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विपक्ष के सवाल पर सरकार का जवाब- कोरोना काल में कितने मजदूरों की जान गयी आंकड़ा उपलब्ध नहीं

New Delhi : संसद का मॉनसून सत्र के शुरू होने के साथ ही विपक्ष ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को घेरा है. विपक्ष की ओर से सवाल पूछा गया कि कोरोना संकट और लॉकडाउन की अवधि में कितने मजदूरों की मौत हुई है. सरकार ने जवाब में कहा है कि उसके पास मजदूरों की मौत का आंकड़ा नहीं है.

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हजारों मजदूरों की मौत की खबरें मीडिया में आयी थी

गौरतलब है कि लॉकडाउन लगाने के बाद से ही हजारों प्रवासी मजदूर देश के विभिन्न शहरों में अपने परिवार के साथ फंस गए थे. ये मजदूर बहुत ही बुरे हालात में जैसे तैसे जिंदगी काट रहे थें. फिर जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गयी तो मजदूर अपने शहरों, कस्बों की ओर लौटने लगे. कई मजदूरों ने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल तय की. मीडिया की खबरों में बताया गया था कि हजारों मजदूरों की मौत कोरोना काल में हुई. कईयों की भूख से, कुछ सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल करने की वजह से.

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विपक्षी सांसदों ने उठाया मजदूरों की मौत का मामला

संसद के मॉनसून सत्र में इन्हीं सवालों को  विपक्ष की ओर से उठाया गया. इस बार लिखित तरीके से सवाल पूछे जा रहे हैं. कोरोना संकट काल और लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों पर काफी संकट आया था, सरकार से इसी मसले पर सवाल पूछा गया. विपक्ष के कुछ सांसदों ने प्रवासी मजदूरों की मौत के आंकड़े की जानकारी मांगी, जिसपर सरकार ने कहा कि उनके पास ऐसा डाटा नहीं है.

जो सवाल उठाये गए उनमें पूछा गया कि सरकार प्रवासी मजदूरों के आंकड़े को पहचानने में गलती कर गई, क्या सरकार के पास ऐसा आंकड़ा है कि लॉकडाउन के दौरान कितने मजदूरों की मौत हुई है क्योंकि हजारों मजदूरों के मरने की बात सामने आई है. यह भी पूछा गया कि क्या सरकार ने सभी राशनकार्ड धारकों को मुफ्त में राशन दिया है ? लिखित सवाल में यह भी पूछा गया है कि कोरोना संकट के दौरान सरकार ने क्या कदम उठाए.

सरकार ने कहा एक देश के रूप में लड़ी कोरोना के खिलाफ लडा़ई

इन सवालों का जवाब केंद्र सरकार की ओर से मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लिखित में दिया है. सरकार की ओर से कहा गया कि भारत ने एक देश के रूप में कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. मजदूरों की मौत के संबंध में सरकार का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई डाटा नहीं है.

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राशन के मसले पर सरकार ने जानकारी दी है कि राज्यवार आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. सरकार 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अतिरिक्त चावल या गेहूं तथा एक किलो दाल उपलब्ध करा रही है. इसे नवंबर 2020 तक उपलब्ध कराया जायेगा. साथ ही लॉकडाउन के वक्त गरीब कल्याण योजना, आत्मनिर्भर भारत पैकेज, EPF स्कीम जैसे लिए गए फैसलों की जानकारी भी दी गई है.

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