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‘झारखंड आंदोलनकारियों के मामले में सरकार स्वत: संज्ञान ले’

  • झारखंड आंदोलनकारियों की समीक्षा बैठक संपन्न

Ranchi : झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की बैठक रविवार को करमटोली स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुई. इस समीक्षा बैठक में राज्य के प्रत्येक जिले के झारखंड आंदोलनकारियों ने भाग लिया. मौके पर 11 सूत्री मांग पत्र का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पास किया गया.

बैठक में 28  अक्टूबर को आयोजित मानव श्रृंखला एवं 15 नवंबर को आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी. इस दौरान प्रखंड एवं जिला स्तर से झारखंड आंदोलनकारियों के मान सम्मान पेंशन एवं राजकीय सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित पत्रों को सकारात्मक कदम बताया गया. बैठक में जमशेदपुर से झारखंड आंदोलनकारी संजय लकड़ा के जान-माल की सुरक्षा की मांग की गयी.

कहा गया कि राज्य सरकार को झारखंड आंदोलनकारियों के मामले में स्वत संज्ञान लेना चाहिए. आज झारखंड आंदोलनकारी की स्थिति राज्य सरकार से छुपी नहीं है. राज्य सरकार में बैठे अधिकारी पदाधिकारी राज्य सरकार को झारखंड आंदोलनकारियों के मामले में गुमराह कर रहे हैं. इस वजह से पूरे राज्य में झारखंड आंदोलनकारियों के बीच आक्रोश पनप रहा है.

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कहा गया कि अभी झारखंड आंदोलनकारी राज्य में अपनी सरकार समझकर चल रहे हैं, कल ऐसा ना हो कि अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी करने के लिए विवश हो जाएं.

मोर्चा के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. इसे सरकार झारखंड आंदोलनकारियों की कमजोरी ना समझे. प्रतिदिन दिन झारखंड आंदोलनकारी मर रहे हैं. उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. आज हमारे बीच करो या मरो की स्थिति है. ऐसे में सरकार को स्वयं तय करना होगा कि झारखंड आंदोलनकारियों के मामले में क्या करना है या नहीं करना है. सरकार स्थिति स्पष्ट करे. धोखे में रखकर सत्ता ना संभाले.

मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के लिए यह शर्मनाक स्थिति है कि राज्य में आंदोलनकारियों की पार्टी की सरकार है और अपनी ही सरकार में वे खुद को बेबस समझ रहे हैं. उन्हें उचित मान-सम्मान पेंशन देने में सरकार कोताही बरत रही है यह सबसे शर्मनाक स्थिति है.

मोर्चा के प्रधान सचिव अजीत मिंज ने कहा कि झारखंड सरकार आंदोलनकारियों की ताकत देखना चाहती है. हम इसके लिए सहर्ष को तैयार हैं. 50,000 झारखंड आंदोलनकारी रांची में जुड़ेंगे और अपने मान-सम्मान, अस्तित्व की रक्षा एवं पेंशन के लिए सरकार के खिलाफ शंखनाद करेंगे. उपाध्यक्ष अश्वनी कुजूर ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड आंदोलनकारियों के सब्र का इम्तिहान ना ले.

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मोर्चा के वित्त अध्यक्ष आजम अहमद ने कहा कि आंदोलनकारियों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. आज झारखंड बना है और झारखंड में कोई भी दल  सत्ता  में है तो यह यहां के आन्दोलनकारियों की कुर्बानियों की वजह से ही कर रहे हैं.

इनके अलावा प्रफुल्ल तत्वा, दिवाकर साहू, गैब्रियल खाखा, डॉ प्रणव कुमार बब्बू, किशोर किस्कु, विश्वजीत प्रामाणिक, लखन महतो, बीरेन्द्र ठाकुर, श्वेता मुखर्जी ने भी अपनी अपनी बातें रखीं.

मौके पर अनिल वर्णवाल, श्वेता मुखर्जी, अनिरुद्ध मंडल, डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, परवीन कृष्ण सहाय, बीके शुक्ला, सुभाष कुमार, विनीता अल्पना खलखो, सरोजिनी कच्छप, रंजीत उरांव, एरोन कच्छप, राजेश महतो, अनिरुद्ध मंडल, अशोक कुमार साहु, तुलसी करमाली, मदन मोहन माहेटा, मधु सूदन, रामनाथ महतो, राजेन्द्र कर्मकार, मनबोध महतो, दनार्दन महतो, चितरंजन महतो, जलील अंसारी, कालेश्वर मांझी, गणेश, दीनानाथ राम, निखिल चन्द्र, जिहुड़ सिंह, नासिर उद्दीन अंसारी, रसराज महतो,  शेख सुल्तान अंसारी, फूचा सोरेन, संजय कुमार टुडू, गुप्ता कुमार सोरेन, कुमोद वर्मा, दिनेश महतो, गोकुल चन्द्र, बैजनाथ महतो, अशोक कुमार साहु, अनिल वर्णवाल, अनिरुद्ध प्रसाद मंडल, अश्विनी कुजुर, शिव शंकर शर्मा, गोपाल रवानी के अलावा सैकड़ों की संख्या में आन्दोलनकारी मौजूद थे.

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