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सूद पर पैसे लेकर उपजायी सब्जियां, लॉकडाउन ने बढ़ायी मुसीबत अब आत्महत्या की नौबत

Rahul Guru

Jharkhand Rai

Ranchi: आज लॉकडाउन हुए ठीक 15 दिन हुए हैं. इन 15 दिनों में एक आम आदमी के परिवार में राशन और गैस के बाद जिस चीज को लेकर दिनभर कर चर्चा चलती है, वह सब्जी है. शहर में सब्जी की कीमत बेलगाम हो चुकी है.

जबकि इसके ठीक उलट शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में सब्जी उगाने वाले किसान सिर पीट रहे हैं. उन्हें सब्जियों की कीमत नहीं मिल रही है. पिछले दो महीने से जितनी मेहनत कर किसानों ने सब्जियां उपजायी, आज मेहनत और सब्जियां दोनों जाया हो रही हैं.

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आखिर क्यों है, ऐसी स्थिति. शहर में क्यों है सब्जियों की अनाप-शनाप कीमत. जबकि इसके ठीक उलट किसान क्यों पीट रहे सर. इसी को समझने के लिए रांची से लगभग 30 किमी की दूरी तय कर पहुंचे नगड़ी के केसारो गांव के किसानों के बीच और वास्तविक स्थिति को समझने की कोशिश की सीनियर रिपोर्टर राहुल गुरु ने.

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पांच से 10 फीसदी के इंटरेस्ट पर पैसे ले कर रहे खेती

नगड़ी के केसारो गांव में लगभग 300 से अधिक किसान हैं. कई टोला में बंटा यह गांव सब्जी उगाने में न केवल झारखंड बल्कि ओडिसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक पहचान रखता है. इस गांव में आपको वे सभी सब्जियां मिल जायेंगी, जिनका नाम आपको याद है.

अभी इस गांव से फ्रेंचबीन, मटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, भिंडी, हरी मिर्च जैसी सब्जियां निकल रही हैं. पर इन्हें उगाने वाले किसान की लागत भी नहीं निकल रहा है.

सूद पर पैसे लेकर उपजायी सब्जियां,  लॉकडाउन ने बढ़ायी मुसीबत अब आत्महत्या की नौबत
रांची के नगड़ी स्थित खेत में लगी सब्जियां, लॉकडाउन की वजह से किसान सब्जियों को तोड़ नहीं रहे और जो बेच रहे हैं उसकी कीमत भी नहीं मिल रही है.

इसी गांव के किसान हैं बंदे कच्छप. अभी इनके खेत से मटर, फ्रेंचबीन और शिमला मिर्च निकल रहा है. वे बताते हैं कि 7 एकड़ जमीन में साढ़े तीन लाख रुपये का कर्ज लेकर सब्जियां उगा रहे हैं. खेती करने के लिए महिला समिति सहित दूसरे लोगों से 5 से 10 परसेंट के इंटरेस्ट पर तीन लाख रुपये कर्ज लिए, लेकिन बाजार की अभी जो स्थिति है कि मुनाफे की उम्मीद तो छोड़िए कर्ज वापस करना भी मुश्किल लग रहा है.

इसी तरह किसान रवि कच्छप की 3 एकड़ जमीन पर शिमला मिर्च, फ्रेंचबीन और हरी मिर्च लगी हुई है. रवि बताते हैं कि केवल हरी मिर्च पर 60 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं. बाजार में जो कीमत है, उस वजह से तो खेत में ही सब छोड़ देना पड़ रहा है. जब कीमत ही नहीं मिलनी है, तो फिर सब्जियों को तोड़ने के पीछे की मेहनत करके क्या फायदा.

कुछ ऐसी ही बात कहते हैं किसान बीरेंद्र, पंचू महतो और अनूप. वे कहते हैं कि रांची के बाजार में जिस सब्जी की कीमत 30 से 40 रुपये है, उसे किसानों से 5 से 7 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा है. फायदा तो कुछ नहीं, लेकिन जो कुछ मिल जाये, उसी उम्मीद से सब्जियां बेचनी पड़ रही हैं.

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जहां प्रति किलो 30 रुपये लाभ होता, अभी हो रहा घाटा

किसानों के दर्द को ऐसे समझिए. किसान बंदे कच्छप के मुताबिक, अभी जिस मटर को नगड़ी सब्जी मंडी में अधिकतम 10 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं. लॉकडाउन नहीं रहने पर वो 40 रुपये प्रति किलो बिकता. मुझे एक किलो मटर में 30 रुपये का लाभ होता. लेकिन बंदी की स्थिति में 5 से 7 रुपये प्रति किलो बेंच रहे हैं. अभी हमें 22 से 25 रुपये का नुकसान हो रहा है.

सूद पर पैसे लेकर उपजायी सब्जियां,  लॉकडाउन ने बढ़ायी मुसीबत अब आत्महत्या की नौबत
कीमत नहीं मिलने की वजह से किसान सब्जियों को खेत से तोड़ नहीं रहे हैं और ऐसे में सब्जियां खराब हो रही हैं. लॉकडाउन से भी किसानों को खेत पर जाने में परेशानी हो रही है, ऐसे में सब्जियां सड़ने लगी हैं.

बंदे ने बताया कि खेतों में जितना मटर लगा है, उससे 20 से 35 क्विंटन मटर निकलेगा. इसे उपजाने में लगभग 3 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. लेकिन अभी की स्थिति में इस 35 क्विंटल मटर की कीमत 17 से 22 हजार रुपये मिल रही है. वे कहते हैं कि अब आप ही बताइये, हम आत्महत्या न करें तो क्या करें. कुछ ऐसा ही कहना है दूसरे किसानों का.

पहले बेमौसम बारिश अब कोरोना ने रहा किसानों की जान

किसानों की मानें तो उनपर ईश्वर में दोहरी विपदा ला दी है. पहली बार तो जब खेती की शुरुआत में ही बेमौसम बरसात ने फसल बर्बाद की. उसे दवाई आदि डालकर ठीक किया, तो अब लॉक डाउन में सब्जियों को कीमत नहीं मिल रही.

सब्जी उगाने की लागत डेढ़ा हो गया और कीमत आधे से कम. वे कहते हैं कि जिस दिन हम खेत से सब्जियां तोड़ते हैं, उस दिन का खर्च भी बाजार में नहीं मिल पाता. ऐसे में खेतों में ही सब्जियां छोड़ना उपाय लग रहा है.

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सब्जी की आठ मंडियां, लेकिन कीमत कहीं नहीं

राजधानी रांची से 50 किमी के दायरे में सब्जियों की आठ मंडियां हैं. सभी मंडियां हफ्ते में दो दिन लगती हैं. नगड़ी मंडी तो तीन दिन शुक्रवार, मंगलवार और रविवार को लगती है.

सूद पर पैसे लेकर उपजायी सब्जियां,  लॉकडाउन ने बढ़ायी मुसीबत अब आत्महत्या की नौबत
लॉकडाउन की वजह से मंडी में सब्जियों के भाव नहीं मिलने से परेशान किसान.

इसके अलावा बेड़ो मंडी सोमवार और गुरुवार, रातू का काटू मंडी सोमवार और गुरुवार, ब्रांबे मंडी मंगलवार और शनिवार, बिजूपाड़ा बुधवार, इटकी शनिवार और बुधवार इसके अलावा मांडर में रविवार को बाजार लगता है. जहां किसान खेत से सब्जी निकाल कर बेचते हैं. आप समझ सकते हैं कि इन आठ मंडियों में भी किसानों को कीमत नहीं मिल रही.

बिचौलिया ले रहे किसानों की जान

लॉकडाउन की अवधि में आठ सब्जी मंडियों में 6 व्यापारी ही हैं, जो किसानों से सब्जी लेकर शहरों में बेच रहे हैं. कई किसानों ने दबी जुबान बताया कि यही 6 व्यापारी हैं, जो लॉक डाउन का पूरा लाभ उठा रहे हैं. मंडी में किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है.

आलम यह है कि व्यापारी के मन मुताबिक, कीमत पर सब्जियां नहीं देने पर सब्जियों को फेंक दिया जा रहा है. नाम नहीं छापने की शर्त पर नगड़ी, बेड़ो, बिजूपाड़ा के कुछ व्यापारियों ने फोन पर बताया कि यही मौका है, जब हमारी कमाई हो रही है.

ऐसे में क्यों न लाभ लें. वहीं एक व्यापारी का कहना है कि हमें भी मंडियों से बाजार तक ले जाना मुश्किल होता है. कोई भी मालवाहक जाना नहीं चाहता. अगर कोई जाने को तैयार होता भी है तो रास्ते में पुलिस परेशान करती है.

सरकार से ही सहारे की उम्मीद

अब किसानों को सरकार से ही एकमात्र उम्मीद है. वे कहते हैं कि फसल बर्बाद हो जाने के बाद मुआवजा देकर क्या फायदा. इससे अच्छा है कि सब्जी बाजार को मुक्त करें. सब्जी लाने ले जाने वाली गाड़ियों पर रोक न लगाये.

अभी सरकार यह कदम उठाती है तो जितनी लागत और मेहनत लगी है, वह हमें मिल जायेगी. किसानों का कहना है कि अभी की परिस्थिति में सरकार सब्जियों की लागत ही दिला दे तो मेहरबानी होगी.

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