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टेक्सटाइल उद्योग के लिए झारखंड सरकार की नीतिः एक करोड़ लगाओ, चार करोड़ पाओ

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  • अरविंद मिल्स, ओरिएंट क्राफ्ट, किशोर एक्सपोर्ट और अन्य ने लगायी इकाई, प्रोडक्शन शुरू
  • कोयंबटूर, त्रिशुर और कांजीवरम सिल्क हब की तरह झारखंड में विकसित होगा टेक्सटाइल हब
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Deepak

Ranchi: झारखंड सरकार ने साल 2016 में टेक्सटाइल नीति बनायी. इस नीति के तहत एक लगाओ, चार पाओ का फार्मूला सेट किया गया है. इसके तहत यदि कोई उद्यमी एक करोड़ रुपये निवेश करता है तो उसे कर्मियों के वेतन इत्यादि मद में चार करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकार देगी. टेक्सटाइल नीति के तहत यहां स्थापित होनेवाली कंपनियों को रोजगार सृजन सब्सिडी देना शुरू कर दिया है. जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या रोजगार सृजन सब्सिडी देकर यहां के नौजवानों को रोजगार दिलाया जा सकता है. इस नीति के तहत निवेश करनेवाली कंपनियों की पौबारह हो गयी है. जहां दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में संयंत्र लगाने पर कामगारों को अधिक वेतन देना पड़ रहा था, वहीं यहां उद्योग लगाने पर कंपनियों को काफी कम दर पर कामगार मिल जा रहे हैं. राज्य सरकार की सब्सिडी के बाद उन्हें एक-दो हजार रुपये ही वेतन मद में देना पड़ रहा है. इन कंपनियों को जमीन भी काफी कम कीमत पर किश्तों में उपलब्ध कराया जा रहा है.

कई और कंपनियां झारखंड आने को लालायित हैं

झारखंड की राजधानी में ओरिएंट क्राफ्ट, अरविंद मिल्स, शाही एक्सपोर्ट्स, लगूना और किशोर गारमेंट्स ने उत्पादन शुरू कर दिया है. इनके अलावा कई और कंपनियां झारखंड में आने को ललायित हैं. ओरिएंट क्राफ्ट राजधानी के इरबा में कार्यरत है. यहां पर शाही एक्सपोर्ट्स और किशोर गारमेंट्स की इकाइयां भी शुरू हुई हैं. अरविंद मिल्स ने नामकुम के रामपुर के पास उत्पादन इकाई शुरू की है. अरविंद मिल्स की तरफ से राज्य में चार सौ करोड़ रुपये के निवेश की बातें कही गयी हैं. इसमें 10 हजार युवक-युवतियों को रोजगार दिये जायेंगे. जानकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इतनी अधिक संख्या में कंपनियों के आने से झारखंड में औद्योगिक असंतुलन भी पैदा हो सकता है. जितनी अधिक कंपनियां आयेंगी सब्सिडी भी उतनी बड़ी मात्रा में देनी होगी. क्या सिर्फ रोजगार सृजन के लिए इतनी अधिक रियायत देना राज्य हित में है.

टेक्सटाइल नीति में कई और रियायत देने की भी है बात

उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकार की तरफ से एक उद्योग की स्थापना पर उन्हें शेड निर्माण तथा अन्य के लिए छूट दी जायेगी. खरीदी गयी जमीन की लागत को पांच सालों में भुगतान करने की छूट देने की बातें कही गयी हैं. इनके अलावा कर्मियों के कौशल विकास के लिए प्रति व्यक्ति 13 हजार रुपये भी दिये जायेंगे. सरकार की तरफ से सात वर्षों तक बिजली भुगतान में छूट दिये जाने, जीएसटी, एक्सपोर्ट नीति के तहत निर्यात प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने की सुविधाएं दी गयी है.

शुरुआत में सरकार को है घाटा

सरकार का मानना है कि झारखंड में सिल्क टेक्सटाइल्स के भावी बाजार की संभावनाओं को देखते हुए यह रियायत दी जा रही है. इससे सरकार को ही घाटा है. इसके लिए सरकार बजट में भी अलग से प्रावधान कर रही है. झारखंड में टेक्सटाइल बाजार को बढ़ावा दिये जाने के लिए निवेशकों को त्रिशूर, कोयंबटूर, कांजीवरम सिल्क बाजार की तरह टेक्सटाइल हब बनाने की कोशिश की जा रही है.

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क्या कहते हैं जेसिया के अध्यक्ष

झारखंड लघु औद्योगिक संघ (जेसिया) के अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि सरकारी नीति के तहत उद्योगों को रियायत देना लाजिमी है. उन्होंने कहा कि सरकार की टेक्सटाइल नीति के तहत दी जा रही प्रोत्साहन राशि अच्छी है. इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे. उन्होंने कहा कि अन्य उद्योगों को भी सरकार की तरफ से बिक्री कर, इनपुट टैक्स, जीएसटी, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में छूट दी जा रही है.

उद्योगों का विकास राज्य हित में जरूरी : संयुक्त सचिव

राज्य के उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव आलोक कुमार ने कहा है कि रियायतों से उद्योगों का विकास होगा. इससे यहां के पढ़े-लिखे युवाओं का पलायन भी रुकेगा. झारखंड में पलायन एक बड़ी समस्या है.

          किस इकाई ने कितना दिया रोजगार

ओरिएंट क्राफ्ट1500-2000
अरविंद मिल्स1000
शाही एक्सपोर्ट्स1000 – 1500
अन्य इकाइयां1500 – 2000

 

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