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पंचायतों में सोलर एनर्जी वाटर स्कीम की जांच करायेगी सरकार, प्रावधानों को किया गया है दरकिनार

डीडीसी को सौंपी गयी है जांच की जवाबदेही, कार्रवाई का भी निर्देश

Ranchi :  राज्य में पंचायतों में सोलर एनर्जी वाटर स्कीम की जांच सरकार करायेगी. 14वें वित्त से अलग-अलग पंचायतों में सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं पर काम हुआ था. इसके जरिये पंचायतों की प्यास बुझाने की पहल हुई थी. पर धरातल पर इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा था. इसमें कई स्तरों पर गड़बड़ियों की शिकायतें मिली थी. ऐसे में ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज) ने सोलर एनर्जी वाटर स्कीम की जांच कराने का फैसला किया है. इस संबंध में विभाग ने सभी डीडीसी को जवाबदेही सौंपी है. जांच के बाद समुचित कार्रवाई का निर्देश भी दिया है.

ऐसे हुई हैं गड़बड़ियां

विभाग के अनुसार सौर उर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं का निरीक्षण पिछले दिनों किया गया था. इसमें कई स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आय़ी हैं. योजना के लिये खरीदी गयी सामग्रियों के लिये लाभुक समिति को भुगतान किये जाने की बजाय सीधे वेंडर को किया गया है. यह नियमों के खिलाफ है. एक योजना के मेटेरियल को दूसरी स्कीम में अवैध तरीके से यूज किया गया है. वेंडर, लाभुक समिति को निर्धारित दर से ज्यादा का भुगतान किया गया है.

 

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3,84,691 का प्राक्कलन बनाये जाने के बाद वेंडर या लाभुक समिति को नियम विरुद्ध तरीके से 2,80,000 से लेकर 3,20,000 रुपये तक का पेमेंट कर दिया गया है. यह भुगतान केवल मेटेरियल पर ही हो गया है जबकि मजदूरी का भुगतान किया ही नहीं गया है. सोलर एनर्जी वाटर स्कीम में निर्धारित एस्टीमेट में से अगले पांच सालों के लिये मेंटेनेंस के तौर पर 64 हजार रुपये रखने हैं. इसी तरह लगभग 40 हजार रुपये मजदूरी मद में खर्च किये जाने का प्रावधान है पर इसमें धांधली की गयी है.

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स्कीम में लिये गये मेटेरियल पर कोई वारंटी नहीं दी गयी है. स्कीम की वेटिंग पेयजल विभाग के इंजीनियर से नहीं करायी गयी है. मजदूरी भुगतान का भी रिकॉर्ड नहीं मिला है. योजना का क्रियान्वयन एवं सामग्री की क्वालिटी प्राक्कलन के हिसाब से नहीं है. मापी पुस्तिका में की गयी इंट्री भी स्पष्ट नहीं है. साथ ही इसे संबंधित बीडीओ कार्यालय से निर्गत नहीं किया गया है.

दर्ज होगी एफआईआर

पंचायती राज निदेशक आदित्य रंजन ने सभी डीडीसी से कहा है कि वे सोलर एनर्जी वाटर स्कीम प्रोग्राम में पायी गयी कमियों की जांच करें या करवाएं. स्कीम में गडबड़ी करने वाले मुखिया, पंचायत सचिव, बीडीओ, इंजीनियर औऱ लाभुक समिति के अध्यक्ष और वेंडर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के साथ-साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को भी कहा है. साथ ही अगर कहीं निर्धारित राशि से ज्यादा पैसे का भुगतान किया गया हो तो उसकी भी वसूली की जाय. जिन बिंदुओं पर गड़बड़ियां पकड़ी गयी हैं, उसके ऑडिट का काम डीएलएफए को दिये जाने का भी निर्देश दिया है.

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