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झारखंड को हॉकी में पहली बार नेशनल चैंपियन बनाने वाले गुरु आदम होरो हैं बेरोजगार, चला रहे ऑटो

Amit Jha

Ranchi. पिछले ही महीने (मार्च 2021) की तो बात है. जींद (हरियाणा) में आयोजित नेशनल सब जूनियर पुरुष हॉकी चैंपियनशिप में झारखंड की टीम नेशनल चैंपियन बनी. हॉकी के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ. हरियाणा जैसी मजबूत टीम को हराकर झारखंड की टीम सिरमौर बनी. टीम के कोच थे आदम होरो. टूर्नामेंट में चैंपियन बनकर टीम वापस लौट चुकी है. अब होरो वापस खूंटी अपने गांव में हैं. पिता मंगरा होरो के साथ ई-रिक्शा चलाने में कभी कभी हाथ बंटाते हैं. जरूरतों को पूरा करने को. वैसे खेल विभाग के पास गुजारिश भी लगा रखी है कि हो सके तो खूंटी में ही एस एस प्लस टू स्कूल के हॉकी सेंटर में कॉन्ट्रैक्ट पर ही कोच बना दें. पर हाथ अब तक खाली ही हैं.

10 दिनों में टीम को बनाया चैंपियन

आदम होरो ने न्यूज विंग से कहा कि मार्च के पहले सप्ताह में उन्हें खूंटी में सब जूनियर टीम के कोचिंग का जिम्मा मिला. महज 10 दिनों तक 18 खिलाड़ियों को कोचिंग देने का मौका मिला. खिलाड़ियों की फिटनेस और हॉकी पर कमांड तो अच्छी थी, बस गेम सेंस को थोड़ा डेवलप करने पर काम किया. हरियाणा में भी खिलाड़ियों ने इस बेसिक्स पर काम किया. परिणाम यह रहा कि पहली बार सब जूनियर हॉकी टीम नेशनल चैंपियन बनी. आगे जूनियर और नेशनल लेवल पर टीम झारखंड को तैयार करने का अरमान है.

 

लोन लेकर पिता चला रहे हैं रिक्शा

आदम होरो अपने माता-पिता के साथ मुरहू (खूंटी) के मुंडा कुंजला गांव में रहते हैं. बड़े भाई चमन होरो आर्मी में सेवा दे रहे हैं. 2016 में उनकी शादी भी हो चुकी है. एक बड़ी बहन है जो विवाहित है. घर में फिलहाल पिता मंगरा होरो हैं जो ई-रिक्शा चलाते हैं. मां लुइस होरो गृहिणी हैं. मंगरा पांच साल पहले तक खेती बारी ही किया करते थे. पर इससे पोसाई नहीं पड़ी तो लोन लेकर ई-रिक्शा लेकर सड़कों पर उतरे. कुंजला से खूंटी के बीच हर दिन रिक्शा चलाते हैं. दिनभर की मेहनत के बाद हाथ में 300-350 रुपये तक की कमाई कर पाते हैं.

नौकरी के लिए ओलंपियन ने भी बढ़ाया हाथ

नवल टाटा एकेडमी से जूलाई 2017 से 2019 के बीच आदम होरो जुड़े रहे थे. 2019-20 में उन्होंने एनआइएस डिप्लोमा भी किया. 2020 में राज्य सरकार के स्तर से खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के आधार पर आवेदन भी किया था. पर सफलता हाथ नहीं लगी. खेल विभाग से दो-दो बार वे लेटर लिखकर रोजगार के लिए मौका दिये जाने का आग्रह कर चुके हैं. आवासीय बालक हॉकी क्रीड़ा केंद्र (एस एस प्लस 2 स्कूल) खूंटी में कोच का पोस्ट खाली है. इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट पर ही सही, मौका दिये जाने की गुजारिश कर रखी है. ओलंपियन और साझा समन्वयक मनोहर टोपनो ने भी प्रतिभावान आदम होरो को कोच के तौर पर नौकरी दिये जाने की सिफारिश सरकार से की है.

आदम होरो के खाते में कई उपलब्धियां भी हैं. वे खुद भी हॉकी के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं. 2018 में सीनियर नेशनल में खेल चुके हैं. जूनियर इंडिया कैंप (2010) के भी सदस्य रहे हैं. इंटर यूनिवर्सिटी (नवंबर-दिसंबर 2015), जूनियर नेशनल (अक्टूबर 2010) में हुनर दिखाया. स्कूल नेशनल गेम (नवंबर 2009) में दूसरा स्थान मिला. पहले नेशनल रुरल गेम (जनवरी 2009 में) में पहला स्थान मिला था. नेशनल इंटर स्कूल गेम (जनवरी 2009), नेहरु कप (2006) में खेले. 2009-10 में अंडर-19 स्कूल नेशनल में भी खेलने का मौका मिला था.

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