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गुरुदत्त की भतीजी थीं रूदाली जैसी संवदेनशील फिल्म बनाने वाली कल्पना लाजमी

पुण्यतिथि पर नमन

Naveen Sharma

Ranchi : मेरे लिए कल्पना लाजमी की पहचान रूदाली जैसी संवेदनशील फिल्म की निर्देशक के तौर पर ही रही है. मैंने उनकी एकमात्र फिल्म यही देखी है. इस एक फिल्म बदौलत ही वे मेरी पसंद की निर्देशिका रहेंगी. कल्पना ने तीन दशक पहले निर्देशक श्याम बेनेगल के सहायक के तौर पर हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया था. वे चित्रकार ललिता लाजमी की बेटी और अभिनेता और निर्देशक गुरुदत्त की भतीजी थीं.

वे श्याम बेनेगल की भी रिश्तेदार थीं. बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 1986 में आई एक पल थी. इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आज़मी मुख्य भूमिकाओं में नज़र आए थे.

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रूदाली में डिंपल का यादगार अभिनय

इसके बाद उन्होंने सिनेमा निर्देशन से कुछ समय का ब्रेक ले लिया था. फिर 1993 में डिंपल कपाड़िया की मुख्य भूमिका वाली बेहतरीन फिल्म रुदाली (rudali ) बनाई. रूदाली महाश्वेता देवी की कहानी पर बनी फिल्म है. इसमें राजस्थान की उन महिलाओं का दर्द शिद्दत से बयां किया गया है जो बड़े घरों में किसी की मृत्यु हो जाने पर मातम मनाने के दौरान उस घर में जाकर रोने का काम कई पुश्तों से करतीं आ रहीं हैं.

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डिंपल कपाड़िया ने रूदाली में शनिचरी की भूमिका में अपने अभिनय का सबसे शानदार उदाहरण पेश किया है. डिंपल की डबडबाई आंखें और घने बाल वाली पलकों से रूदाली का काम करनेवाली शनिचरी और उस समुदाय का सारा दर्द बखूबी बयां होता है.शनिचरी ऐसी अभागी थी जो जन्मते ही अपने बाप को खा गई थी.

डिंपल के अभिनय को देख कर लगा जिस शनिचरी ने कई वर्ष तक बेसुमार कष्ट झेलकर एक बूंद आंसू ना गिराया हो, जिसकी आंखों के आंसू जमकर ग्लेशियर बन गए हों . उसका रोना कैसा होगा, उसे रोने में कितनी मुश्किल हुई होगी. उसका रोना गिलिसरीन लगा कर बहाए जानेवाले कृत्रिम आंसूओं से निश्चिच तौर पर बहुत ही अलग रहा होगा.

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दिल हूम हूम करे

इस फिल्म के गीत भी बहुत अच्छे थे. खासकर संगीतकार भूपेन हजारिका के निर्देशन में लता का गाया दिल हूम हूम करे तो बेमिसाल है. यह गीत ही इस फिल्म की पहचान बन गया था. इसके अलावा झुठी मुठी मितवा और भूपेन दा का गाया गीत समय ओ धीरे चलो बड़़े कर्णप्रिय थे.

इस फिल्म के लिए डिंपल कपाड़िया को सर्वेश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. कल्पना लाजमी एक डायरेक्टर होने के साथ ही प्रड्यूसर और स्क्रीनराइटर भी थीं.

उन्हें समाज से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए जाना जाता था. उनकी ज्यादातर फिल्मों में महिलाएं ही मुख्य भूमिकाएं निभाती दिखती थीं. उनकी बनाई ‘अन्य फिल्मों में ‘दमन’ और ‘दरमियां’ जैसी फिल्में भी काफी पॉप्युलर हुई थीं.

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भूपेन हजारिका की जीवन संगिनी

लाजमी की बतौर डायरेक्टर आखिरी फिल्म ‘चिंगारी’ थी जो 2006 में रिलीज हुई थी. यह फिल्म भूपेन हजारिका के उपन्यास ‘द प्रॉस्टिट्यूट एंड द पोस्टमैन’ पर आधारित थी. इसके अलावा उन्होंने टीवी सीरियल ‘लोहित किनारे’ का भी निर्देशन किया था. कल्पना भूपेन हजारिका की जीवन संगिनी भी थीं.

स्केच : प्रभात ठाकुर, कला निर्देशक, बॉलीवुड .

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