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#Gumla: केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति ने गुमला से पलासिदियुस टोप्पो को चुनाव में उतारा

Gumla : नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कॉरीडोर से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करने वाली केन्द्रीय जन संघर्ष समिति, लातेहार-गुमला ने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में प्रभावित क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्रों गुमला, विशुनपुर और मनिका से अपना उम्मीदवार खड़ा करने की घोषणा पूर्व में ही कर दी थी.

समिति ने गुमला विधानसभा सीट से पलासिदियुस टोप्पो को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है.

समर्थन की अपील की

समिति की केन्द्रीय कमिटी की ओर से कहा गया है कि गुमला विधानसभा सीट से पलासिदियुस टोप्पो, केन्द्रीय जन संघर्ष समिति, लातेहार-गुमला के समर्थित उम्मीदवार होंगे जिनका स्थानीय जागरूक मंच, गुमला ने भी समर्थन किया है.

साथ ही समिति अन्य समाजिक संगठनों से भी समर्थन की मांग करेगी.

संगठन ने विपक्षी राजनीति दलों से भी आग्रह किया है कि जन आन्दोलन का समर्थन करते हुए इन तीन विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रत्याशी खड़ा न करें.

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1993 से संघर्ष

ज्ञात हो कि केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति 1993 से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करती आ रही है. अभी प्रभावित क्षेत्र में पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कॉरीडोर से सम्भावित विस्थापन के खिलाफ भी संघर्ष जारी है.

समिति ने कहा कि पिछले 26 -27 सालों से समिति अपने मुद्दे पर संघर्षरत है. इन 27 सालों में कई चुनाव हुए जिसमें समिति ने अपने राजनीतिक दलों को इस विश्वास के साथ वोट किया कि वे मुद्दों पर राहत पहुंचाएं, परन्तु आज तक हमारी भावनाओं एवं विश्वास के साथ धोखा हुआ है. अब हम वहाँ जाकर हस्तक्षेप करना चाहते हैं जहां नीति व नियम बनाये जाते हैं.

गुमला व लातेहार में है विस्थापन का खतरा

समिति की ओर से कहा गया कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से 245 गांव, टूडरमा डैम से 55, पलामू व्याघ्र परियोजना से 168 गांव प्रभावित होंगे. 8 गांवों को विभाग द्वारा खाली करने के लिए सहमति एवं असहमति की चिट्ठी भी भेजी जा चुकी है.

वाइल्ड लाइफ कॉरीडोर के नाम पर विभाग 6 कॉरीडोर बनाने का प्रस्ताव बना चुकी है जिससे 770 गांव प्रभावित होंगे. समिति का आरोप है कि समान विचारधारा वाली पार्टियों का सर्मथन किया जाता रहा लेकिन उन दलों ने संभावित विस्थापितो को ठगने का काम किया.

समिति का मानना है कि झारखंड व देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुज़र रहा है. जनता के अधिकारों और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर लगातार हमले हो रहे हैं.

भूमि अधिग्रहण क़ानून में बदलाव, भूख से हो रही मौतें, भीड़ द्वारा लोगों की हत्या, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, सरकार द्वारा प्रायोजित संप्रदायिकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले, आदिवासियों के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर प्रहार एवं बढ़ता दमन इसके उदाहरण हैं.

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धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने में करेगी मदद

जन संघर्ष समिति का मानना है कि झारखंड में लोकतंत्र और संविधान के संरक्षण और जन मांगों को पूर्ण करने वाली सरकार बनेगी.

ऐसी सरकार जिसकी लोकतंत्र के मुल्यों जैसे समानता, न्याय, धर्मनिरपेक्षता  आदि को स्थापित करना पहली प्राथमिकता होगी. समिति वैसी सरकार बनाने में मदद करेगी.

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