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सरकारी स्कूलों के विलय में RTE कानून का उल्लंघन कर रही है सरकार

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Satya Prakash Prasad

Ranchi : झारखंड सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों का विलय (मर्जर) कर रही है. स्कूलों के विलय के दौरान स्कूली शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई एक्ट) का घोर उल्लंघन किया जा रहा है. गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, चाईबासा, लातेहार, खूंटी जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आरटीई कानून का उल्लंघन कर सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों का विलय करवाया गया है. इन जिलों में सौकड़ों की संख्या में वैसे स्कूल सरकार द्वारा बंद कर दिये गये हैं, जहां बच्चों की संख्या सैकड़ों में थी. वहीं, इन जिलों के छात्रों को अपने घरों से काफी दूर स्थित स्कूल में पढ़ने के लिए जाना होता है. स्कूल विलय के बाद वर्तमान में कई स्कूलों में (कक्षा 1 से कक्षा 5 तक) छात्रों की संख्या शिक्षकों के अनुपात में ज्यादा हो गयी. इसके कारण शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन हुआ है. वर्तमान में स्कूल विलय के बाद से ज्यादातर स्कूलों की कक्षाओं में प्रति 50 से 60 बच्चों पर एक शिक्षक है, जबकि आरटीई कानून के अुनसार प्रति 40 बच्चों पर एक शिक्षक बहाल किया जाना है. वहीं, आरटीई कानून के तहत हर एक किलोमीटर के दायरे में एक स्कूल स्थापित करने की बात कही गयी है, लेकिन झारखंड सरकार स्कूल विलय के क्रम में इस कानून का उल्लंघन कर रही है.

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नीति आयोग से वाहवाही लूटने में जुटे शिक्षा अधिकारी

झारखंड में अब तक छह हजार से अधिक सरकारी स्कूलों का विलय हो चुका है. नीति आयोग से वाहवाही लूटने के लिए झारखंड सरकार के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल विलय के दौरान जमकर आरटीई कानून का उल्लंघन किया है. आदिवासी बहुल क्षत्रों में जहां सरकारी स्कूलों में बच्चे अधिक संख्या में आते हैं, वहां भी स्कूलों को बंद कर दिया गया है.

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बच्चों को स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर का करना पड़ रहा सफर

झारखंड के सरकारी स्कूलों के विलय के बाद से आदिवासी बहुल क्षेत्र के बच्चों को अब लंबी दूरी तय कर स्कूल जाना पड़ रहा है. गुमला के चैनपुर, भरनो, सिसई ब्लॉक में पहाड़ी पार कर बच्चों को चार से छह किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. लातेहार के मनिका, बालूमाथ, बारियातू आदि ब्लॉक में बच्चों को पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूरी तय कर स्कूल जाना पड़ता है.

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जहां-जहां सरकार ने बंद किये सरकारी स्कूल, वहां खुल रहे हैं प्राइवेट स्कूल

झारखंड सरकार की ओर से जहां-जहां सरकारी स्कूलों को स्कूल विलय के नाम पर बंद किया जा रहा है, वहां प्राइवेट स्कूल खोले जा रहे हैं. कुल मिलकार देखें, तो हाल के दो सालों में गुमला, सिमडेगा, लातेहार आदि कई आदिवासी जिलों में प्राइवेट स्कूल तेजी से खोले जा रहे हैं. ऐसे में सवाल यह कि सरकार ने इन क्षेत्रों में किस योजना के तहत स्कूलों को बंद किया है और जहां स्कूल बंद हो रहे हैं, वहां प्राइवेट स्कूल तेजी किस प्रकार खुल रहे हैं.

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क्या कहते हैं विभाग के सचिव

स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव एपी सिंह ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए स्कूल विलय नीति पर सरकार काम कर रही है. वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है. बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के बाद ही प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूल टक्कर ले सकते हैं. स्कूल विलय इसी प्रक्रिया की एक पहल है. इसके माध्यम से सरकारी स्कूलों की व्यवस्था ठीक करनी है.

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