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40 की उम्र के बाद महिलाओं में देखा जा रहा जिम का क्रेज

थाइरॉयड, बीपी, डायबिटीज जैसी बीमारियों के इलाज में सहायक है व्यायाम

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Chhaya

Ranchi : वर्तमान समय में हर कोई खुद को फिट रखना चाहता है, चाहे उम्र जो भी हो. वहीं, महिलाओं की तो चाहत ही होती है कि ताउम्र खूबसूरत और फिट रहें. शादी के बाद महिलाओं में ऐसे भी मोटापे की समस्या होती है, जिससे महिलाएं कई बार असहज महसूस करने लगती हैं. इसी समस्या से निजात पाने के लिए राजधानी की महिलाओं को जिम का साथ मिला है. धीरे-धीरे लड़कियों के साथ अब महिलाएं भी जिम में एक्सरसाइज करना पसंद कर रही हैं. जिमहॉलिक के जिम ट्रेनर तरंग प्रीत सिंह ने बताया कि पिछले तीन चार सालों में 40 से अधिक उम्र की महिलाओं में जिम का क्रेज काफी बढ़ा है. उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की मानसिकता बदल रही है. ऐसे में महिलाएं मेल ट्रेनर के निर्देश में भी एक्सरसाइज करती हैं.

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वजन कम करना है मुख्य कारण

तरंग ने बताया कि जितनी भी महिलाएं जिम आती हैं, उनमें अधिकतर वजन कम कराने के लिए जिम ज्वॉइन करती हैं. पिछले तीन महीने से जिम में एक्सरसाइज करने आ रहीं संध्या बांडु ने बताया कि उनकी मुख्य समस्या वजन की थी. वर्किंग वुमन होते हुए भी वजन काफी बढ़ रहा था, जिससे उन्हें असहज महसूस होता था. ऐसे में जिम में एक्सरसाइज करने के दो माह बाद से ही काफी फर्क महसूस होने लगा. तरंग ने बताया कि लड़कियां वजन के साथ बॉडी टोनिंग के लिए भी आती हैं. बॉडी टोनिंग में बॉडी को एक निश्चित आकार दिया जाता है.

40 की उम्र के बाद महिलाओं में देखा जा रहा जिम का क्रेज

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एक माह तक कार्डियो प्रैक्टिस

जिम ट्रेनर काजल प्रधान ने जानकारी दी कि कोई भी व्यक्ति अगर पहली बार जिम ज्वॉइन करता है, तो उसे एक माह तक सिर्फ कार्डियो प्रैक्टिस करायी जाती है. यह महिलाओं के लिए सबसे आसान होता है, क्योंकि इसमें भार नहीं उठाना पड़ता. कार्डियो के तहत एक माह तक महिलाओं को सिर्फ ट्रेड मिल, क्रॉस ट्रेनर, साइक्लिंग आदि एक्सरसाइज कराया जाता है, जो अपने स्टेमिना से महिलाएं करती हैं.

शरीर के हिसाब से कराये जाते हैं एक्सरसाइज

तरंग प्रीत ने बताया कि महिलाओं और पुरुषों के शरीर में काफी अंतर होता है. पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं थोड़ी कमजोर होती हैं. ऐसे में महिलाओं को उनके शरीर और उनके वजन के अनुसार एक्सरसाइज कराया जाता है. एक माह की कार्डियो प्रैक्टिस के बाद ही नियमित जिम कराया जाता है.

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वजन का रखा जाता है ख्याल

उन्होंने कहा कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के जिम में एक्सरसाइज के दौरान वजन का खास ख्याल रखा जाता है. उनके वजन और जरूरत के अनुसार ही उन्हें वेट लूजिंग और वेट गेनिंग के लिए एक्सरसाइज कराये जाते हैं. इस दौरान जरूरी है कि जिम ट्रेनर प्रशिक्षु को और प्रशिक्षु अपने ट्रेनर को समझें, क्योंकि आपसी ताल-मेल से ही लोग एक-दूसरे की जरूरत को समझते हैं.

डाइट की मुख्य भूमिका

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अधिकतर जिम ट्रेनरों ने बातचीत के दौरान बताया कि लोगों की मानसिकता होती है कि जिम ज्वॉइन कर लेने से बॉडी में मनचाहा परिवर्तन कर सकते हैं, लेकिन यह गलत है. 80 प्रतिशत शरीर को शेप या स्लिम करने का काम डाइट से किया जाता है. व्यायाम सिर्फ शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए किया जाता है. ट्रेनरों ने बताया कि डाइट मतलब यह नहीं कि बिल्कुल उबले या सिर्फ फल खाकर रहना. डाइट का अर्थ है नियमित पौष्टिक भोजन, जिससे शरीर की सभी जरूरत पूरी हो. जिम संचालकों की ओर से ही शरीर के वजन समेत अन्य जांच कर टेस्ट के हिसाब से डाइट दिया जाता है.

चार माह की प्रैक्टिस काफी है

ट्रेनरों ने बताया कि जिम में एक माह तो पहले स्टेमिना टेस्ट लिया जाता है. इसके बाद मुख्य प्रैक्टिस शुरू की जाती है. ऐसे में दो माह के भीतर महिलाओं में फर्क दिखने लगता है. जबकि, चार माह में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह ट्रेंड हो सकता है.

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दैनिक कार्य में हो गया है शामिल

छह माह से ट्रेनिंग ले रहीं सुधा ने बताया कि जिम अब उनके दैनिक कार्य के रूप में शामिल हो चुका है. उन्होंने बताया कि बेटी के साथ उन्होंने जिम ज्वॉइन किया, लेकिन अब बेटी न भी आये, तो वह अकेली ही आती हैं. अन्य महिला संध्या बांडु ने बताया कि महिलाओं के लिए जिम काफी जरूरी है, क्योंकि दैनिक कार्य में महिलाएं खुद पर ध्यान नहीं दे पातीं. ऐसे में अपने लिए समय निकालकर महिलाएं जिम कर सकती हैं.

बीमारी के इलाज में है सहायक

कई महिलाओं ने बातचीत के दौरान बताया कि थाइरॉयड, बीपी, डायबिटीज जैसी उनकी बीमारी जिम ज्वॉन करने के बाद ठीक हो गयी. तो कुछ महिलाओं ने कहा कि उनका थाइरॉयड जिम के तीन माह के बाद ही कंट्रोल होने लगा. ट्रेनर काजल ने बताया कि महिलाओं के अनियमित मोटापे, थाइरॉयड समेत अन्य बीमारियों के इलाज में जिम काफी लाभदायक है. जरूरत है इसे सही दिशा-निर्देश में करने की.

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याद रखें जिम में एक्सरसाइज करने के ये नियम

कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद जिम न करें, मुख्य भोजन करने के डेढ़ घंटे बाद ही जिम करें. अपने शरीर और क्षमता का ध्यान रखें. प्रशिक्षक से खुलकर बात करें. पौष्टिक भोजन काफी जरूरी है. बाजार के वसायुक्त खान-पान से दूर रहें. निश्चित समय में ही प्रतिदिन प्रैक्टिस करें.

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