न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#Ecology_system पर ग्रेता थनबर्ग के सवालों से निकलना वैश्विक नेतृत्व के लिए चुनौती है

1,495

Faisal  Anurag

वह मात्र सोलह साल की है. उसने न केवल दुनिया भर को आंदोलित कर दिया है बल्कि अपने मासूम संबोधन से दुनिया भर के नेताओं को निरूत्तर कर दिया है. इस लड़की का नाम है ग्रेता थुम्बेर. जिसे भारत की मीडिया  ग्रेटा थनबर्ग उच्चारित करती है.

ग्रेता ने यूएन में दुनिया के 60 देशों के नेताओं के बीच यह कह कर हलचल मचा दिया कि वक्त जा चुका है जब नेतागण खोखली बाते करते थे. अब उसकी पीढ़ी किसी भी सूरत में नेताओं को माफ करेगी. उसने बेहद मासूम अंदाज में कहा, उसे अभी समंदर पार अपने स्कूल में होना चाहिए था. लेकिन आपके खोखले वायदों ने हमारे सपनों और हमारे बचपन को छीन लिया है. उसने कहा कि वह तो अब भी भग्यशाली है कि जीवित है. लेकिन बहुत से लोग हालात झेल रहे हैं और उनकी जान जा चुकी है.

इसे भी पढ़ेंः शाह और मोदी को आचार संहिता मामले में क्लीन चिट देने का विरोध करनेवाले चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी को आयकर का नोटिस

ग्रेता ने जलवायु परिवर्तन के सवाल को व्यापक संदर्भ में उठाया ओर नेताओं को बताया की मात्र बातों से समस्या का हल नहीं होगा. बल्कि उन्हें ठोस कदम उठाते हुए नीतियों में भारी बदलाव करना होगा. ग्रेता स्वीडन की रहने वाली है. और स्कूल छोड़ स्वीडन संसद के सामने धरना देकर स्वीडन की संसद और दुनिया का ध्यान खींचा.

Mayfair 2-1-2020

इसे भी पढ़ेंः क्लर्क नियुक्ति के लिए फॉर्म की फीस 1000 रुपये, कितना जायज? हमें लिखें…

स्वीडन सहित अनेक यूरोपीय देशों की संसद ने उसे आमंत्रित कर उसके विचार सुने. यूरोप के देशों की राजनीति उसके विचारों को नजरअंदाज करने की हैसियत में नहीं है. और यूएन संबोधन के बाद तो शायद दुनिया भर की राजनीतिक और औद्योगिक नेतृत्व उस नजरअंदाज कर सकता है.

Sport House

ग्रेता ने कहा कि पूरा इको सिस्टम बर्बाद हो रहा है. लेकिन आप सब केवल आर्थिक विकास और अधिक धन की बाते करते हैं. ऐसा जान पड़ता है कि राजनीतिक नेतृत्व की इसी होड़ के कारण इको सिस्टम नष्ट हो रहा हे. धरती का संकट लगातार लोगों की जान ले रहा है. ग्रेता ने कहा कि युवा पीढ़ी न तो आप को बहाना बनाने देगी ओर न ही पलायन करने.

पिछले शुक्रवार को ही दुनिया भर के 50 लाख से ज्यादा बच्चों ने जलवायु संकट के मुद्दे पर प्रश्न किया. और अगले शुक्रवार को ये संख्या और भी बढ़नी है. ग्रेता हवाई जहाज का इस्तेमाल नहीं करती हैं. वे मानती हैं कि वायुयान प्रकृति को नष्ट कर रहा है. उन्होंने समुद्र मार्ग से न्यूयार्क तक की यात्रा की है.

और समुद्र मार्ग से ही अमरीका से आस्ट्रलिया जाने वाली हैं. ग्रेता बार-बार जोर दे कर राजनीतिक नेतृत्व से वैज्ञानिकों की सलाह और चेतावनी को गंभीरता से लेने की बात करती रही हैं. यूएन संबोधन के बाद उनकी चर्चा किसी भी नेता की तुलना में दुनिया भर की मीडिया में ज्यादा हो रही है. जाहिर होता है कि जलवायु संकट के सवाल पर राजनैतिक नेतृत्व की साख बेहद कमजोर है. जब ग्रेता बोल रही थीं, मोदी भी वहां मौजूद थे.

इसे भी पढ़ेंः #KrishiAshirwadYojana: 3000 करोड़ से घटकर हुआ 2250 करोड़ का, किसानों के खाते में अब तक गए सिर्फ 442 करोड़

जाहिर है कि कि दुनिया में जलवायु बचाने का आंदोलन एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है जिसे नजरअंदाज करना किसी के लिए भी संभव नहीं है. जब ग्रेता ने कहा कि हम आपको छोड़ने नहीं जा रहे हैं. दुनिया बदल गयी है, चीजें बदलने वाली हैं. आपको इसी वक्त एक लाइन बनानी ही होगी. इस आवाज में वह आह्वान है जिसे दुनिया भर के लोग महसूस करते हैं बावजूद इसके राजनीतिक नेतृत्व के लिए अभी भी यह सवाल उनकी चुनावी जीत हार तय नहीं कर पा रहा है.

यूरोप के कुछ देशों में ग्रीन राजनीति के उभार के बाद राजनीतिक विमर्श बदलने लगा है. अब तो यह खबर भी आने लगी है कि जलवायु बदलाव का असर बड़ी कंपनियों पर भी पड़ रहा है. यूरोप में बढती गर्मी के कारण पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ है. जानकार बता रहे हैं कि 140 साल पुराने थ्रामस कुक कंपनी की बंदी और 9000 लोगों के रोजगार खत्म हो जाने के पीछे के अनेक कारणों में जलवायु बदलाव भी एक है. यह कंपनी पर्यटन उद्योग से जुड़ी है.

सवाल उठता है कि इतने संकट के बाद भी राजनीतिक नेतृत्व आर्थिक नीति में बदलाव की नहीं सोच रहा है. तेज विकास की भूख को छोड़ने और दुनिया में ज्यादा से ज्यादा धनवान होने की होड़ खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. प्रकृति और मानवता के विनाश के अनेक संहारक आयुधों से दुनिया पटी हुई है. और उसे और भी बढ़ाने की होड़ लगी हुई है. विकास के नाम पर जिस तरह प्रकृति का दोहन हुआ और हो रहा है, उसने भी इकोलॉजी को पूरी तरह से खतरनाक हालात में पहुंचा दिया है.

तय है कि खानापूरी से न तो प्रकृति बचेगी और न ही मानवता. इसे बचाने के लिए विकास की अंध प्रतिस्पर्धा को खत्म करना ही होगा. दुनियाभर के आदिवासियों ने प्रकृति की हिफाजत के लिए लंबे समय से जो कुर्बानियां दी हैं, उसकी आवाज अब दबा कर नहीं रखी जा सकती है.

इसे भी पढ़ेंः # HowdyModi: अब ई-कॉमर्स में भी अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार होगा, करते रहिये विरोध, सुनेगा कौन…

 

SP Jamshedpur 24/01/2020-30/01/2020

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like