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ऑटोरिक्शा चालक की गुजरात हाई कोर्ट से गुहार, मुझे धर्मनिरपेक्ष, नास्तिक या राष्ट्रवादी घोषित करें

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Ahmedabad : अहमदाबाद के राजवीर उपाध्याय नाम के एक ऑटोरिक्शा चालक ने गुजरात हाई कोर्ट के समक्ष गुहार लगाते हुए कहा है कि उसके धर्म को धर्मनिरपेक्ष, नास्तिक या राष्ट्रवादी घोषित कर दिया जाये. हाई कोर्ट में दायर याचिका में उसने कहा है कि वह समाज में जातिगत व्यवस्था का सामना कर रहा है, इसलिए वह अपने धर्म को इन तीनों में से कोई एक धर्म घोषित कराना चाहता है. राजवीर ने कोर्ट से गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऐक्ट में बदलाव करने का भी आग्रह किया है.

जिला कलेक्टर ने धर्म को नास्तिक में बदलने की अर्जी खारिज कर दी

कहा है कि फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऐक्ट में नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष होने की बात नहीं लिखी गयी है. उनके अनुसार इसलिए कोर्ट आना पड़ा, क्योंकि जिला कलेक्टर ने धर्म को नास्तिक में बदलने की अर्जी खारिज कर दी थी. याचिका में उसने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अनुसार देश के हर नागरिक को किसी भी धर्म को अपनाने और प्रचार करने का अधिकार है. इसलिए जिला कलेक्टर द्वारा आवेदन खारिज करने का फैसला अवैध है.

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फ्रीडम और रिलिजन ऐक्ट में बदलाव की मांग की राजवीर ने

गुजरात फ्रीडम और रिलिजन ऐक्ट में बदलाव की मांग करते हुए राजवीर ने कहा कि यह मनमाफिक धर्म या नास्तिक होने का पालन करने की आजादी का उल्लंघन करता है . कहा कि भारतीय संविधान द्वारा दी गयी आजादी का उल्लंघन करने वाले ऐक्ट को बदला जाना चाहिए. जानकारी के अनुसार गुजरात में उपाध्याय गुरु-ब्राह्मण जाति से आता है. यह एक अनुसूचित जाति है.

राजवीर के अनुसार उसकी नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति के रूप में पहचाने जाने की अपील प्रशासन ने खारिज कर दी, इसलिए वह हाई कोर्ट आया है. कहा कि अगर मैं अपने धर्म को धर्मनिरपेक्ष या नास्तिक नहीं कह सकता, तो कम से कम राष्ट्रवादी कहे जाने की इजाजत दी जाये.

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