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सरकार की एंबुलेंस सेवा व्यवस्था लचर

कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से हो जाती है मरीज की मौत

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Ranchi: पूरे तामझाम के साथ झारखंड के स्थापना दिवस पर एबुंलेस सेवा की शुरुआत की गई थी. जिसमें राज्य में कुल 329 एंबुलेस चलाये जाने की योजना थी. मौजूदा वक्त में 256 एंबुलेस का संचालन किया जा रहा है. लेकिन समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार के वायदे उस वक्त धरे के धरे नजर आते हैं, जब कोई पिता अपने पुत्र को कंधे पर, कोई गरीब बाप अपने बेटे को ऑटो में तो कोई अपने बहू-बेटी, बहन को ठेले में लेकर अस्पताल लेकर पहुंचता है.

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बीते दिनों भी एक ऐसा ही मामला सामने आया, जब चाईबासा के तिरला गांव के रहने वाले दूरजों कुई अपने बेटे और बहू को ठेले में लादकर अस्पताल पहुंचे. दुरजों का कहना है सरकार द्वारा चलाई जा रही 108 एंबुलेंस सेवा की उन्हें जानकारी ही नहीं है. राज्य के सुदूर क्षेत्रों में ऐसे सैकडों दूरजों मिल जायेंगे जिन्हें इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है. ऐसे में समय पर मरीजों को अस्पताल नहीं पहुचांये जाने के कारण कई बार उनकी मौत भी हो जाती है. बीते 10 सितंबर को भी एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया था, जिसमें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने की वजह से बच्चे की मौत हो गई थी. ऐसे और भी कई मामले हैं.

एंबुलेस सेवा से ग्रामीण अब भी महरुम

स्वास्थ्य हब बनाने और प्रत्येक व्यक्ति को निरोग बनाने का दावा करने वाली सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते है. जिस योजना को पूर राज्य के लिए लागू किया गया था, वह सिर्फ चुंनिंदा शहरों तक ही सिमट कर रह गयी है.

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ग्रामीण जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरुरत है, वे तो आज भी उसी बदहाली में अपना जीवन काट रहे हैं. विज्ञापन के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करने वाली सरकार जन-जन को जागरुक करने में भी विफल रही है. ग्रामीण और सुदूर ईलाकों के लोगों को आज भी 108 के बारें पूर्ण जानकारी नहीं है.

कई गांवों में एंबुलेंस सेवा ही नहीं

राज्य की सवा तीन करोड़ जनता के लिए 329 एंबुलेस चलाए जाने की योजना थी. जबकि अबतक 256 एंबुलेंस चलाया जा सका है. प्रति एक लाख की अबादी पर एक एंबुलेंस दिया गया था. कई ऐसे गांव है, जहां की अबादी एक लाख से काफी कम है. इन गांवों में 108 की एंबुलेंस सेवा का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. गांव के लोग शहर से एंबुलेंस के आने का इंतजार करते है. तबतक काफी देर हो जाती है.

एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सिर्फ दस

राज्य भर में 47 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस संचालित होने थे. अभी इनमें से दस का ही संचालन हो रहा है. ये सभी नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) के हैं. सभी एएलएस एंबुलेंस नेशनल तथा स्टेट हाइवे पर तैनात किये जाने थे. ताकि सड़क दुर्घटना में घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाया जा सके. लेकिन इसकी कार्य रफ्तार काफी धीमी है.

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रिम्स के गैराज में पड़े रहते हैं एंबुलेंस

रिम्स के गैराज में पड़ा एंबुलेंस

इधर राज्य के सबसे बडे़ अस्पताल रिम्स के एंबुलेंस का प्रयोग ही नहीं होता. रिम्स के एंबुलेंस गैराज में पड़े रहते है. दो एंबुलेंस तो पड़े-पड़े सड़ गए. वहीं सांसद द्वारा दिया गया सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कार्डियेक एंबुलेंस भी यदा-कदा ही वीआईपी की सेवा के लिए निकाली जाती है.

विभिन्न जिलों में मौजूद एंबुलेंस की संख्या

जिला          संख्या
रांची            22
पू.सिंहभूम    20
पलामू          18
प.सिंहभूम    14
देवघर         14
दुमका         13
गढ़वा          14
हजारीबाग   13
गिरिडीह     15
गोड्डा          14
सरायकेला  13

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साहेबगंज   10
गुमला        09
पाकुड़       09
धनबाद      10
बोकारो      12
रामगढ़       07
लातेहार      06
सिमडेगा     06
लोहरदगा     04
जामताड़ा     04
कोडरमा      02
खूंटी            02
चतरा           03
कुल            254

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