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जीएसटी की मार ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर, हर हफ्ते बंद हो रहे दो शोरूम, जा रही हैं हजारों नौकरियां

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NewDelhi : जीएसटी के कारण भारतीय बाजार में कारों की बिक्री लगातार घट रही है. इसके अलावा कई कारण हैं, जो कार बाजार पर भारी पड़ रहे हैं.   एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर हफ्ते कारों के लगभग  2 शोरूम बंद हो रहे हैं और हजारों की संख्या में लोगों के हाथ से नौकरियां जा रही हैं.  खबरों के अनुसार रिटेल ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और लगभग 300 शोरूम कमजोर बिक्री के चलते बंद हो चुके हैं.  इन शोरूमों के बंद होने के कारण तीन हजार से ज्यादा लोग अपनी नौकरियां खो चुके हैं. रिटेल ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगातार हो रहे  नुकसान के संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि डीलरशिप्स को जो कर्ज दिये गये हैं , वे एनपीए यानी कि नॉन परफॉर्मिंग एसेस्ट्स में तब्दील हो रहे हैं;

जानकारी के अनुसार भारतीय बाजार में डीलरशिप बेहद कम मार्जिन पर व्यवसाय करने को विवश  है;  यहां पर डीलरों को 2.5% से 5% के बीच मार्जिन पर काम कर रहा है.  वैश्विक स्तर पर डीलर  8% से 12% के मार्जिन पर काम कर रहे हैं.  डीलर्स को होने वाले इस नुकसान के पीछे कई कारण  हैं.  बड़े शहरों में शोरूम या जमीन का किराया, कर्मचारियों की तनख्वाह लागत, बीमा और वित्त कंपनियों से गिरता मार्जिन औरजीएसटी के चलते डीलर्स के मुनाफे में भारी कमी आयी है.  इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियां लगातार अपने डीलरशिप नेटवर्क के विस्तार में लगे हुए है, बावजूद इसके वे अपने सेल्स टार्गेट को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.

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मेट्रो शहरों में हर दो डीलर्स में से एक को भारी नुकसान

ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष काले  ने इस सबंध में इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि धीमी गति से बाजार में वित्तीय संकट या कुप्रबंधन और देश भर में लगातार बढ़ रहे डीलरशिप नेटवर्क के चलते ऐसी स्थिति बनी है;  उन्होंने कहा कि, जिस रफ्तार से शोरूम बंद हो रहे हैं, ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था.  गुड्स एंड सर्विस टैक्स का वर्किंग कैपिटल पर पूरा प्रभाव है.  इसके अलावा लगातार उच्च निवेश लागत के  कारण भी संकट और भी बढ़ा है. जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले, डीलरों को कारों पर बिक्री कर और वैट का भुगतान करने के लिए कुछ महीनों का समय मिला था.  जीएसटी शासन के तहत, उन्हें कर अपफ्रंट का भुगतान करना होगा और इससे उनकी वर्किंग कैपिटल बुरी तरह से प्रभावित हुई है.

वित्तीय वर्ष 18 में 8% और वित्तीय वर्ष 19 में 2.5% बढ़ने के बाद भी  इस साल अप्रैल में यात्री वाहनों की बिक्री में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी है.  देश के बड़े और मेट्रो शहरों में हर दो डीलर्स में से एक को इस बीच भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है.  यह औसत 50 प्रतिशत का है.  जो डीलर इस नुकसान को झेल नहीं पा रहे हैं उनके पास शोरूम बंद करने के अलावा अन्य कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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30% प्वाइंट ही ऐसे हैं जो कि मुनाफे में हैं

2017-2018 में निसान मोटर कंपनी और हुंडई मोटर इंडिया की क्रमशः 38 और 23 डीलरशिप पर ताला लगा है.  वहीं मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और होंडा कार्स इंडिया के लगभग 9-12 डीलरशिप बंद हुई हैं.  महाराष्ट्र और बिहार में क्रमशः 56 और 26 डीलरशिप बंद हुई हैं, जबकि लगभग 19 डीलरों ने केरल और राजस्थान में संचालन बंद कर दिया है.  सबसे बड़ी समस्या बड़े शहरों में देखने को​ मिली हैं.  जहां मार्केट में 5 से 7 प्रतिशत ग्रोथ रेट थी, वहीं पर 15 से 20 प्रतिशत की दर से नये डीलरशिप की शुरुआत हुई है.  इसके अलावा वाहनों की मांग भी लगातार सुस्त पड़ी थी.

जिसके चलते पहले से ही मौजूद डीलरशिप के लिए भी मुश्किलें बढ़ गयी. विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 15,000 अधिकृत डीलर प्रिंसिपल पूरे देश में 25,000 से अधिक सेल्स प्वाइंट को मैनेज करते हैं.  जिनमें से केवल 30% प्वाइंट ही ऐसे हैं जो कि मुनाफे में हैं. वहीं अन्य 30 प्रतिशत डीलर्स 1% से 2% के मार्जिन से व्यवसाय करने को विवश हैं. यदि हालात ऐसे ही बने रहें तो देश की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की हालत और भी खस्ता हो जायेगी.

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