JharkhandNationalRanchi

लोकतांत्रिक ढंग से उठायी गयी आवाज को दबाना चाहती है सरकार : झारखंड नागरिक समाज

Ranchi: महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा फादर स्टेन स्वामी के आवास पर की गयी छापामारी को लेकर झारखंड में विभिन्न विषयों पर कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की आलोचना की है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पत्र जारी कर कहा है कि हम फादर स्टेन स्वामी के साथ है. कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में सरकार की तानाशाही नीति एवं सत्ताधारी दल की आलोचना करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों के घरों पर पुलिस के छापों से हतप्रभ एवं आहत हैं. सुधा भारद्वाज, वेरनन गोऩ्साल्विस, गौतम नवलखा, वरवर राव, अरुण फरेरा एवं अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से सरकार उन लोगों को आतंकित करने का प्रयास कर रही है, जो वंचितों के न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं एवं उनकी आवाज हैं.

इसे भी पढ़ें – कांके में बने 18 करोड़ के स्लॉटर हाउस पर लगा ग्रहण, कभी भी बोरिया-बिस्तर बांध गुल हो सकती है संचालक कंपनी

पुलिस का छापा बेहद आपत्तिजनक

झारखंड के जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी के आवास पर पुलिस का छापा बेहद आपत्तिजनक है. स्टेन लगातार राज्य के आदिवासियों एवं मूलवासियों के हक में आवाज उठाते आये हैं. उन्होंने विस्थापन, कॉर्पोरेट द्वारा संसाधनों की लूट और विचाराधीन कैदियों की स्थिति पर शोधपरक काम किया है. वे झारखंड की भाजपा सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी कानून एवं भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 में हुए जन विरोधी संशोधनों का लगातार मुखरता से विरोध करते आये हैं. उन्होंने सरकार द्वारा गांवों की जमीन को लैंड बैंक में डालकर कॉर्पोरेट के हवाले करने की भी जमकर मुखालफत की है. वे लगातार संविधान की पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के क्रियान्वयन के लिए भी अभियान करते आये हैं. हम स्टेन को विशेषकर एक सज्जन, ईमानदार और जन-हित में काम करने वाले इन्सान के रूप में जानते हैं. हमारे मन में उनके लिए और उनके काम के लिए सर्वोच्च सम्मान है.

इसे भी पढ़ें – धनबाद जेल की सुरक्षा प्रशासन के लिए चुनौती, गैंग्स के मुलाकातियों पर पुलिस की नजर

सारी प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग की गयी

28 अगस्त को सुबह 6 बजे रांची के नामकुम स्थित बगईचा परिसर पर महाराष्ट्र एवं झारखंड पुलिस द्वारा छापा मारा गया था. पुलिस ने स्टेन स़्वामी का मोबाईल, लैपटॉप, ऑडियो कैसेट, सीडी एवं पत्थलगड़ी आन्दोलन पर डब्लूएसएस द्वारा एक हफ्ते पहले जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति को भी जब़्त कर लिया. स्टेन को उन पर लगाये गये आरोपों का ब्यौरा भी नहीं दिया गया. पुलिस द्वारा सारी प्रक्रिया की वीडियों रिकॉर्डिंग की गयी.
कुछ दिनों पहले स्टेन स़्वामी एवं झारखंड के अन्य 19 व्यक्तियों, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी शामिल हैं, पर देशद्रोह का भी आरोप लगाया गया था. खूंटी में चल रहे पत्थलगड़ी आन्दोलन पर उनके द्वारा किये गये फेसबुक पोस्ट को आरोप का आधार बनाया गया था. उनपर आईटी एक्ट की धारा 66A भी लगाई गयी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ही निरस्त कर दिया था.

छापे एवं गिरफ्तारियों के बाद केंद्र सरकार एवं भाजपा से नजदीकी रखने वाले मीडिया हाउस मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ भीमा-कोरेगाँव घटना को माओवादी षड़यंत्र से जोड़कर एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ रहे है. ऐसा लगता है कि हाल ही में इजाद किया गया अर्बन नक्सल’ शब्द एक प्रोपेगेंडा का हिस्सा है जिससे सरकार विरोध की किसी भी आवाज को दबा सके.

इसे भी पढ़ें – न्यूज विंग की बात हुई सच, एमटीएस नहीं, कांग्रेसी नेता अब चलायेंगे स्लॉटर हॉउस

2019 का चुनाव फर्जी दुश्मनों के नाम पर

छापे एवं गिरफ्तारियां सरकार द्वारा उन लोकतांत्रिक ढंग से उठाये जा रहे विरोध की आवाज को दबाने एवं उन लोगों को डराने का प्रयास है जो समाज के वंचित तबकों की लड़ाई लड़ रहे हैं. यह भाजपा द्वारा 2019 के चुनाव को फर्ज़ी दुश्मनों के नाम पर और भय के आधार पर प्रभावित करने की कोशिश लगती है.

हम मांग करते हैं कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया हैं. उन्हें तुरंत रिहा किया जाये एवं सभी झूठे एवं मनगढ़ंत आरोपों को वापस लिया जाये.

इसे भी पढ़ें – बोकारो डीसी ने नियम विरुद्ध जाकर दी बियाडा की जमीन, उद्योग निदेशक ने खारिज किया आदेश, कहा –

पत्र में हस्ताक्षर करनेवाले साामाजिक कार्यकर्ता

यूनाइटेड मिल्ली फोरम के अफजल अनीस, राइट टू फूड कैंपेन के आकाश रंजन, सिराज दत्ता, अशर्फी नंद प्रसाद, बीबी चौधरी ,बलराम, सलमोन, दयामनी बारला, जेम्स रेंज, ज्या द्रेज, प्रेम वर्मा, रामदेव विश्वबंधु आदि ने हस्ताक्षर किये.

Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close