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झारखंड के आधे राज्यसभा सांसद सदन में रहते हैं खामोश

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Pravin Kumar

Ranchi : झारखंड के आधे राज्यसभा सांसद राज्यसभा में राज्य की जनता का प्रतिनिधित्व सिर्फ नाममात्र के लिए रहे हैं. ये ऐसे सांसद हैं, जो अपने मौजूदा कार्यकाल में संसद के सत्रों के दौरान खामोश रहे. सदन में न तो जनता के मुद्दों को उठाया और न ही किसी तरह का सवाल उठाया. मौन रहनेवाले इन सांसदों में बीजेपी के दो राज्यसभा सांसद भी शामिल हैं. वहीं, जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और सवालों को संसद के पटल पर रखनेवालों में एक बीजेपी, एक निर्दलीय और एक कांग्रेस सांसद हैं.

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ये हैं झारखंड के छह राज्यसभा सांसद

झारखंड जैसे छोटे राज्यों में राज्यसभा की सीटें कम होने के कारण लोकसभा सांसदों के साथ-साथ राज्यसभा सांसदों की भूमिका अहम होती है. झारखंड में राज्यसभा की 6 सीटें हैं, जिनमें तीन पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. भाजपा से तीन सांसद महेश पोद्दार, मुख्तार अब्बास नकवी,  समीर उरांव निर्वाचित हैं. वहीं एक सीट पर कांग्रेस के धीरज प्रसाद साहू, एक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल से प्रेमचंद गुप्ता एवं निर्दलीय के रूप में परिमल नाथवानी का एक सीट पर कब्जा है. राज्यसभा में राज्य की समस्याओं को रखना कई मायने में अहम माना जाता है. वहीं, राज्य से चुने गये राज्यसभा सांसद द्वारा सदन में राज्य हित से संबंधित परिचर्चा में हिस्सा न लेना और राज्य से जुड़ी समस्याओं को न रखना अपने आपमें काफी गंभीर विषय के रूप में देखा जाता है.

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वर्तमान कार्यकाल में किस सांसद ने किन विषयों पर प्रश्न किये

  • समीर उरांव

झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

भाजपा सांसद समीर उरांव ने अपने वर्तमान कार्यकल में किसी भी विषय पर प्रश्न नहीं किया और न ही किसी परिचर्चा में भाग लिया. जबकि, राज्य में पार्टी द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के विभिन्न विषय पर बोलते नजर आते हैं, लेकिन संसद में वह अब तक मौन ही रहे हैं.

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  • मुख्तार अब्बास नकवी

झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा की ओर से राज्यसभा में झारखंड से निर्वाचित हुए हैं. मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा के प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए अलग-अलग मुद्दों को लेकर पार्टी की जोरदार वकालत और उसका बचाव करते हुए नजर आते रहे हैं. लेकिन, झारखंड से राज्यसभा में चुने जाने के बाद उन्होंने राज्य से जुड़ी समस्याओं और मुद्दों को लेकर राज्यसभा में कोई प्रश्न नहीं किया है. अपने पूर्व के कार्यकाल में राज्यसभा में कई प्रश्न और परिचर्चा में हिस्सा लते रहे हैं, लेकिन अपने वर्तमान कार्यकल में पूरी तरह मौन नजर आ रहे हैं.

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  • प्रेमचंद गुप्ता

झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

प्रेमचंद गुप्ता राष्ट्रीय जनता दल से राज्यसभा सांसद हैं. वर्तमान कार्यकाल प्रेमचंद गुप्ता का राज्यसभा में दूसरा कार्यकाल है. वर्तमान समय में झारखंड से निर्वाचित होने के बाद ट्राइबल अफेयर्स, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस, ग्रामीण विकास, एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर, सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट, साइंस एंड टेक्नोलॉजी और टूरिज्म मंत्रालय से जुड़े हुए कुल 10 प्रश्नों को राज्यसभा में उठाया है. वहीं, 2018 में अब तक किसी भी विषय पर प्रश्न और परिचर्चा में हिस्सा नहीं लिया है.

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झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

  • धीरज प्रसाद साहू

धीरज साहू की राज्यसभा में यह दूसरा कार्यकाल है. वर्तमान कार्यकाल में रेलवे, स्टील, सिविल एविएशन, पावर, वाटर रिसोर्स, रिवर डेवलपमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज, स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े प्रश्नों को राज्यसभा में उठाया और विभिन्न विषयों पर परिचर्चा में शामिल हुए.

  • महेश पोद्दार

झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

महेश पोद्दार का वर्तमान कार्यकाल पहला कार्यकाल है. वर्तमान कार्यकाल के दौरान इन्होंने इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग, फाइनेंस, टूरिज्म, सिविल एविएशन, लेबर एंड इम्प्लॉयमेंट, वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन, लॉ एंड जस्टिस मंत्रालय से जुड़े विषयों पर प्रश्न राज्यसभा में उठाये और इस विषय की परिचर्चा में भाग लिया.

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  • परिमल नाथवानी

झारखंड के आधे सांसद राज्यसभा में रहते हैं खामोश

परिमल नाथवानी का वर्तमान कार्यकाल उनका दूसरा कार्यकाल है. वर्तमान कार्यकाल के दौरान फाइनेंस से जुड़ी बैंक ब्रांच संबंधी प्रश्न, पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्रालय से एलपीजी कनेक्शन संबंधी प्रश्न एवं राज्य से जुड़े विषय को लेकर कई प्रश्न राज्ययभा में उठा चुके हैं.

सांसदों के कार्यकाल और परिचर्चाओं में हिस्सा लेने का आकलन करें, तो भाजपा सांसद महेश पोद्दार, निर्दलीय परिमल नाथवानी अन्य राज्यसभा सांसदों से बेहतर रहे हैं. एक ओर पोद्दार जहां आम जन से जुड़े विषयों को लेकर प्रश्न उठाते रहे हैं, वहीं परिमल नाथवानी के सवाल जनसरोकर के विषय के साथ उद्योग और उद्योग की समस्याओं से जुड़े हुए अधिक रहे हैं. राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित 6 सांसदों में से आधे सांसद सत्र के दौरान सदन में मौन रहे या कुछ एक प्रश्न ही उठा सके हैं.

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