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प्रधानमंत्री के दावे को गलत साबित कर रहा है सरकार का ही आंकड़ा

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Faisal Anurag

नरेंद्र मोदी के ट्वीट और अमित शाह के बयान के बाद यह बहस तेज हो गयी है कि भारत में कितने एयरपोर्ट हैं. और भारत में घुसपैठियों की वास्तविक संख्या कितनी है. नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा है कि भारत में 100 एयरपोर्ट हैं. इसमें से 35 पिछले चार सालों में बने हैं. प्रधानमंत्री का यह दावा सिविल एविएशन की वेबसाइट पर मौजूद सूचना से मेल नहीं खाती है. सिक्किम के पहले एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री के दावे को लेकर विभिनन माध्यमों में उनकी आलोचना की जा रही है. चार सालों में 35 एयरपोर्ट कहां-कहां बने हैं, इसकी विस्तृत सूचना नहीं दी गयी है.

सिविल एविएशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2013-14 में भारत में करीब 125 एयरपोर्ट थे. इसी विभाग की 2017-18 के वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 129 एयरपोर्ट हैं. इसका मतलब साफ है कि 2014 में भारत में 125 एयरपोर्ट क्रियाशील थे. जबकि 2018 में उनकी संख्या 129 है. इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार सालों में एयरपोर्ट की संख्या मात्र चार बढ़ी है. इस सरकारी रिपोर्ट के उलट प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि पिछले चार सालों में 35 एयरपोर्ट बने हैं.

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या तो सिविल एविएशन का दावा गलत है या फिर प्रधानमंत्री संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करते हुए, पिछली सभी सरकारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, उनकी पूरी सरकार और भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि आजादी के बाद से 2014 तक की सभी सरकारों को निकम्मा बता दिया जाए. यह दावा ही गलतबयानी है, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के शब्दों में इस तरह का दावा देश का अपमान है. स्व. वाजपेयी ने यह बात संसद में एक बहस के दौरान कही थी. उन्होंने कहा था कि हम विपक्ष में हैं, इसका मतलब यह नहीं कि भारत की तमाम उपलब्धियों को नकार दिया जाए और पूर्ववर्ती सरकारों पर आरोप लगाए जाएं.

पिछले चार सालों से ही पिछले 70 सालों की चर्चा की जा रही है. और पूर्ववर्ती तमाम सरकारों को दोषारोपित करने का सुनियोजित अभियान चलाया गया है. इस प्रक्रिया में ऐतिहासिक तथ्यों और वास्तविक आकड़ों के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है. पाकियोग एयरपोर्ट जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया उसके बारे में भी इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस एयरपोर्ट की शुरुआत यूपीए सरकार के समय 2012 में की गयी थी और इसका 2014 के मार्च तक 82 प्रतिशत कार्य हो चुका था. लेकिन शेष 18 प्रतिशत कार्य होने में साढ़े चार साल लग गए.

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मोदी सरकार इस तथ्य को नकार कर इसका पूरा श्रेय ले रही है. विकास और निर्माण की प्रक्रिया हमेशा एक गति में चलती है. और भारत में देखा गया है कि सरकारों के बदल जाने के बाद भी उसकी गति बनी रहती है. इसमें कभी तेजी आती है, तो कभी धीमापन आता है. लेकिन योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया शायद ही कभी बाधित होती है. लेकिन श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा में इस तथ्य को नकार देने का प्रचलन तेज हो गया है. दिलचस्प बात तो यह है कि इसके लिए झूठे तथ्यों और तर्को का खुलेआम सहारा लिया जा रहा है. शासक यह सोचते हैं कि वे जो कुछ भी कहते हैं, उसे जनता सच मान ही लेगी. इसलिए बिना तथ्यों की परख किए भी गलतबयानी आम हो गयी है.

चुनावों को ध्यान में रखकर की जा रही बातों में इतिहास को ही नकार देने का बोध जाहिर होता है. देखा जा रहा है कि भाजपा की सरकारों में अधिकांश दावे तथ्यों की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहे हैं. इसी कारण जीडीपी के आंकड़ों को लेकर भी विवाद है और अर्थशस्त्र के जानकारों का बड़ा समूह सरकार के दावों पर भरोसा नहीं कर रहा है. रोजगार संबंधी आंकड़ों के बारे में भी यही स्थिति है. यहां तक की बैंकों के एनपीए को लेकर भी सरकार जो दावे करती है, उसे लगातार चुनौती दी जा रही है. और रिजर्व बैंक के आंकड़ें और सरकार के दावे अलग-अलग दिख रहे हैं.

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लाल किले से एक साल पहले अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के बाद जिस 3 लाख करोड़ कालेधन के पकड़ें जाने की बात की थी, उसे रिजर्व बैंक का ही आंकड़ा गलत साबित कर चुका है.

भाजपा के अध्यक्ष ने दावा किया है कि भारत में 100 करोड़ घुसपैठिये हैं, जिन्हें देश से निकाल दिया जाएगा. क्योंकि वे देश को दीमक की तरह बर्बाद कर रहे हैं. जनगणना विभाग के अनुसार भारत की कुल आबादी करीब 130 करोड़ हैं और शाह दावा कर रहे हैं कि इसमें 100 करोड़ घुसपैठिए हैं. तो क्या भारत में घुसपैठियों का ही बहुमत है. 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने जिन मुद्दों को चुनावी अभियान बनाने की प्रक्रिया तेज की है, उसमें घुसपैठियों का मुद्दा भी है. भाजपा को उम्मीद है कि यह मुद्दा ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज करेगा, साथ ही इससे सरकार की विफलता और राफेल जैसे भ्रष्ट्राचार के उठ रहे सवालों को भी दरकिनार किया जा सकता है. शाह को पता है कि भारत की आबादी का तीन-चौथाई हिस्सा घुसपैठिये नहीं है, बावजूद इसके वे जानबूझ कर इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री अपने संबोंधनों में जिस 125 करोड़ की ताकत का अक्सर उल्लेख करते हैं भाजपा के अध्यक्ष उनमें ही 100 करोड़ को घुसपैठिया बता रहे हैं. प्रधानमंत्री भी विदेश में दिये अपने एक भाषण में कह चुके हैं कि भारत के 600 करोड़ मतदाओं ने उन्हें वोट दिया है. अब आप या तो इन आंकड़ों को मान लीजिए या फिर अपना सिर धुनिए.

(लेखक न्यूज विंग के वरिष्ठ संपादक हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

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