राज्यसभा सांसद

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महेश पोद्दार का ट्विट, जिसके बाद मचा निगम में घमासान
महेश पोद्दार का ट्विट, जिसके बाद मचा निगम में घमासान

राज्यसभा सांसद के इस ट्विट के बाद पार्षद उत्तेजित हो गए. उन्होने कहा कि हमें तो अब तक हमारे अधिकार मिले ही नहीं हैं. अपने अधिकारों की मांग को लेकर पार्षद संघ ने मेयर आशा लकड़ा के के खिलाफ निगम कार्यालय के बाहर धरना भी दिया. पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि मेयर हिटलरशाही तरीके से काम कर रही हैं. इसके कारण निगम सभागार कुरुक्षेत्र का मैदान बन गया है.

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मेयर नहीं मानती हमारे अधिकारों को, क्या यह नगरपालिका अधिनियम का उल्लंघन नहीं ? : अरुण झा, पार्षद

अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत वार्ड नंबर 26 के पार्षद अरुण झा ने न्यूज विंग संवाददाता ने फोन पर बातचीत की. उनका कहना था कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत हम पार्षदों को यह अधिकार दिया गया है कि कुल पार्षदों का 1/5 सदस्य अगर रांची मेयर को निगम की विशेष बैठक बुलाने की मांग करते हैं, तो उन्हें बैठक बुलाना चाहिए. इसके विपरित मेयर बोर्ड की विशेष बैठक बुलाने की मांग को सिरे से खारिज कर देती है. उन्होंने कहा कि क्या विशेष बैठक नहीं बुलाना हम पार्षदों का और नगरपालिका अधिनियम का उल्लघंन नहीं है ?

इसी मुद्दे पर रांची नगर निगम के पार्षद बुधवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलने वाले थे. हालांकि मुख्यमंत्री के समय के अभाव के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि मेयर आशा लकड़ा जिस तरह निगम की कार्यवाही चलाना चाहती है, उससे निश्चित रूप से पार्षदों के अधिकारों का हनन हो रहा है. पार्षदों को बोलने नहीं दिया जा रहा है. निगम की बैठक में जब पार्षद किसी विषय पर कुछ बोलना चाहते है, तो मेयर उन्हें कुछ कहने से पहले ही बैठने को कह देती है.

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मानदेय तक का नहीं निकला हल, बैठक बुलाने से मेयर को परहेज क्यों ?- वेद प्रकाश, पार्षद, वार्ड 39

वहीं पूरे मामले पर वार्ड नंबर 39 के पार्षद वेदप्रकाश सिंह का कहना है कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही करीब 43 पार्षदों ने मेयर आशा लकड़ा से बोर्ड की विशेष बैठक बुलाने की मांग की थी. इसके बावजूद बैठक नहीं बुलायी गई. उन्होंने सांसद महेश पोद्दार के ट्वीट के जवाब में बताया कि बोर्ड की पहली बैठक में ही सांसद ने हम पार्षदों को मिल रहे मानदेय (वर्तमान में पार्षद को प्रतिमाह 7000 मानदेय दिया जा रहा है ) पर चर्चा की थी. इसके बावजूद अभी तक इसपर कोई पहल नहीं की गई. ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि पार्षदों के अधिकारों की किसी को कोई परवाह हैं.

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करना पड़ता हैं आम लोगों की तरह इंतजार : नाजिमा रजा, पार्षद, वार्ड 16

वार्ड नंबर 16 की पार्षद नाजिमा रजा ने न्यूज विंग को बताया कि निगम के 53 पार्षद हमेशा जनता के हितों के लिए काम करना चाहते है. इस मुद्दे पर अधिनियम 74(2) के तहत ही पार्षदों को बोर्ड की विशेष बैठक बुलाने का अधिकार दिया गया है. इसी धारा को नकार कर मेयर ने पार्षदों के अधिकारों का हनन तो किया ही, साथ ही स्वंय एक प्रतिनिधि होने के बादजूद प्रतिनिधियों से ही स्पष्टीकरण मांगने लगी. ये किसी भी तरह से सही नहीं है. नाजिमा रजा के मुताबिक यह कोई नया मामला नहीं है. जनता की समस्या को लेकर हम पार्षदों को कई बार उपायुक्त, एसडीओ के कार्यालय जाना पड़ता है. वहां हमें उसी तरह से इंतजार करना पड़ता है, जैसा कि एक आम शहरवासियों को. ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि निगम के पार्षदों के अधिकारों का हनन नहीं हो रहा है.

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