न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

‘देश की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान बनी जीएसटी’

2,208

जीएसटी लागू होने की वर्षगांठ पर विशेष

Mahesh Poddar

आज पूरा देश वस्तु एवं सेवा कर की वर्षगांठ मना रहा है. आज से ठीक एक साल पहले इस कर प्रणाली को लेकर राजनीतिक गलियारे में कुछ ताकतों ने असमंजस की स्थिति पैदा करने की कोशिश की. लेकिन उन ताकतों ने, जिनपर इसका सीधा असर पड़ना था खुद को मजबूती के साथ बदलाव का वाहक साबित किया. मैं स्वयं संसद में उस ऐतिहासिक क्षण का गवाह और हिस्सा था इसलिए मुझे आज इस कर प्रणाली को सरलतासफलता पूर्वक काम करता और पूरे देश की स्वीकार्यता मिलता देख अत्याधिक प्रसन्नता हो रही है.

संसद में अपने संबोधन के क्रम में मैंने कहा थाजीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौर में लोगों से गलतियां होंगी,  उन्हें भूल समझा जाए, अपराध नहीं.  मुझे खुशी है कि सरकार ने लोगों का फीडबैक लेकर सुधार करने का सिलसिला जारी रखा और आज हम देख सकते हैं जीएसटी एक लाख करोड़ रुपये का राजस्व दे रहा है. शुरुआत में पुराने क्रेडिट की वजह से रेवेन्यू कम दिख रहा था लेकिन अब लोगों को भरोसा हो गया है.  देश में कानूनसम्मत काम करने की प्रवृत्ति बनी है.

जीएसटी का ही कमाल है कि पूरा देश एक बाजार बन गया है. झारखण्ड जैसे राज्य में कुछ चुनौतियां हैं लेकिन राजनैतिक सामंजस्य के साथ कामकर रही जीएसटी काउंसिल इनका समाधान कर देगी, यह विश्वास दृढ़ हो चला है. जीएसटी के तहत ऑनलाइन परमिट व्यवस्था अभी सुचारू चल रही है. इसके फीडबैक मैकेनिज्म का ही कमाल है कि छोटे व्यापारियों को छोड़ दिया गया और अब शुरुआती दिनों का विरोध कहीं नहीं दिखता.

GST के एक साल, विरोध का स्वर नहीं

आज भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी रफ़्तार से दौड़ रही है. तेल का दाम बढ़ने से बहुत सारे देश विचलित हैं लेकिन हम मजबूती से खड़े हैं. जीएसटी लागू होने के बाद इंस्पेक्टर राज से त्रस्त लोगों ने राहत की सांस ली है. यह सही है कि जीएसटी से पहले के जो पुराने पेंडिंग मामले हैं उनको लेकर अभी भी पुरानी कर प्रणाली से जुड़े कुछ विभागों के अधिकारी कर दाताओं को परेशान कर रहे हैं लेकिन अब तो उनके दिन भी गए समझिए. व्यापारी का जो समय सरकारी दफ्तर में बीतता था, अब अपने व्यापार धंधे में या अपने परिवार के साथ बीत रहा है. युवा वर्ग जो उद्योग/व्यापार/धंधे में आ रहा है वो कानूनों के पचड़े में फंसकर प्रताड़ित नहीं, गर्व के साथ काम कर रहा है.

जीएसटी के साथ एक और अच्छी चीज आई है, एडवांस रुलिंग. कुछ ऐसे मामले जिनका वर्गीकरण विवादित था या जिसकी टैक्स की दर तय करने में असमंजस था, मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाए जा रहे हैं. जहां पहले असेसी और डिपार्टमेंट का झगड़ा था और जिसका निपटारा जटिल कानूनी प्रक्रिया से होता था, अब केवल बता दीजिये समाधान होगा. असेसी भी लिख सकता है, अधिकारी भी लिख सकता है.  बॉर्डर पर ट्रक के मूवमेंट की टाइम 18 से 22% कम हो गयी. चेकपोस्ट पर जाम इतिहास की बात हो गयी. देश के सारे चेकपोस्ट ख़त्म हो गए. वाकई हम न्यू इंडिया का निर्माण कर रहे हैं.

लेखक राज्यसभा सांसद हैं और ये उनके निजी विचार हैं

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: