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सरकारी शिक्षा में सुधार के लिए ग्राउंड वर्क जरूरी : एस अली

Ranchi : झारखंड का प्राथमिक शिक्षा राष्ट्रीय स्तर पर 33वां स्थान रखता है. यह राज्य के लिए शर्मनाक है. राज्य के सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ग्राउंड स्तर पर काम करना होगा. झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस अली ने विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा की बुरी स्थिति के पीछे कई वजहें हैं.

राज्य में 10 हजार उत्क्रमित मध्य विद्यालय, 17 हजार नव उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालयों में स्थायी शिक्षक नहीं हैं. राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 4 हजार और राजकीय मध्य विद्यालयों में उर्दू प्राथमिक शिक्षक के पद रिक्त हैं.

प्रारंभिक स्कूलों में आधारभूत संरचना का भी अभाव है. राज्य के 50 फीसदी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है. 40 फीसदी स्कूलों में कीचन शेड नहीं है. 35 फीसदी स्कूलों में शौचालय नहीं है. 30 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी नहीं है. 48 फीसदी स्कूलों में बिजली, खेलने का मैदान, सुरक्षा प्रहरी नहीं हैं.

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योजनायें तो बनती हैं पर कागजों पर ही सिमट जाती हैं

उन्होंने कहा कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के नाम पर कई योजनाएं बनती हैं, पर वो कागजों में ही संचालित हो रही हैं. शिक्षा सुधार के नाम पर करोड़ों की राशि का बंदरबाट अधिकारी और एनजीओ कर लेते हैं.

आज भी स्कूलों के 52 फीसदी बच्चे पढ़ना नहीं जानते, जिसका मुख्य कारण दूसरे राज्यों से प्रशिक्षण की डिग्री लेकर सरकार नौकरी कर रहे शिक्षक हैं. स्कूलों की मॉनिटरिंग करने वाले बीईओ से साठगांठ कर शिक्षक स्कूलों में छात्रों को दी जाने वाली ड्रेस व अन्य सामग्री की खरीदारी 40 फीसदी कमीशन लेकर करते हैं, जिसके कारण घटिया ड्रेस बच्चों को मिलता है.

सरकारी स्कूलों के स्तर में कैसे सुधार होगा, जब शिक्षा अधिकारी कर्मचारी और शिक्षक ही अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना तौहीन समझते हों.

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राज्य सरकार उपरोक्त मामलों में सुधार कर सरकारी शिक्षा में सुधार कर निजी शिक्षा पर लगाम लगा सकते हैं.

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