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गुजरात का हड़प्पाकालीन शहर धोलावीरा यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में हुआ शामिल

सिन्धु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े ज्ञात नगरों में से एक था धोलावीरा

New Delhi : वर्तमान गुजरात में स्थित हड़प्पा शहर धोलावीरा को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में अंकित किया गया है, मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक निकाय की पुष्टि की. यूनेस्को ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया, “ब्रेकिंग! धोलावीरा: एक हड़प्पा शहर, भारत के #IndiaFlag में, अभी-अभी @UNESCO #WorldHeritage सूची में अंकित है. बधाई हो!”

धोलावीरा (Dholavira) गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले की भचाउ तालुका में स्थित एक पुरातत्व स्थल है. इसका नाम यहाँ से एक किमी दक्षिण में स्थित ग्राम पर पड़ा है, जो राधनपुर से 165 किमी दूर स्थित है. धोलावीरा में सिन्धु घाटी सभ्यता के अवशेष और खण्डहर मिलते हैं और यह उस सभ्यता के सबसे बड़े ज्ञात नगरों में से एक था.
भौगोलिक रूप से यह कच्छ के रण पर विस्तारित कच्छ मरुभूमि वन्य अभयारण्य के भीतर खादिरबेट द्वीप पर स्थित है. यह नगर 47 हेक्टर (120 एकड़) के चतुर्भुजीय क्षेत्रफल पर फैला हुआ था. बस्ती से उत्तर में मनसर जलधारा और दक्षिण में मनहर जलधारा है, जो दोनों वर्ष के कुछ महीनों में ही बहती हैं.

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2650 ईसा पूर्व में आबाद हुआ था शहर

यहाँ पर आबादी लगभग 2650 ईसापूर्व में आरम्भ हुई और 2100 ईपू के बाद कम होने लगी. कुछ काल इसमें कोई नहीं रहा लेकिन फिर 1450 ईपू से फिर यहाँ लोग बस गए. नए अनुसंधान से संकेत मिलें हैं कि यहाँ अनुमान से भी पहले, 3500 ईपू से लोग बसना आरम्भ हो गए थे और फिर लगातार 1800 ईपू तक आबादी बनी रही. धोलावीरा पांच हजार साल पहले विश्व के सबसे व्यस्त महानगर में गिना जाता था था.

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