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किसानों की कर्जमाफी की आधी राशि सरकार की दूसरी योजनाओं में कर दिया गया ट्रांसफर

अब अगले वित्तीय वर्ष ही अब पूरा हो सकेगी कर्जमाफी

Anuj Tiwary

Ranchi: किसानों के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए कर्ज माफी की आधी रकम दूसरी योजनाओं में ट्रांसफर कर दिया गया है. कृषि विभाग ने एक हजार करोड़ रुपए सरेंडर कर दिया, जिसके बाद इस रकम को दूसरे विभागों के योजनाओं में डाल दिया गया है. सरकार का दावा है कि मार्च के अंत तक बचे हुए एक हजार करोड़ रुपए से करीब चार लाख किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा. अभी तक 25 करोड़ रुपए 4200 किसानों के लिए जारी किया जा रहा है, जिससे बैंक इन किसानों का कर्ज माफ करेंगे. विभाग ने दावा किया है कि बचे हुए किसानों का कर्ज अगले वित्तीय वर्ष से शुरू किया जाएगा, जिसकी तैयारी चल रही है.

कृषि निदेशक निशा उरांव ने बताया कि अगले वित्तिय वर्ष में अप्रैल माह से बाकी सभी कर्जदाताओं का कर्ज माफ किया जाएगा. इसके लिए विभाग को अलग से सप्लीमेंट्री राशि दी जाएगी जो एक करोड़ का होगा. इसमें कोई अड़चन नहीं है, सारी चीजें पहले से तय मानी जा रही है. मालूम हो कि मार्च तक सभी नौ लाख कर्जदाताओं का कर्ज माफ होना संभव नहीं दिख रहा है, इस कारण विभाग ने समय रहते ही आधी राशि सरकार को सरेंडर कर दी है.

16 बैंकों को मिली है जिम्मेदारी

सूबे के 16 बैंकों को कर्ज माफी के लिए डाटा तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है. इसमें से सबसे अधिक कर्जदाता ग्रामीण बैंक से हैं. मुख्य रूप से ग्रामीण बैंक से 34 प्रतिशत, बैंक ऑप इंडिया से 32 प्रतिशत और एसबीआई से 16 प्रतिशत ग्रामीण जुड़े हैं. विभाग की ओर से बताया गया कि एसबीआई काफी धीमी गति से काम कर रहा है जिस कारण कई तकनीकी समस्या आती है. बैंक को बार-बार कर्ज माफी संबंधित कार्य जल्द करने को कहा गया है.

चार हजार किसानों पर करीब 20 करोड़ का कर्ज

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब चार हजार किसानों पर 20 करोड़ रुपए का कृषि ऋण है. इस हिसाब से अगर देखा जाए तो एक हजार करोड़ रुपए अगले माह तक बांट देने की संभावना दिखती है. बैंकों की ओर कर्जदाआतों की सूची अपडेट की जा रही है, जिसके बाद उपायुक्त की जांच सही पाए जाने पर ही विभाग की ओर से राशि देने की अनुशंसा की जाती है. इस बीच अगर बैंकों की सुस्ती दिखती है या सर्वर की समस्या आती है तो यह आधी राशि भी पूरी तरह से खर्च नहीं हो पाएगी और बचे हुई राशि एक बार फिर से विभाग को सरेंडर करना पड़ सकता है. हालांकि सप्लीमेंट्री के रूप में अगले वित्तीय वर्ष राशि विभाग को पुनः दिया जा सकेगा.

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