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राज्यपाल ने कहा-सबसे विशाल है ट्राइबल दर्शन, सीएम बोले- आदिवासी समुदायों की हैं पांच हजार संस्कृतियां

रांची के ऑड्रे हाउस में तीन दिवसीय "आदि-दर्शन" अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारंभ

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  • जनजातीय दर्शन (Tribal Philosophy) पर पहली बार अंतराराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन, राज्यपाल व सीएम ने किया संबोधित किया

Ranchi : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि भारत में 9 प्रकार के दर्शन हैं. इन दर्शनों में ट्राइबल दर्शन सबसे अच्छा और सबसे बड़ा दर्शन है. राज्यपाल ने ये बातें राजधानी के ऑड्रे हाउस में तीन दिवसीय “आदि-दर्शन” अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कही.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग प्रकृति की पूजा करते हैं. साथ ही, साथ पंचतत्व की पूजा करते हैं. अभी तक जनजातीय समुदायों के अध्ययन के विषय उनकी बाहरी गतिविधियों, बाह्य जगत से उनके सम्बन्धों, अपने समाज में उनके व्यवहारों तक ही सीमित रहे हैं.

विशेष तौर पर मानवशास्त्री आदिवासी समाज के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा पद्धतियों, जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों, सामाजिक संगठनों, पर्व-त्यौहारों, किस्से-कहानियों-गीतों, तथा नृत्य की शैलियों पर ही अध्ययन करते आ रहे हैं.

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आदिवासी समुदायों की 5 हजार संस्कृतियां हैं और 40 हजार भाषाएं : सीएम

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी दर्शन विषय पर पूरे विश्व में शोध कार्य चल रहे हैं. यह शोध कार्य किस तरीके से चल रहे हैं इसकी भी चर्चा निरंतर होती रही है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक मुझे जानकारी है कि पूरे विश्व के लगभग 90 देशों में 37 करोड़ आदिवासी रहते हैं. इन समुदायों की 5 हजार संस्कृतियां हैं और 40 हजार भाषाएं समाहित हैं जो सामान्य दिनचर्या में बोली जाती हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे विश्व की आबादी का 5% यानी कि पूरे विश्व में 800 करोड़ की आबादी में लगभग 40 करोड़ आदिवासी समूह के लोग शामिल हैं.

हेमंत सोरेन ने कहा कि आज यह एक बड़ी विडंबना है कि पूरे विश्व की गरीबी में 15% हिस्सेदारी आदिवासियों की ही है. आखिर ऐसा क्यों है? यह शोध का ही विषय है.

उन्होंने कहा कि प्रकृति के बदलाव के वजह से जो परिस्थिति उत्पन्न हुई है यह काफी चिंतनीय है. प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने में आदिवासी समुदाय की भूमिका सबसे अहम रही है और आगे भी रहेगी.

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अधिकारियों को अपना दायित्व निभाना ही होगा

राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सख्त लहजों में अधिकारियों को कहा है कि वे जनता के बीच जाकर उनके समस्याओं को देखेंगे. जिस अधिकारियों की जो जिम्मेवारी होगी, उसे उनको निभाना होगा.

सीएम ने यह बातें राजधानी के ऑड्रे हाउस में तीन दिवसीय “आदि-दर्शन” अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में संबोधन के बाद मीडिया से बातचीत में कहा. मु

ख्यमंत्री का यह बयान उसी कड़ी में आया है, जिसमें मुख्य सचिव डॉ डी.के.तिवारी ने सभी डीसी को सरकार आपके द्वार कार्यक्रम को लेकर निर्देश दिया है.

सेमिनार में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे, राम दयाल मुण्डा ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक रणेंद्र कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे.

जनजातीय दर्शन (Tribal philosophy) को लेकर पहली बार इस तरह का अंतराराष्ट्रीय सेमिनार (International Seminar) का आयोजन राजधानी में हुआ है.

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