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झारखंड में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध का ग्रोथ रेट तेज,बढ़े पोक्सो केस के मामले

Ranchi: झारखंड में नाबालिग बच्चियां, किशोरियां खतरे की जद में हैं. इसका सबूत उनके खिलाफ बढ़ते यौन अपराध के मामले हैं. यही वजह भी है कि राज्य में पिछले तीन सालों में पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले केसों में बढ़ोत्तरी हुई है. 2018-2020 की अवधि में साल दर साल आंकड़ा बढ़ा है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (केंद्र सरकार) ने लोकसभा के चालू मॉनसून सत्र में भी इसे स्वीकार किया है. केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी के मुताबिक बच्चों के यौन अपराध मामलों, उस पर विधिसम्मत सुनवाई और इसकी रोकथाम के लिये पोक्सो अधिनियम प्रभावी हैं. 2018 में झारखंड में पोक्सो एक्ट के तहत 615 मामले दर्ज हुए. 2019 में यह 654 हो गया. 2020 में 938 केस रजिस्टर्ड हुए. यह बताता है कि राज्य में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध का ग्रोथ रेट बढ़ा है. ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई किये जाने को राज्य में 2018 से अब तक (मई 2022 तक) 80 से अधिक फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करनी पड़ी.

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पोक्सो केस पर कार्रवाई

Sanjeevani

सांसद एस वेंकटेशन ने देश भर में पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले, दोष सिद्धि, पिछले पांच वर्षों में स्थापित किये गये फास्ट ट्रैक कोर्ट और इसकी देश भर में संख्या के बारे में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जानकारी मांगी थी. इस पर मंत्रालय ने जानाकारी दी है कि 2018 में देश भर में (सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश) पोक्सो के तहत 39827 मामले दर्ज (CR) हुए. इसमें से झारखंड के 615 केस भी हैं. झारखंड में दर्ज केसों में  आरोपित मामले (CCS) की संख्या 391, दोष सिद्धि मामले (CON) की 38, दोष सिद्धि दर (CVR) 29.5 है.  वर्ष के अंत में दर्ज मामले (CPTEY) 757, गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों (PAR) की संख्या 543,  आरोपित व्यक्तियों (PCS) की संख्या 452 और दोष सिद्ध व्यक्तियों (PCV) की 41 है.

2019 में देश भर में कुल 47324 केस रजिस्टर हुए थे. झारखंड में इस साल 654 केस रजिस्टर किये गये. इसमें से CCS की संख्या 459, CON की 100, CVR की 56.2 है. CPTEY की 1024, PAR की 638, PCS की 530 और PCV की 104 है. 2020 में देश में कुल 47221 केस रजिस्टर किये गये. झारखंड राज्य में इस साल के अंत तक 938 रिकॉर्ड हुए. इनमें से CCS की संख्या 582, CON की 137 और CVR की 66.2 फीसदी रही. रजिस्टर्ड केसों में CPTEY की संख्या 1398, PAR की 723, PCS की 673 और PCV की 152 रही थी.

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पांच सालों में खुले इतने फास्ट ट्रैक कोर्ट

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मुताबिक 2018 से 2022 तक (मई 2022 तक) देश भर में फास्ट ट्रैक खोले जाते रहे. 2018 में 676, 2019 में 828, 2020 में 907, 2021 में 898 और 2022 में 892 रही. इनमें से झारखंड में 2018 में 10, 2019 में 0, 2020 में 40, 2021 में 6 और 2022 में 33 कोर्ट खोले गये.

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