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गुजरात के बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट को उम्रकैद

Jamnagar: गुजरात के बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट को जामनगर कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनायी है. 30 साल के व्यक्ति की हिरासत में मौत मामले में कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और उनके सहयोगी को दोषी करार दिया है.

29 साल पुराना है मामला

1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी. उस वक्त संजीव भट्ट जामनगर के एएसपी थे. इस दौरान पुलिस ने 133 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 25 लोग घायल हुए थे. जबकि आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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न्यायिक हिरासत में रहते हुए एक आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की मौत हो गई थी. इसे लेकर तत्कालीन एएसपी भट्ट और उनके सहयोगियों पर पुलिस हिरासत में शख्स को पीटने का आरोप लगा था.

इस मामले में संजीव भट्ट व अन्य पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी. 2011 में राज्य सरकार ने भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी.

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी भट्ट की याचिका

ज्ञात हो कि पिछले बुधवार (12 जून) को सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था. शीर्ष अदालत में दाखिल इस याचिका में भट्ट ने अपने खिलाफ हिरासत में हुई मौत के मामले में गवाहों की नए सिरे से जांच की मांग की थी. भट्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

गुजरात हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमे के दौरान कुछ अतिरिक्त गवाहों को गवाही के लिए समन देने के उनके अनुरोध से इनकार कर दिया था.

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि निचली अदालत ने 30 साल पुराने हिरासत में हुई मौत के मामले में पहले ही फैसले को 20 जून के लिए सुरक्षित रखा है.

गौरतलब है कि संजीव भट्ट को बिना किसी मंजूरी के गैरहाजिर रहने व आवंटित सरकारी वाहन के दुरुपयोग को लेकर 2011 में निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद 2015 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

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