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कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों को रेगुलर करने में आगे बढ़ी सरकार, विभागों से कर्मचारियों का मांगा गया ब्यौरा

2.50 लाख कर्मियों का संवरेगा भविष्य, 2 नवंबर को हाइ लेवल कमिटी की प्रोजेक्ट भवन में होगी बैठक

Ranchi. राज्य सरकार कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों के मामले में स्टेप बाइ स्टेप आगे बढ़ रही है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में सभी विभागीय अधिकारियों, डिवीजनल कमिश्नरों औऱ डीसी को लेटर लिखा है.

कार्मिक सचिव अजय कुमार सिंह ने पिछले सप्ताह (पत्रांक15, मु मं स-09-01/2020, का-5353) लेटर जारी करते हुए संबंधित पदाधिकारियों से अनुबंध/संविदा पर कार्यरत कर्मियों के मामले में सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है. अब इस मसले पर 2 नवंबर को सभी विभागीय प्रतिनिधियों के साथ प्रोजेक्ट भवन में बैठक होनी है.

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विकास आयुक्त के साथ हो चुकी है बैठक

जारी लेटर में कहा गया है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों के मसले पर 25 सितंबर, 2020 को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. विकास आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, कार्यालयों में कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत कर्मियों के बिंदु पर चर्चा हुई थी. उनकी सेवा शर्तों में सुधार और नियमितीकरण पर विचार किया जाना है. इस पर प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाये.

कई बिंदुओं पर की गयी है सूचना की मांग

कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से कर्मियों की संख्या औऱ अन्य जानकारियां निर्धारित फॉर्मेट में मांगी है. इसमें कर्मियों की नियुक्ति में अपनायी गयी प्रक्रिया, सेवा शर्त, सेवा अवधि, मानदेय का ब्योरा मांगा गया है. कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या अन्य किसी महत्वपूर्ण आदेश जारी किये जाने की भी जानकारी मांगी गयी है.

सबों को कर्मियों से संबंधित सभी वांछित बिंदुओं से जुड़ा प्रतिवेदन देने को कहा गया है.

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अनुबंध कर्मियों के मामले में एकरूपता की पहल

अनुबंध पर कार्यरत कर्मियों की सेवा में एकरूपता लाने का प्रयास सरकार का है. इसके लिए सीएम हेमंत सोरेन ने एक उच्च स्तरीय समिति गठन के प्रस्ताव अगस्त माह में दिया था. समिति के प्रमुख विकास आयुक्त हैं जबकि कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के प्रधान सचिव को इसका सदस्य सचिव बनाया गया है.

यह समिति सरकार के विभिन्न विभागों, कार्यालयों में अनुबंध-संविदा पर कार्यरत कर्मियों और उनके कार्यों से संबंधित सेवा शर्तों, अवधि और मानदेय की राशि आदि में समानता लाने के लिए रिपोर्ट देगी.

हालांकि इस समिति के प्रारूप पर झारखंड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ सहमत नहीं है. संघ के संयुक्त सचिव सुशील पांडेय ने समिति में संघ के टॉप के कुछ लोगों को प्रतिनिधित्व देने की मांग सीएम से की है. संघ का कहना है कि अनुबंध कर्मियों की समस्याओं को वे समिति के सामने ठोस तरीके से रख सकेंगे. समिति कब तक अपनी रिपोर्ट देगी, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है जो चिंताजनक है.

राज्य बनने के बाद से ही है समस्या

गौरतलब है कि वर्ष 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से ही राज्य में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों, डेली वेजेज कर्मियों के मामले में सवाल उठता रहा है. अलग अलग विभागों में 12000 से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं. इसके अलावे सहायक पुलिसकर्मी, मनरेगा, पारा टीचर औऱ अन्य विभागों में कार्यरत कर्मियों को जोड़ दें तो संख्या लाखों में पहुंच जायेगी.

अनुबंध कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष महेश सोरेन के अनुसार संघ के बैनर तले 40 संगठन हैं. इनसे तकरीबन ढाई लाख कर्मी जुड़े हुए हैं. संघ के अलावे बड़ी संख्या में 14वें वित्त के कर्मी, जलसहिया, स्वास्थ्य कर्मी, पंचायत स्वयंसेवक और अन्य भी हैं जिन्हें सरकार से मदद की आस है.

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