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#GretaThunberg : 16 साल की वो बहादुर लड़की, जिसके भाषण की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही, आप भी पढ़ें

ग्रेता तुम्बैर आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. UN में जलवायु परिवर्तन के सवाल पर उनका भाषण पूरी दुनिया में चर्चा में है. दुनिया भर के राजनीतिक नेतृत्व को जिस तरह मात्र सोलह साल की उम्र में ग्रेता ने चुनौती दी, वह मामूली बात नहीं है. जब ग्रेता बोल रही थीं, तब 60 देशों के नेता वहां मौजूद थे और बगले झांक रहे थे. नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने ट्विट कर ग्रेता का मजाक उड़ाया. लेकिन कुछ नेताओं ने उसकी बातों की गंभीरता की सराहना भी की है.

ये ठीक नहीं है. मुझे यहां नहीं होना चाहिये. मुझे समंदर के उस पार अपने स्कूल में होना चाहिये. फिर भी उम्मीद से यहां आये हैं. आपकी हिम्मत कैसे हुई? आपने अपनी खोखली बातों से मेरे बचपन के सपने छीन लिये हैं. मैं फिर भी भाग्यशाली हूं. लोग परेशान हैं, मर रहे हैं, पूरा इको सिस्टम खत्म हो रहा है. हम एक महाविलुप्ति की शुरूआत हैं. ऐसे में आप सिर्फ पैसे और आर्थिक विकास के सपनों की बात कर रहे हैं. आपकी हिम्मत कैसे हुई?

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तीस साल से विज्ञान आपको सच्चाई बता रहा है. आपकी उसे अनदेखा करने की हिम्मत कैसे हुई? और फिर यहां आकर ये कहने की हिम्मत कैसे हुई कि आप काफी कुछ कर रहे हैं.

जबकि जो हल चाहिये वो अब भी कहीं दिख नहीं रहे हैं. आप कहते हैं कि आप हमें सुनते हैं. गंभीरता को समझते हैं. लेकिन आप चाहे जितने दुखी व नाराज हों, मैं आप पर यकीन नहीं करना चाहती. क्योंकि अगर आप सब कुछ समझ कर भी कुछ नहीं कर रहे तो आप शैतान हैं. मैं आप पर यकीन करने से इनकार करती हूं.

दस साल में कार्बन उत्सर्जन को आधा करने के बाद भी तापमान में बढ़ोतरी 1.5 डिग्री तक सीमित करने की संभावना सिर्फ 50 प्रतिशत है. इसके जो नतीजे होंगे वो पलटे नहीं जा सकेंगे. और इंसान के काबू से बाहर होंगे. 50 प्रतिशत आपको स्वीकार हो सकता है. लेकिन ये आंकड़ा ये नहीं बताता कि कहां-कहां हालात काबू से बाहर हो जायेंगे. जहरीली हवा के प्रदूषण से तापमान और बढ़ेगा. क्लाइमेट जस्टिस का सपना दूर हो जायेगा.

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वो मेरी पीढ़ी पर निर्भर कर रहे हैं जो उनके द्वारा पुरानी हो चुकी टेक्नोलॉजी से उत्सर्जित अरबों टन कार्बन डाईऑक्साइड अपनी सांसों में समा रहे हैं.

तो 50 प्रतिशत का खतरा हमें मंजूर नहीं है. हमें इसके नतीजों को भुगतना होगा. दुनिया के तापमान में बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री तक सिमित रखने की 67 प्रतिशत संभावना तभी तक है, जब कार्बन डाइऑक्साइड एक स्तर से ज्यादा न पहुंचे. ये स्तर एक जनवरी 2018 के लिहाज से 420 गीगा टन था. आज के हिसाब से ये 350 गीगाटन रह गया है.

आपने ये ढोंग करने की हिम्मत कैसे की कि आम दिनों की तरह काम कर और कुछ तकनीकी समाधानों से इस समस्या को सुलझा सकते हैं? आज के उत्सर्जन स्तर के हिसाब से अगले साढ़े आठ साल में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर तय मात्रा से ज्यादा हो जायेगा.

नए आंकड़ो के हिसाब से कोई समाधान या योजनाएं यहां पेश नहीं की गयी. क्योंकि ये आंकड़े आपके लिए सुविधाजनक हैं. आप अब भी इतने परिपक्व नहीं हुए हैं कि जैसा है, वैसा बताने की हिम्त कर सकें.

आप हमें छल कर रहे हैं. लेकिन युवा आपके धोखे को समझ रहे हैं. भविष्य की पीढ़ी की निगाहें आप पर हैं. अगर आप हमें नाउम्मीद करते रहेंगे तो हम आपको कभी माफ नहीं करेंगे. हम आपको जाने नहीं देंगे. हम सभी एक लकीर खींच रहे हैं. दुनिया जाग रही है, बदलाव आ रहा है, चाहे आप पसंद करें या न करें.

धन्यवाद

ग्रेता तुम्बैर के बारे में कुछ और…

स्वीडन की मामूली स्कूली छात्रा ग्रेता लंबी बीमारी की शिकार हुई. बीमारी से उबरने के लिए उन्होंने संघर्ष किया. और फिर स्कूल जाना शुरू किया. उसे महसूस हुआ कि दुनिया में जलवायु संकट पर जिस तरह टालमटोल किया जा रहा है, उससे धरती का ही विनाश हो जायेगा. एक दिन वह संसद के सामने धरना देने पहुंच गयीं. वह अकेले धरना पर बैठीं. शुरू में तो किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. लेकिन स्वीडन के एक संसद की नजर उस पर पड़ी. उसने ग्रेता का सवाल उठाया. देखते-देखते अन्य बच्चे भी ग्रेता का साथ देने पहुंच गये. फिर स्वीडन की संसद को ग्रेता के सवाल पर बहस करनी पड़ी. और उसे संसद को संबोधित करने को बुलाया गया. ग्रेता ने जिस अंदाज में सांसदों के समाने बात रखी उससे वह पूरी स्वीडन में चर्चा में आ गयीं. स्वीडन उन देशों मे एक है, जहां इकोलॉजी राजनीतिक सवाल है. और ग्रीन पार्टी प्रभावी भूमिका में है.

ग्रेता को यूरोप के अन्य देशों ने भी बुलाना शुरू कर दिया. एक दिन उसे ब्रिटिश संसद सदस्यों ने भी बोलने के लिए लंदन आमंत्रित किया. वहां उनके वक्तव्य के बाद गिअेन के पर्यावरण मंत्री को बयान देना पड़ा. और संसद के अध्यक्ष ने उसे मुलाकात के लिए बुलाया. अब तो ग्रेता दुनिया भर के बच्चों की आदर्श हैं. और जलवायु परिवर्तन का आंदोलन बड़ा रूप ग्रहण कर चुका है.

ग्रेता विमान से यात्रा नहीं करतीं. वह कहती हैं कि विमान पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुचाते हैं. वह वातानुकूलित यंत्रों का भी इसतेमाल नहीं करती हैं. UN में बोलने के लिए वे समुद्र मार्ग से अमरीका गयीं.

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