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सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को देगी 200 ml दूध

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  • फिलहाल रेडी टू ईट फूड पैकेट और अंडा दिया जाता है बच्चों को
  • राज्य भर में हैं 40 हजार आंगनबाड़ी केंद्र

Ranchi : झारखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों में जानेवाले बच्चों को अब दो सौ मिलीलीटर दूध दिया जायेगा. इसके लिए झारखंड राज्य दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड द्वारा उत्पादित मेधा दूध लिये जाने की प्रक्रिया चल रही है. राज्य के महिला और बाल विकास विभाग और डेयरी विभाग की तरफ से इसको लेकर कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है. जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी लेकर इसे पूरे राज्य भर में वितरण को लेकर लागू कर दिया जायेगा. राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे आते हैं. एक-एक केंद्र पर 25-25 बच्चों के आधार पर दूध का पैकेट दिये जाने की योजना तैयार की जा रही है. समाज कल्याण निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि जल्द ही इस योजना को अमली जामा पहना दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि दूध को समुचित पौष्टिक आहार के रूप में लिया जा रहा है. इससे केंद्रों तक और बच्चों के पहुंचने का सिलसिला भी बढ़ेगा. ग्रामीण क्षेत्र के केंद्रों के लिए इसका व्यापक असर भी होगा.

राज्य भर में हैं 40 हजार आंगनबाड़ी केंद्र

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झारखंड में 40 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं. सरकार की तरफ से इन केंद्रों को प्री स्कूलिंग केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इन केंद्रों पर पहुंचनेवाले बच्चों को सरकार की तरफ से रेडी-टू-ईट फूड पैकेट्स भी दिये जाते हैं. सरकार की ओर से सप्ताह में तीन दिनों तक अंडा भी फिलहाल दिया जा रहा है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2019 तक ही अंडे की आपूर्ति किये जाने का कार्यादेश तमिलनाडु की कंपनी किसान पोल्ट्री इंडस्ट्रीज को दिया गया है. सरकार अंडे की जगह दूध को वैकल्पिक और पौष्टिक आहार के रूप में देख रही है. सरकार की तरफ से आंगनबाड़ी केंद्रों तक पौष्टिक आहार का पैकेट उपलब्ध कराने के लिए 600 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, वहीं अंडे की खरीद में 60 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. दो सौ मिलीलीटर दूध की खपत से सरकार को एक बड़ी धनराशि की बचत होने की उम्मीद भी है.

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