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JBVNL में 15 करोड़ का घपला और घपलेबाज को संरक्षण देने वाले आईएएस राहुल पुरवार पर सरकार की चुप्पी

विधानसभा में सरकार ने इस घोटाले को स्वीकार कर लिया है

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Surjit Singh
जेबीवीएनएल यानी झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड. यहां 15 करोड़ रुपये का टीडीएस घोटाला हुआ. सरकार के अफसर पहले इससे इनकार कर रहे थे. अब विधानसभा में सरकार ने इस घोटाले को स्वीकार कर लिया है. इस घोटाले के लिए जिम्मेदार फाइनांस अफसर उमेश कुमार पर विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गयी है. खबर है कि किसी दूसरे मामले में विभाग उन्हें डिमोट भी करेगा. 15 करोड़ के घपले को लेकर सरकार ने उमेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई की है, यह सूचना अब तक सार्वजनिक नहीं है. जबकि जिस तरह से इस घोटाले को अंजाम दिया गया है, वह आपराधिक मामला है. विभाग के ही लोगों का मंतव्य है कि उमेश कुमार व अन्य पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए. आखिर कौन यह सब करने से रोक रहा है.
यह जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली झारखंड सरकार, बिजली बोर्ड, जेबीवीएनएल के सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.

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पहला- क्यों उमेश कुमार के घपले को पहले नहीं पकड़ा गया ?

दूसरा- उमेश कुमार के खिलाफ पहले क्यों कार्रवाई नहीं की गयी ?

तीसरा- जब सचिव ने जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार को लिखित आदेश दिया कि उमेश कुमार से कोई काम नहीं लिया जाये, फिर एमडी राहुल पुरवार कैसे उसे फाइनांस हेड जैसे महत्वपूर्ण पद पर काम करते रहे ?

चौथा- उमेश कुमार पर कई आरोप हैं, अफसरों ने कार्रवाई क्यों नहीं की ?

पांचवां- किसकी शह पर बिजली वितरण निगम में ऑडिट कमेटी, नोमिनेशन कमेटी जैसी कमेटियों का गठन नहीं किया गया ?

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छठा – बिजली वितरण निगम में अन्य निदेशकों (डाइरेक्टर फाइनांस, इंडीपेंडेंट डाइरेक्टर औऱ महिला डाइरेक्टर) की नियुक्ति अब तक क्यों नहीं की गयी ?

सातवां – क्या जीरो टॉलरेंस वाली सरकार को निगम में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी नहीं है या है तो चुप क्यों बैठी हुई है ?

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इन सवालों का जवाब, उतना ही दिलचस्प है, जितना की 15 करोड़ का घोटाला करने के बाद भी उमेश कुमार का बिजली वितरण निगम में महत्वपूर्ण पद पर काबिज रहना. आखिर उन अधिकारियों पर कौन और कब कार्रवाई करेगा, जिन्होंने उमेश कुमार को संरक्षण दिया. याद रहे, चारा घोटाला में अदालत ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को घोटाला करने के लिए जिम्मेदार नहीं माना है, उन्हें घोटालेबाजों को संरक्षण देने के लिए सजा मिली है. तो क्या बिजली बोर्ड के उन अफसरों, जिनमें जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार भी शामिल हैं, के खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी. क्योंकि इन्हीं अफसरों ने उमेश कुमार को संरक्षण देने का काम किया है. और इसके दस्तावेजी साक्ष्य भी उपलब्ध है. या फिर सरकार भी घोटालेबाजों को संरक्षण देने के लिए जिम्मेदार आईएएस अफसरों को संरक्षण देने का पाप करेगी. यह तथ्य है कि बिजली बोर्ड की तरफ से राहुल पुरवार को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि उमेश कुमार से कोई भी काम नहीं लेना है. फिर भी उन्होंने उमेश कुमार को महत्वपूर्ण पद पर कैसे बनाये रखा. वह भी चार सालों तक. क्या सरकार इन चार सालों तक उमेश कुमार द्वारा किये गये कामों की जांच करायेगी.

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तथ्य है कि महालेखाकार ने 30 जुलाई 2015 को उमेश कुमार के प्रमोशन को लेकर आपत्ति जतायी थी. 10 नवंबर 2016 को प्रमोशन देने की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनायी गयी. कमेटी ने महालेखाकार की रिपोर्ट को सही ठहराया और निष्कर्ष दिया कि उन्हें डिमोट किया था. गौर करें कि राहुल पुरवार जेबीवीएनल के एमडी 12 फरवरी 2015 से अब तक हैं. साफ है कि उनके कार्यकाल में ही महालेखाकार ने आपत्ति जतायी, कमेटी ने आपत्तियों को सही ठहराया. इसके बाद भी राहुल पुरवार ने उमेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

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