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कांग्रेस विधायकों की व्यथा- नहीं सुनते हैं अफसर, रोक देते हैं जरूरी काम

Amit Jha

Ranchi : कांग्रेसी विधायक और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. सरकार पर ब्यूरोक्रेसी के हावी होने की चिंता उन्हें सता रही है. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने में अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं. ब्यूरोक्रेट्स सरकार पर हावी हैं. इतना कि प्रोन्नति मामले में विभागीय मंत्री के तौर पर खुद सीएम हेमंत सोरेन ने रोक को हटाने का ऑर्डर दिया है. बावजूद इसके अधिकारी मंथन करने में लगे हैं. जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते रहे हैं. सरकारी अस्पतालों में खून के लिए चार्ज लेने के फैसले पर राज्य में बवाल मचा है.

इरफान के मुताबिक जिस अफसर ने इस संबंध में आदेश जारी किया है, खिलवाड़ कर रहा है. पूर्व में इस राज्य में सरकार थी. उस दौरान पदाधिकारी दिनभर में 12 घंटे बैठकर भी जनता का काम नहीं करते थे. अब हेमंत सरकार में तस्वीर बदलेगी.

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जारी है अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी का सिलसिला

ऐसा नहीं है कि पहली बार ऐसा हुआ हो जब कांग्रेसी विधायक सरकार में शामिल होने के बावजूद ब्यूरोक्रेट्स के रवैये से नाराजगी जाहिर किये हों. इसे लेकर ममता देवी, उमाशंकर अकेला, अम्बा प्रसाद, पूर्णिमा नीरज सिंह समेत कई अन्य विधायक भी दुखड़ा जाहिर करते रहे हैं. विधायक दल के नेता और मंत्री आलमगीर आलम के साथ बैठक में भी इस मसले को रखते आये हैं.

वे बात उठाते आये हैं कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनते हैं. सरकार में जब उनकी बात नहीं सुनी जायेगी तब सरकार में रहने का मतलब क्या है.

जरूरत पड़े तो सरकार को बाहर से ही सपोर्ट दिया जाये. जनप्रतिनिधियों का मान-सम्मान तो दूर की बात है, उनके साथ सही तरीके से बर्ताव भी नहीं किया जाता. क्षेत्र में अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते. पर बात सिर्फ बैठकों तक ही रह जा रही, इसका असर नहीं दिख रहा.

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अब सदन में आयेगा मसलाः विक्सल

कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने न्यूज विंग से बात करते हुए कहा कि वे इस मसले से सहमत हैं कि ब्यूरोक्रेसी को और संवेदनशील और जवाबदेह होने की जरूरत है.

फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत वन भूमि का पट्टा वन क्षेत्र में रहने वालों को दिया जाना है. केंद्र और राज्य सरकार इसके लिये गंभीर है. पर ब्यूरोक्रेसी इस पर अड़ंगा लगाए हुए है. राज्यभर में मामले फंसे पड़े हैं.

अब वे इस मसले पर सदन के जरिये सरकार का ध्यान आकृष्ट कराएंगे. ब्यूरोक्रेट्स को अपनी जिम्मेदारी निभाने में और भी गंभीरता दिखाने की जरूरत तो है.

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क्या कहते हैं ठाकुर

प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर चिंता जताते हुए कहते हैं कि एससी एसटी के प्रोन्नति मसले पर अधिकारियों की सुस्ती वाकई चिंतनीय है. ऐसे विषय पर पार्टी भी लगातार आवाज उठाती रही है.

सीएम ने अब इस पर जब आदेश दे दिया है तब भी ऐसी स्थिति का सामने आना अच्छा नहीं लगता. डबल इंजन सरकार में ब्यूरोक्रेसी लगातार कार्यपालिका पर हावी होती रही.

जनता और सरकार के बीच एक गैप होता रहा. यही कारण भी है कि अभी सरकार आपके द्वार जैसे कार्यक्रमों के जरिये प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास सरकार कर रही है. ब्यूरोक्रेसी में अगर संवेदनशीलता, कर्तव्य बोध बढ़े तो झारखंड के विकास की गति और रफ्तार पकड़े.

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