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मेडिकल प्रोटेक्शन के नाम पर डॉक्टरों को मर्डर करने का लाइसेंस देगी सरकारः मोर्चा

जनस्वास्थ्य अभियान संर्घष मोर्चा ने की प्रेस वार्ता

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Ranchi: झारखंड सरकार की ओर से हिंसा एवं संपत्ति नुकसान निवारण विधेयक 2017,  मेडिकल प्रोटेक्शन  बिल के विरोध में जनस्वास्थ्य अभियान संर्घष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रेस वार्ता की. इस दौरान टीएसी (ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल) सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि विधेयक को 2013 से लाने की तैयारी की जा रही है. 2013 में भी मोर्चा ने इसका विरोध किया था. अब 2017 से इसे लागू करने की योजना चल रही है. जो पूरी तरह से डॉक्टरों के हित में है. राज्य में पहले से डेढ़ सौ कानून सजा देने के लिए हैं. ऐसे में राज्य में मेडिकल प्रोटेक्शन बिल लाने की क्या जरूरत है. ऐसा लगता है कि सरकार डॉक्टरों को लोगों का मर्डर करने का लाइसेंस देगी.

डॉक्टरों के हित में बिल

मोर्चा के संयोजक नदीम खान ने कहा कि बिल पूरी तरह से डॉक्टरों के हित में है. बिल में स्पष्ट लिखा गया है कि किसी भी संस्थान में हिसंक घटना होने पर, दोषी मरीज या उसके परिजनों को तीन साल की कैद व अन्य सजा दी जा सकती है. ऐसे में सोचने वाली बात है कि राज्य में पहले से स्वास्थ्य सुविधाएं पस्त हैं. उपर से अगर किसी संस्थान में परिजन हंगामा करते है तो कहीं न कहीं डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की इसमें गलती हो सकती है. इस पर सरकार ध्यान न देकर डॉक्टरों को सुरक्षित कर रही है.

सिस्टम ठीक करें सरकार

वक्ताओं ने कहा कि सरकार को चाहिये कि बिल को छोड़ स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक करे. ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पाता. अस्पतालों में मोटी फीस ली जाती है. जिस पर सरकार कोई नकेल नहीं कसती. राज्य का स्वास्थ्य ग्राफ काफी नीचे जा चुका है. सरकार इसे ठीक करने के बजाय बिल पास करने में लगी है.

मंत्री और अधिकारी नहीं करते गांव का भ्रमण

अभिजीत दत्ता ने कहा कि राज्य में मंत्री और अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण ही नहीं करते. ऐसे में उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी कैसे होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती नहीं. और मंत्री और अधिकारी को इस संबध में पत्र सौंपने से वे कुछ करते नहीं. उन्होंने कहा कि मंत्री और अधिकारी सिर्फ कुर्सी तोड़ने का काम कर रहे हैं.

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