न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

ठोस कचरे का प्रबंधन व निपटान स्थानीय निकायों की जिम्मेवारी

34
  • राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर सरकार ने दी जानकारी
  • फिलहाल देश में 46% सूखे कचरे का ही हो पा रहा है निपटान

Ranchi: ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार गलियों, आवासीय परिसर से बाहर, खुले सार्वजनिक स्‍थलों, नालों अथवा जलाशयों में ठोस अपशिष्‍ट जलाने पर रोक है. यह शहरी स्‍थानीय निकायों(यूएलबी) का दायित्‍व है कि वे अपशिष्‍ट एकत्रित करें और इसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करें. राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न का उत्तर देते हुए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी दी.

गंदगी न फैलाने का निर्देश जारी करना शहरी स्थानीय निकाय का काम

श्री पोद्दार को बताया गया कि ठोस अपशिष्‍ट का ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन नियम,2016 के अंतर्गत निर्धारित तरीके से प्रभावी रूप से प्रबंधन का प्रावधान है. इस नियम के तहत अन्‍य बातों के साथ-साथ अलग– अलग किये गए सॉलिड वेस्ट का घर-घर जाकर संग्रहण, प्रयोक्‍ता शुल्‍क का संग्रहण, गन्‍दगी फैलाने वालों के विरूद्ध निर्देश जारी करना, सॉलिड वेस्ट एकत्र करने की सुविधाओं का निर्माण, बल्‍क सॉलिड वेस्ट उत्‍पन्‍न करने वालों द्वारा गीले कचरे का घर में ही प्रसंस्‍करण, बायो डिग्रेडेबल वेस्ट का कम्‍पोस्‍ट में प्रसंस्‍करण, सूखे अजैविक कचरे से ऊर्जा और रीफ्यूज्‍ड परिष्‍कृत ईंधन (आरडीएफ) तैयार करना, बचे हुए कचरे के लिए वैज्ञानिक लेंडफिल की स्‍थापना करना आदि दायित्व शहरी स्थानीय निकायों के लिए निर्धारित हैं.

हालांकि वर्तमान स्थिति के अनुसार, देश में उत्‍पन्‍न ठोस कचरे का 46% ही प्रोसेस किया जा रहा है. बताया गया है कि व्‍यावहारिक परिवर्तन, मैनपावर, पूंजी, उपस्‍करों आदि के मामलों में शहरी स्‍थानीय निकायों की क्षमता में कमी और भूमि उपलब्‍धता की समस्या के कारण सॉलिड वेस्ट के शत प्रतिशत प्रोसेसिंग का काम नहीं हो पा रहा है.

इसे भी पढ़ें – कैग की रिपोर्ट से साबित होता है कंबल घोटाला, पर सरकार जांच के नाम पर कर रही लीपापोती, साल बीत गया, नहीं हुई कोई कार्रवाई

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

%d bloggers like this: